# love and sex -2

           love and sex 2

       मैने कई साल पहले जब   अफ़ग़ानिस्तान में औरतो के लिए एक आर्डर पास होते देखा तो मै  बहुत हैरान हो गई थी। जिसमे कहा गया था -"जो औरते अपने  पति की इच्छा पूरी करने  से  आनाकानी करें तो उन्हें खाना न दिया जाये।" सुनकर मुझे यकीन  नहीं आया था।
       किसी मुस्लिम देश में औरतो के पास अधिकार नहीं होते ऐसे में  कोई औरत पति को जब मना  करती होगी तो किसी  विवशता में मना  करती है तो इसका कारण जानने की भी किसी ने जरूरत नहीं समझी। सीधे वहां की संसद में बिल पास करवा दिया। उनके लिए औरत की खाने की भूख और आदमी की शारीरिक भूख एक समान है। 
      मैने  अभी 8  जनबरी को कोरिया देश में सेक्स गुलाम के बारे में सुना मुझे बहुत हैरानी हुई। वहां सन  1910  से 1946  तक कोरिया और  चीन  जैसे देशो से गरीब घरो की लड़कियों को नौकरी के बहाने  झूठ बोलकर  जापान ले जाया जाता था। वहां उनके सैनिको के हवाले कर दिया जाता था। इसे कम्फर्ट स्टेशन कहा जाता था।  ये सेनिको के लिए कम्फर्ट था तो उन लड़कियों के लिए क्या था। जब उन्हें अनगिनत सैनिको को शांत करते हुए, खुद हमेशा के लिए शांत हो जाना  पड़ता था । उनका दर्द किसी ने नहीं समझा।  वे उनका जानवरो के समान इस्तेमाल करते थे। 
        दूसरे  विश्व युद्ध के बाद  भी इनका इस्तेमाल मित्र रास्ट्रो  के सेनिको ने किया। उन्हें बंद नहीं किया गया था बल्कि एक साल बाद जब खबरों में इनकी भयानक खबरे सामने आयी तब उन लड़कियों को वहां से आजादी मिली थी।
       सं 1990  से अब तक उनके लिए आवाज उठाई जाने लगी  अब जाकर जापान सरकार    उन्हें इसके एवज में मुआवजा देने के लिए तैयार हुई  है। लेकिन इस हैवानियत के बदले जो दिया जा रहा है। वे नाकाफी है।   इस जुल्म का शिकार होने वाली 90  %  औरते  अब तक मर चुकी है। उनकी चीखे उस समय सुनकर किसी को उनसे सहानुभूति हुई होगी ?नहीं कभी नहीं। 
       सबसे पहले जब जापानी सैनिक हारे हुए देश की   आम जनता की औरतो के साथ बदसलूकी करते थे तब वहां के राजा ने कहा-" इन सेनिको को कम्फर्ट स्टेशन में भेज दिया जाये ताकि उनके हैवानियत भरे कर्म आम जनता के सामने खुलने न पाए। "  इससे  उन्हें अपमान महसूस होता था। लेकिन कम्फर्ट स्टेशन की लड़कियों पर कितना भी जुल्म होने पर  उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं था।  
        जिन भी देशो में आक्रमण होता है उन हारे  हुए  देशो  की औरतो के साथ ऐसा ही बहशियाना सलूक किया जाता है। जो आदमी अपने घरो में सभ्य होते है उनकी विपरीत परिस्थिति में व्यवहार एकदम बदल जाता है।
        जर्मनी के हिटलर को जितना बहशी समझते है।  उससे ज्यादा जब जर्मन और जापान हार गए थे तब उनके देशो की औरतो  के साथ मित्र राष्ट्रों  के सैनिको ने  ऐसे अमानवीय व्यवहार किये थे जिनसे रूह कांप  उठती है। 
     आज भी जितने हारे  हुए  देश  है उनकी औरतो के बारे में जानकारी हासिल करके देखिये  उनके अस्तित्व के मायने ही खत्म हो जाते है।
       ऐसे सम्बन्धो से पैदा हुए बच्चो  को माँ भी स्वीकार नहीं कर पाती क्योंकि उनको देखते ही उनके सूखे हुए घाव हरे हो जाते है. 
    मेँ    इंसानी फितरत को  बदलने के लिए मुहीम नहीं चला रही हूँ बल्कि आपके सामने केवल सच्चाई ला रही हूँ  आदमी  प्यार और शारीरिक सुख  दोनों में अंतर् नहीं कर पाते  है। उनके लिए ये जरूरत होती है 
     

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...