# love and sex 4

           love  and  sex 4 

              मेँ  बचपन से सुनती आयी थी। पति के आने का समय हो गया। अब काम छोड़ कर तैयार हो जाओ तब इसका कारण समझ नहीं आता था। बाद में देखा लड़कियां अपने साज - श्रृंगार पर बहुत पैसा खर्च करती है। उनका खाने पर जितना खर्च होता है। उससे ज्यादा उनकी सजावट पर पैसा खर्च होता है। हमेशा इसका कारण सोचती रहती थी। 
      कुछ दिन पहले मेरी सहेली से बात हो रही थी। उसने बताया   मै   बेटे से    बहू  के खर्चे पर बात कर रही  थी । मैने  उससे कहा  -तेरी बहु इतनी सूंदर है। वह इतना पैसा सुंदरता बढ़ाने पर क्यों खर्च करती है।   इसकी उम्र में भगवान  इंसान को सबसे सूंदर रखता है। अभी शादी हुई है। उसे beauti  पार्लर  वाली की इतनी जरूरत क्यों पड़ती है। उसने कहा -यदि सही से नहीं रहेगी तब मुझे अच्छी नहीं लगेगी। फिर मै  पैसे का क्या करूंगा। मुझे बहुत हैरानी हुए। उसके श्रृंगार पर खर्च होने वाला पैसा उसे जरूरी लगता है।
          आज सीधी साधारण घरेलु  मसालों  से महकी हुई  पत्नी की जगह, सुंदरता की पराकाष्ठा पर पहुंची हुई  बीबी सबकी चाहत है। हमेशा ही सुन्दर  औरते मन को लुभाती रही  थी।
   औरत की कमनीयता और कोमलता सदियों से उसके गुण  माने जाते है। आज भी सभी को ऐसी औरत की इच्छा होती है। हम कितने भी प्रगतिशील हो जाये। औरते पुलिस में जाये या फौज में घर में  उनकी कोमलता ही सबसे पहले मायने रखती है। 
    पुरुष अपना बाहुबल बढ़ाकर ,पैसे कमाकर  और औरते अपनी सुंदरता बड़ा कर  मनमाफिक जिंदगी जीती  है। सूंदर औरते अपनी सुंदरता के बल पर शक्तिशाली पुरुषो को झुकाने का माद्दा रखती है। इसलिए औरतो के लिए सुंदरता उनके हथियार के सामान है। जिसकी नोक हमेशा तेज रखने के जुगाड़ किये जाते है।
       जो औरते अपनी शादी होने के बाद लापरवाह हो जाती है। अपनी देखभाल करनी छोड़ देती है। बेडौल  होती जाती है उनके सफल  पति को भटकते देर नहीं लगती। उनका मन डगमगाता रहता है। उनसे वफ़ा की उम्मीद करना बेकार है। 
        आदमी प्यार पत्नी से कितना भी करे लेकिन एक नजर दूसरी पर मारते  देर नहीं लगती। जिनके पति सूंदर और सफल है  उनके सामने इस तरह की दिक्क़ते आती रहती है। असफल लोगो के जीवन से औरत का सुख भले ही  चला जाता है।  लेकिन सफल लोगो के आगे बहुत औरते रहती है। ऐसे में अपने परिवार को बांधे  रखने के लिए बहुत कोशिश करनी पड़ती है।   इसलिए लापरवाही सही नहीं है।  अब सामाजिक मापदंड भी बदल गए है।      

        

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