नफरत की आग में जलती हुए जिंदगी
लोग नफरत और प्यार में अंतर नहीं कर पाते वे नफरत करने के अनेक कारण गिना देते है। लेकिन जिससे नफरत करते है। वे उसका 10 % मुश्किल से नुकसान पंहुचा पाते है। जबकि अपना 90 % नुकसान पहुंचाते है। आपको अजीब लग रहा होगा ऐसा कैसे हो सकता है। लेकिन यही सच्चाई है।
आप खुद सोच कर देखिये हम जिससे नफरत करते है उसके बारे में 24 घंटे सोचते रहते ही उसको ऐसा कहेंगे, इतना सुनाएंगे कि उसकी आँखों में आंसू आ जाये। हमारे अनुसार हम उसे कई घंटे तक उटपटांग बोलते रहेंगे और वह सुनता रहेगा। लेकिन सच्चाई में ऐसा नहीं होता है। जब उसके पास पहुंचते है तब पता चलता है जिसे हम सुनाने के बारे में घंटो सोच रहे होते है उसके सामने मुश्किल से दस मिंट बोल पाते है जबकि हमने उसके बारे में सोचते हुए अनगिनत घंटे गुजार दिए होते है ।
उन घंटो की बैचेनी याद करके देखिये उस समय आपका खून खौल उठता होगा। आपके मन में कोई हथियार उठा कर घायल करने का मन करता होगा। लेकिन हम सभ्य प्राणी होने के कारण शब्दों के माध्यम से भी उसका उतना बुरा नहीं कर पाते जितना सोच रहे होते है।
उसे सुनाने के बाद भी हमारे अंदर भरा हुआ गुबार खत्म नहीं हुआ। उसे सुनाने के बाद भी दिल का बोझ कम नहीं हुआ। उसके बाबजूद हम खुद को अपराधी महसूस कर रहे होते है। क्योंकि बचपन से बुरा बोलने के संस्कार हमे नहीं मिले होते है। इसलिए बुरा बोलने के बाद भी ख़ुशी नहीं मिल रही होती है। बहुत कम लोग होते है जो ईंट का जबाब पत्थर से देकर खुश होते है। सभी ऐसे नहीं होते है।
ग्रीक में एक कहावत है -यदि आप दुश्मन को मारने जा रहे हो तो पहले दो कब्रे खोद जाओ क्योंकि जब उसे मारोगे तो सामने वाला आसानी से मरने के लिए तैयार नहीं होगा वह तुम्हे भी नुकसान पहुंचाएगा। हो सकता है उससे पहले तुम्हे ही मौत आ जाये।
यदि उसे तुमने मार भी दिया तो कानून तुम्हे भी सजा देगा। किसी लाश को छुपाना आसान काम नहीं होता। गुस्से के कारण हम अपने प्रियजनो के बारे में नहीं सोच पाते हमारे बाद उनका क्या होगा उनका जीवन कितना दुखदाई हो जायेगा।
इसलिए गुस्से और नफरत पर नियंत्रण करने से हम बहुत लोगो को दुःख की आग से बचा पाएंगे। ये अपराधबोध कई दिन तक हमे तड़पाता रहता है। इससे अच्छा है किसी के बारे में बुरा सोचा ही नहीं जाये।
हम अपनी नफरत करने की आदत नहीं छोड़ेंगे तो एक दिन सारी दुनियां में कमियां दिखाई देंगी। आप किसी को देखकर खुश नहीं रह पाएंगे। जिसे भी देखेंगे आपको वह आपका बुरा करता हुआ प्रतीत होगा। जबकि ऐसा नहीं होता है। हमारे जीवन में बुरे लोग मुश्किल से १ % होते है 99 % हमेशा बुरे नहीं होते है। बल्कि हमे उनसे काम लेना नहीं आता।
हम चाहते है सारी दुनियां हमारे हिसाब से चले लेकिन हर इंसान का जीने का तरीका अलग होता है। वह अपने हिसाब से हमारा बुरा नहीं कर रहा होता है यहाँ तक की उसे खुद पता नहीं होता उसके व्यवहार से सामने वाले को दुःख पहुंच रहा है। वह केवल अपनी ख़ुशी ढूंढ रहा होता है। उसकी ख़ुशी में किसी न किसी रूप में हम अड़चन बन रहे होते है।
जो लोग हमेशा नफरत की आग में जलते रहते है उनका जीवन बहुत कम होता है क्योंकि नफ़रत करते समय हमारे शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव आते है। जिसके कारण चेहरे की रौनक खत्म हो जाती है। समय से पहले बाल सफेद हो जाते है। चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती है। रंग काला पड़ जाता है। बुढ़ापा जल्दी दिखाई देने लगता है। शब्दों में कड़वाहट घुल जाती है। कड़वे शब्द बोलने वाले के पास कौन आना चाहेगा। सब उसे देखते ही दूर होने की कोशिश करेंगे। वह दोस्तों को ढूंढेगा लेकिन कड़वे शब्द सुनने के लिए उसके पास कौन आना चाहेगा। समय से पहले मृत्यु उसे ले जाएगी।
आप सोच कर देखिये आपने नफरत करके किसे नुकसान पहुंचाया ?
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