#bato ke vishay badlo sathi nahi

                बातो के विषय बदलो साथी नहीं  

   शादी से पहले जब साथी से बात होती है। तब मन में सिर्फ खुशी  का  अहसास होता है। हर समय उमंग से भरे होते है। उन कुछ घंटो में हम साथी के सामने अपने श्रेष्ठतम रूप में आते है। दूसरा भी  सबसे अच्छा व्यवहार कर रहा होता है।  हम अपनी पूरे  दिन में हुई  सारी  अच्छी बातो को  उससे साझा करने के लिए ललायित होते है।              बहुत सारे  लोग अपने समय का अधिकतम इस्तेमाल, बाते  करते हुए बिताते है। उनकी बाते खत्म ही नहीं होती है। यहां तक की फ़ोन के बिल की परवाह भी नहीं करते है। उनकी बाते  करने की आदतों से भले सारा परिवार दुखी हो रहा हो ,उन्हें इससे मतलब नहीं होता। वे हर समय बाते  करना पसंद करते है। उसके लिए उन्हें दिन और रात  कम महसूस हो रहे होते है। 

        शादी के कुछ समय बाद उनकी बाते  बहुत कम  हो जाती है। वे इस कमी को अपने प्यार में कमी महसूस कर रहे होते है। ऐसा नहीं है। बल्कि शादी से पहले जब कुछ समय के लिए मिलते है तब पूरे  दिन की हर बात साथी को बताना चाहते है। लेकिन शादी के बाद जब एक साथ रहते है  तब दोनों पूरे  दिन क्या खाया ,पिया , पहना और  किससे  बात की आदि  ये सब चीजे साथी को दिखाई दे रही होती है। इसलिए क्या तुम बताओगे या वह क्या तुमसे पूछेगा।  इन बातो का महत्व खत्म होता चला जाता है। इसलिए  इससे सम्बन्धित बाते   करना भी जरूरी महसूस नहीं होता है। 

          इसलिए बातो का सिलसिला धीरे -धीरे कम  होता चला जाता है। इसे प्यार की कमी नहीं समझना चाहिए बल्कि एक -दूसरे के साथ का लुत्फ़ उठाना चाहिए। जिंदगी में साथ रहने के मौके  बहुत कम मिल पाते  है। क्योंकि  आजकल दोनों का  काम  के  प्रति रुझान होता है। कोई परिवार के लिए नौकरी नहीं छोड़ना चाहता है। नौकरी के कारण दोनों को एक दूसरे से  दूर भी रहना पड़  सकता है।   इसलिए जो पल साथ साथ रहने के लिए मिल रहे है उनका लुत्फ़ उठाना चाहिए। जिंदगी परिवर्तन शील है। जो आज है वह कल नहीं होगा। जो कल होगा उसका अभी  हमें पता भी नही है 

     जब तक बच्चे नहीं होते है। तभी तक एक -दूसरे के समय की ज्यादा जरूरत महसूस होती है। बच्चो के बाद उन्हें आपस में बात करने का समय मिलना मुश्किल हो जायेगा।उसके बाद वे बच्चे से सम्बन्धित बाते  ही करेंगे। उनके आपस के विषय न के बराबर रह जायेंगे।  

         जो लोग परस्पर बहुत बाते  करते है अब वे दुनियां जहां की बाते  करते है न की एक दूसरे की बातो में खोये रहते है। इसलिए वक्त की नजाकत को समझो। बात करने के नए विषयो का चुनाव करो। क्योंकि शादी से पहले के प्यार  का रूप बदल गया है. खत्म नहीं हुआ है। 

     

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...