सुख का अहसास कहाँ
लेकिन जब उसकी मौत हो जाती है तब हम खालीपन महसूस करने लगते है। उसे माफ़ न करने के लिए खुद को दोष देने लगते है। लेकिन वह वक्त वापिस नहीं आता है। हम हमेशा यही सोचते है। जो हमारे पास है वह हमेशा रहेगा। लेकिन मौत ऐसा सच है। जो हमें हिला देता है।
जब किसी की मौत हो जाती है। वह अंतिम समय तक हमसे माफ़ी मांग रहा होता है। तब हमे अपनी गलती का अहसास होता है। यदि हमने उसके सामने उसे माफ़ कर दिया होता तो शायद वह इस दुनियां में होता। उसके जानने वाले उसके साथ सुखद जीवन बीता रहे होते। लेकिन न हम उसके साथ सुखद जीवन बीता सके,उसके अपने भी उनके साथ से महरूम हो गए। हमारा फूट -फूट कर रोने का मन करता है। दीवारों से सिर टकराने का मन करता है। जोर -जोर से चीखने का मन करता है लेकिन हम घुट कर रह जाते है। ये ऐसा सच जिसे नकारा नहीं जा सकता है। जिसे बदला नहीं जा सकता है।
ये अहसास हमें दिन रात आराम से रहने नहीं देता है। रात को सोते हुए भी वही सपने में दिखाई देता रहता है। हम उसके पास जाना चाहते है लेकिन वह हमारी पहुंच से बहुत दूर जा चूका होता है। उसकी मौत के बाद हम बरसो तक साधारण जिंदगी नहीं जी पाते है।
लोग उसकी याद में जब आंसू बहा रहे होते है। तब हम सबके सामने आंसू भी नहीं बहा पाते .क्योंकि शब्दों के माध्यम से हम हमेशा उसके प्रति नफरत भरी बाते करते रहते थे। भले ही उसके प्रति मन में नफरत से ज्यादा प्यार भरा था।
नफरत उसी इंसान से की जाती है। जिससे हम जुड़े होते है। संसार में करोड़ो लोग है। उनके बारे में कभी सोचते भी नही है।
जिनसे हमारी जरूरते जुडी होती है उनसे ही शिकवे -शिकायते होती है। वह इंसान कितना भी हमारे हित के काम करे लेकिन उसके हर काम में कमियां दिखाई देती है। ये इंसानी फितरत है।
इंसान खुद जब काम अपने लिए करता है तब भी उसमे कमियां दिखाई दे रही होती है। लेकिन अपने किये काम में हम खुद गलती निकालेंगे तब दूसरो से क्या उम्मीद करे। वे तो अनगिनत गलतियां निकालेंगे। ये सोच कर चुप हो जाते है लेकिन दूसरो के किये काम में कमियां अपने आप दिखाई देने लगती है। वह इंसान भले ही हमारे मन -मुताबिक काम करे लेकिन हम संतुष्ट नहीं हो पाते है। इसे मैने अनेक बार देखा है।
मुझे कभी कोई बाहर वाला संतुष्ट नहीं कर सकता है। संतुष्टि का अहसास मुझे अपने अंदर से लाना होता है।
संसार में जो लोग खुश रहते है। वे किसी दूसरो के दिए सुख से नहीं बल्कि अपने अंदर की सुख की अनुभूति से खुश होते है। आप अपने अंदर के सुख को पहचानिये। वह दूसरो के देने से कभी नहीं मिलेगा।
मुझे हमेशा दूसरो को ख़ुशी देने से सुख का अहसास होता है। आप अपने अंदर किस बात से खुश होते है सोच कर देखिये। सच्ची ख़ुशी तभी मिलेगी।
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