# age difference

                उम्र का अंतर 

  हम सारी  दुनियां को अपने इशारो पर चलाना  चाहते है। लेकिन सारी  दुनियां तो क्या हम परिवार के कुछ लोगो को भी अपने हिसाब से चला नहीं पाते  है। उनसे काम करवाते समय  हमारे तरकश में रखे सारे   तीर बेकार चले जाते है। हम सामने वाले को गलती करने से रोक नहीं पाते  है। 

          उम्र का अंतर मायने रखता है लेकिन सभी बड़े लोग बेबकूफ  नहीं होते उनका अनुभव सामने वाले को गलतियां करने से रोक रहा होता है। चाहे जवानी में भले ही बड़ो ने वे गलतियां की हो लेकिन उन्होंने अपने अनुभव से जाना होता है।   गलतियों के परिणाम भयानक होते है। वे अपने प्रिय को वे गलतियां नहीं करने देना चाहते है। उन्हें रोकने के भरसक प्रयास करते है। यही वे दूसरो की आँखों में खटकने लगते है। 

        अपने माँ -बाप या सास -ससुर कभी भी बच्चो का बुरा होता नहीं देख सकते है। जिन्हे हम सास -ससुर कहते है वे भी तो आपके साथी  के माँ -बाप होते है। उन्होंने भी बच्चे की परवरिश करते समय अपने आराम से समझौता किया होता है। उनकी आधी  जिन्दगी   बच्चे की परवरिश में बीती होती है। जैसे अपने अभिभावकों के कार्य हमे दिखाई देते है। वैसे दूसरो  के कार्य देखने की कोशिश करनी चाहिए। 

        बुढ़ापे में सबका शरीर कमजोर हो जाता है। इसलिए अपने  जैसे जोश की उम्मीद न करे तभी बेहतर है। उनका दर्द भी समझने की कोशिश करनी चाहिए। पहले समय में लोग सास -ससुर की कमियां निकालते  थे                        आजकल के बच्चे अपने अभिभावकों की कमियां सामने लाने  में पीछे नहीं रहते। उन्हें इसका अहसास नहीं होता। अभिभावक तन ,मन और धन का इस्तेमाल अपने से ज्यादा अपने बच्चो पर करते है। एक बच्चा होने के बाद सारी  जिंदगी अपनी इच्छाओ पर रोक लगाकर केवल बच्चे की जरूरत पूरी करने में लगा देते है। 

         उनके लिए जितना उनके अभिभावक करते है। उतना उनके लिए कोई नहीं कर पाता। वे दूसरो  के किये एक काम की सराहना करते रहते है लेकिन वे अपने बड़ो के अनेक कामो को उनका फर्ज कहकर नकारते देर नहीं लगाते। फर्ज केवल उनके लिए होता है जो मानते है। यदि वे भी अपनी सुखद जिंदगी के लिए  आपको नकार देते तब सोच कर देखो आपकी जिंदगी कैसी  होती।  

       उम्र को सम्मान देने में बुराई नहीं है। सभी को अपनी क्षमता के अनुसार काम करना चाहिए। रिश्तो पर अधिकार समझ कर हाथ पर हाथ रखने   से किसी का भला नहीं होता है। जो जितना काम करता है। उतनी ही उसकी कीमत होती है। वरना आजकल  किसी स्वस्थ इंसान को बैठा  कर खिलाने  वाले नहीं रहे है।

         दूसरो  का सहारा बनो दूसरो  में सहारा मत ढूंढो। वरना  जीना मुश्किल हो जायेगा। काम करते लोग सभी को अच्छे लगते है। जिनके लिए काम करना पड़ता है। आज के समय में उसे विदा करने में लोग देर नहीं लगाते   है।      


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...