#FLOWING PAIN OF TEARS

             तलाक श्रृंखला   

         बहते हुए आंसुओ का दर्द 

जिंदगी खत्म हो जाती है। लेकिन घमंड से पनपा गुस्सा कभी खत्म नहीं होता है। हम जिस पैसे की खातिर रिश्तो को महत्व नहीं देते वही रिश्ते एक दिन खत्म हो जाते है। मै  ऐसे ही एक दम्पत्ति की दास्ताँ सुनाने जा रही हूँ। जिसका पैसा किसी काम नहीं आया। वह अपनी सरकारी नौकरी के कारण पति के साथ न रह सकी. और मरने के बाद जिनको पैसा देने का सोचा था वह पैसा उन तक भी नहीं पहुंच सका। 

        सरकारी नौकरी छोड़ने की हिम्मत बहुत कम  लोगो में होती है। ऐसा ही मेरी सखी के साथ हुआ। उसे दिल्ली में रहते हुए अलीगढ़ के एक वकील से शादी करनी पड़ी। उसने शादी के जोश में दो साल तक छुट्टी ले ली और शादीशुदा जिंदगी की खुशियों में डूब  गई।

         कुछ भाग्यवान  जिंदगी की शुरुरात में बच्चो का  सुख पा  लेते है। कुछ के नसीब में ये सुख नहीं होता। नौकरी वालो को साधारण औरतो से ज्यादा काम करने की आदत होती है। वे केवल घर की चारदीवारी तक सीमित  होकर घर का काम करते हुए  जिन्दा नहीं रहना चाहती। उनका मन घर में नहीं लगता। यदि उन्हें घर में औसत से ज्यादा काम मिले तभी उन्हें अपने जीवन का मतलब समझ आता है। वरना  चारदीवारी उन्हें काटने लगती है। उन्हें जिंदगी बुरी लगने लगती है। 

        स्मिता ने दो सालो में पति को दिल्ली आकर वकालत करवाने के लिए बहुत मनाने  की कोशिश की लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुए।  क्योंकि अलीगढ़ में उनकी वकालत अच्छी चलती थी। वे दिल्ली आकर फिर से शुरुरात करने से डरते थे। 

         उसने बच्चे न होने पर फिर से नौकरी शुरू कर दी। लेकिन स्मिता के पति पर कोई असर नहीं हुए। उसके पति कभी दिल्ली नहीं आये। काफी समय तक स्मिता अपने पति के पास हर छुट्टी में जाती थी। लेकिन उसके पति कभी उससे मिलने नहीं आये। 

        स्मिता की अच्छी आमदनी थी लेकिन पति के अभाव  में वह सही तरह से जीवन न जी सकी। एक गरीब इंसान की तरह मूल सुविधाओं के साथ जीवन जीती रही। जबकि उसके पति और उसकी बहुत अच्छी आमदनी थी उसके बाबजूद अलीगढ़ में उसके पति मजबूर जिंदगी जीते रहे। वह दिल्ली में सुविधा विहीन जिंदगी जीती रही।                 उसने कभी अपने ऊपर सही से पैसा खर्च नहीं किया। उसके मन में सदा रहा, उसके दुनियां से जाने के बाद सारा पैसा उसके नॉमिनी को मिलेगा।लेकिन सोचा हुआ हमेशा पूरा नहीं होता है ऐसा ही उसके साथ हुआ। वह समय से पहले दुनियां से चली गई।  स्मिता को दुनियां छोड़े हुए कई साल बीत चुके है। लेकिन उसके पैसो  का कोई फैसला नहीं हुआ है क्योंकि कागजो में नॉमिनेशन नहीं था।  

      मुझे आज भी उसकी मेहनत और पैसे  कमाने के मायने समझ नहीं आते। वह पूरी जिंदगी सभी सुख से महरूम रही ,इसी  पैसे की खातिर;  लेकिन पैसो  का भी सही फायदा नहीं उठा सकी. जिंदगी में यदि उसके पति दिल्ली आकर वकालत करने की कोशिश करते तो शायद अलीगढ़ जितनी शौहरत न कमा पाते।  लेकिन एक सुखी जिंदगी जी सकते थे। उन दोनों का आखिरी समय तक तलाक नहीं हुआ था लेकिन उन्होंने तलाक से बदतर जिंदगी जी। 

       उनके घमंड ने उन्हें पत्नी  के अंतिम संस्कार में आने से भी रोक दिया। जबकि दोनों ने दूसरी शादी कभी नहीं की। 

         उसकी नौकरी का पैसा दिलवाने के लिए अब वे  स्मिता की तरफ से मुकदमा लड़ रहे है.यदि उन्होंने उसके बहते हुए आंसू  पहले देख लिए होते तब दोनों सुखी होते। स्मिता जिंदगी की खुशियों का सपना लिए दुनियां से रुखसत नहीं करती। 

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