रिश्तो को संभालने के लिए समय की जरूरत होती है
इंसान जिस रिश्ते में रह रहा होता है। हमेशा उसे बुरा समझ रहा होता है। उसके मन में उससे निकल कर आजाद रहने की इच्छा बलबती है। उससे निकलने के बाद उसे लगता है उसके जीवन में हर तरफ खुशियां ही खुशियां होंगी लेकिन ऐसा नहीं होता है। जैसे रस्सी टूटने के बाद उसका अधूरा पन मन को दुःख देता है। वेसे ही रिश्ते का अधूरापन हमे सोचने के लिए मजबूर कर देता है। क्या सारी गलती केवल दूसरे की थी। या हम ही उस डोर को सही तरह से पकड़ नहीं सके।
हर रिश्ते के टूटने पर काफी समय बाद हमें दोनों ही तरफ की गलतियां नजर आ रही होती है। रिश्ते तोड़ते समय हमारा अहम सबसे बड़ा लग रहा होता है। जब सब कुछ टूट जाता है। रिश्ते का कोई किनारा नजर नहीं आ रहा होता है। तब आइना साफ होता है। उस साफ आईने में अपनी सही तस्वीर नजर आती है। जब गुस्से में भरे होते है तब केवल सामने वाले की गलतियां दिखाई देती है। हमें हर रिश्ते को समझने के लिए समय की जरूरत होती है। इसलिए रिश्तो को तोड़ने से पहले कुछ समय के लिए भूल जाना चाहिए। क्योंकि समय बाद वही रिश्ता अच्छा लगने लगता है।
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