दुःख हमारे मन का होता है
हम सुख हमेशा दूसरो में ढूंढते है। जबकि हर कोई सुख की तलाश में घूम रहा है। सुख की तलाश में हर इंसान घूम रहा है. इसका मतलब वह भी दुखी है। अगर दुखी न होता तो सुख क्यों ढूंढ रहा होता। जब सामने वाला दुखी है। जो खुद दुखी है वह हमे सुख कैसे दे सकता है। इसलिए हम सभी दुखी है।
जो चीज दूसरो से मांगी जा रही है। वह हमें तभी देगा जब वह चीज उसके पास फालतू होगी। जब उसके पास ही सुख की कमी है तो ऐसी चीज वह हमे कैसे दे सकता है।जो उसके पास नहीं है। इसलिए हर तरफ दुःख है कोई सुखी नहीं है।
सुख हमारे खुद के अंदर होता है। जिसे हम महसूस नहीं कर पाते है। उसे हर तरफ, हर इंसान में ढूंढ रहे होते है। जो चीज बाहर नहीं है वह हमे कैसे मिलेगी। इसलिए हम दुखी रहते है। दुःख के लिए सामने वाले को जिम्मेदार ठहरा रहे होते है। जबकि सामने वाले को भी समझ नहीं आ रहा होता -" मैंने इसे कब और किस रूप में दुःख दिया। "
हमे दुःख वही इंसान दे सकता है। जिसके सामने हमारी कोई अहमियत न हो। जिसके सुख के कारण हम है। वह हमे दुःख देने से पहले कई बार सोचेगा। हर इंसान सुख पाना चाहता है। इसके लिए हर कोशिश कर रहा होता है। जिसकी हर जरूरत हमसे जुडी हुई है। वह उन जरूरतों के कारण हमसे प्यार करता है। जब उसकी जरूरत पूरी नहीं होंगी। तब वह भी दुःख में डूब जायेगा। इसलिए अपनी अहमियत को समझो। जब तक तुम्हारी जरूरत सामने वाले के लिए बनी रहेगी। वह जानबूझकर तुम्हे दुःख नहीं देगा।
दुःख हमारे मन का होता है। हर इंसान दुखी होता है क्योंकि वह खुद दुखी रहना चाहता है। हमारी सोच हमे दुखी बनाती है। किसी को आधा भरा हुआ गिलास आधा खाली दिखाई देता है। तो दूसरे इंसान को वही गिलास आधा भरा हुआ दिखाई देता है।
ये हमारा नजरिया है। हम कब खुश होते है या दुखी। इसके लिए दूसरो को दोष देने वाले हमेशा दुखी रहते है। नजरिया बदलते ही दुनियां बदल जाएगी। मैंने ऐसे बहुत सारे लोग देखे है। जिनके सामने खुश रहने से सम्बन्धित किताबे रख दो। वो उसे पढ़ने से पहले ही कह देते है। हमे पहले से ही पता है जो इसमें लिखा है पढ़ के कोई फायदा नहीं होता इसलिए उस किताब को खोल कर देखना भी नहीं चाहते है। लेकिन जो पता है उसे अमल में लाओगे तभी जिंदगी संवरेगी। वरना उसका जानना बेकार है।
एक दिन हर इंसान दुनियां से चला जाता है। कुछ लोग सारी जिंदगी दूसरो को अपने दुःख का कारण मानते हुए दुखी रहकर दुनियां से जाते है। कुछ अपनी जिंदगी को खुशहाल मानते हुए दुनियां से जाते है दुःख हमारे मन का होता है। जितना चाहे सुखी हो लो या दुखी हो लो।