#sujhav

      वेद ने हिना की शादी के बाद राहत की साँस ली। उनकी तीसरी बेटी माला और हिना में चार साल का अंतर था। इसलिए उन्होंने सोचा कुछ समय बाद हम माला की शादी करेंगे। अभी उनका मन अपने काम को ऊँचा उठाने की तरफ था। उन्होंने दिन रात लग कर कारोबार बढ़ाने में समय बिताना शुरू कर दिया। उनकी कोशिशो ने रंग दिखाना शुरू कर दिया। दो सालो में काम में बढ़ोतरी दिखाई देने लगी।
       माला की पढ़ाई  पूरी हो गयी थी। सुकन्या को उसकी शादी के विचार ने परेशान करना शुरू कर दिया। वह जब भी वेद से माला की शादी के बारे में बात करती।
       वह हमेशा कहता - वह अभी छोटी है। व्यापार से दो शादियों में काफी पैसा निकल चूका है। यदि इस समय शादी के लिए पैसा निकाला तो बहुत मुश्किल हो जाएगी। मुझे थोड़ा समय दो। समय आने पर इसकी भी शादी हो जाएगी।
     सुकन्या माँ की तरह सोचती थी। उसके मन में अपनी जिम्मेदारी से आजाद होने का विचार था। उसके अभी अविवाहित चार बच्चे और थे। उसे उनकी शादी का विचार हमेशा परेशान करता रहता था। एक साल और निकल गया।
      वेद ने माला के लिए लड़के देखने शुरू कर दिए। अब तक उनके घर एक दामाद इंजीनियर, दूसरा दामाद l.l.b आ  चूका था। माला इतने समय में बी ऍ.  कर चुकी थी जबकि सुमन और हिना हायर सेकेण्डरी पास थी। माला के लिए जो भी लड़का देखा जा रहा था। वे सब केवल बी. ए  पास थे। माला को इस बारे में सुनकर बहुत गुस्सा आता।
     वह उनके बारे में सुनकर कह उठती -जो कम पढ़ी -लिखी थी। उनके लिए आपने इंजीनियर और वकील ढूंढे और मेरे लिए केवल बी ए  पास। मै अपने से ज्यादा पढ़े हुए इंसान से शादी करूंगी।  इनसे में बिलकुल शादी नही करूंगी।
  वेद सुकन्या के द्वारा माला के कहे हुए शव्द सुनकर तिलमिला जाता। वह गुस्से में कहता-उससे कहो उसे इनसे शादी नही करनी तो अपने लिए खुद लड़का ढूंढ लाये।  उनके लिए मेने विशेष रूप से लड़के नही देखे थे। जो उनकी किस्मत में थे। वे खुद चलकर आए थे।
    सुमन और हिना बहुत  सुंदर थी। उनकी अपेक्षा माला इतनी सुंदर नही थी। लेकिन उसे अपनी ज्यादा पढ़ाई का घमंड था। इसलिए वह कम पढ़े  लड़के से शादी के लिए तैयार नही हो रही थी। सुकन्या को भी लगता इसके लिए भी ज्यादा काबिल लड़का मिल जाता तो अच्छा रहता। वह केवल सोच सकती थी। लड़के देखने का काम तो वेद को करना था। वह वेद को सुझाव देने की कोशिश करती।
      वेद के दूर के रिश्ते दार के द्वारा एक लड़का दिल्ली में नौकरी के साक्षात्कार के लिए आया। वेद के पड़ोस में एक बड़े  अफसर रहते थे। वेद उस लड़के को लेकर उनके घर पहुंचे। उन्होंने उसके पेपर देखे। उन्होंने वेद को सांत्वना दी। ये लड़का काबिल हे इसका चयन हो सकता है।
    उस दिन अफसर की बीबी सुकन्या से मिल कर बोली -तुम इधर -उधर लड़का देख रही हो। ये लड़का पढ़ाई में अच्छा हे। प्रायवेट नौकरी भी कर रहा है। इसकी सनद  के हिसाब से इसकी तरक्की के योग है। हाथ आया रिश्ता है। इस पर विचार करके देखो।
     सुकन्या को उसकी बात अच्छी लगी। उसने वेद से इस बारे में बात की उसे भी सुकन्या की बात उचित लगी। लड़का एम ऐसी बी एड था। माला की ज्यादा  पढ़ाई   की शर्त भी पूरी हो रही थी।
    सुकन्या ने माला से लोकेश के बारे में बात की तो माला ने हामी  भर दी। अब वेद ने लोकेश से  विवाह के बारे में बात चलायी।
     लोकेश बोला -आप इस बारे में मेरे पिताजी से  बात कीजिये। वही आपको जबाब देंगे।
    वेद ने कहा -आपके पिताजी से जरूर  बात करेंगे  यदि तुम्हे माला पसंद होगी। हम अभी सिर्फ तुमसे तुम्हारी पसंद के बारे में पूछ रहे है।
    लोकेश बोला -मुझे कोई एतराज नही है।
  वेद को तीसरा रिश्ता भी घर बैठे मिल गया। उसने लोकेश के पिता से शादी की बात की तो बात बनती चली गयी। उसमे किसी तरह की परेशानी नही आई। उसने एक साल बाद के लिए समय माँगा जिसके लिए लड़के वाले तैयार हो गए।
     वह कई बार सोचता -लोग कहते है। लड़कियों के बाप की जूतियाँ लड़के ढूंढने में घिस जाती है। मुझे तो लड़कियों के मामले में कोई परेशानी नही हुई। मुझे तीनो रिश्ते घर बैठे मिल गए।
    

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