सुमन की शादी को एक साल बीत गया। अब उसे लेकर सबको लगने लगा कि वह ससुराल के माहौल में रम गयी है। उसके लिए सबने चिंतित होना भी बंद कर दिया था।
एक दिन वेद की दूसरी बेटी हिना की शादी के लिए रिश्ता आया। वे हैरान रह गए उनके दिमाग में अभी सुमन की विदाई ही घूम रही थी। उन्होंने इतनी जल्दी हिना की शादी के बारे में सोचा ही नही था। हिना के होने बाले ससुर उनके घर अपने छोटे बेटे के लिए रिश्ता लेकर आये थे।
वेद हतप्रभ होकर बोले -मेने अपनी बड़ी बेटी की शादी की है। इस समय मेरे हाथ खाली है। में इतनी जल्दी दूसरी बेटी की शादी का इंतजाम नही कर पाउँगा। मेरी माली हालत अच्छी नही है.
होतीलाल जी बोले -हम आपसे अभी शादी करने के बारे में नही कह रहे। हम चाहते है आप हमारे बेटे को आकर देख लो। उसके बाद जैसी तुम्हारी इच्छा हो वैसा करना।
उनकी विनम्रता देखकर वेद ने कहा -ठीक है। मै परिवार में विचार -विमर्श करके आपको जबाब दूँगा।
होतीलाल जी के जाने के बाद वेद लाहोर के ख्यालो में खो गए। होतीलाल जी का घर वेद के घर के पास था। होतीलाल जी के कोई बच्चे नही थे। वेद को अपने अभिभावकों का प्यार नही मिला था। उनको होतीलाल जी के घर जाकर बहुत प्यार मिलता था इसलिए वेद अपने खाली समय में उनके घर चले जाते थे। दोनों की जरूरत पूरी हो जाती थी। वे बचपन में होतीलाल जी के शुक्रगुजार थे। उनके कारण ही उन्हें पूर्णता का अहसास हुआ था। इसलिए वे होतीलाल जी के कारण सोचने के लिए मजबूर हो गए।
होतीलाल जी के बच्चे बहुत बाद में हुए जब उन्होंने बच्चे होने की उम्मीद छोड़ दी थी। उनके घर पहला बेटा हुआ। पहला बेटा होने के 14 साल बाद दूसरा बेटा हुआ। उनके घर बच्चे बहुत देर से तरसा-तरसा कर भगवान ने दिए । जब लोग दादा बनते है। उस उम्र में उन्हें औलाद का सुख मिला था उन्हें उन बच्चो का कुछ भी देख पाने की उम्मीद नही थी।
वेद को हमेशा अहसास रहता था मै खुद होतीलाल जी की गोद में खेल कर बड़ा हुआ हूँ। अब मै उनका समधी बनूँगा।
वेद ने सुकन्या के सामने बात चलायी तो उन्होंने कहा-आप रिश्ते के लिए मना मत करो। बल्कि कुंडली बगैरह ले आयो। उनका लड़का देख आयो जरूरी नही हमारे जाते ही सभी कुछ सही होता जायेगा। यदि सब कुछ सही रहा तो हम शादी के लिए कुछ समय माँग लेंगे।
वेद को सुकन्या की बात उचित लगी। उन्होंने एक दिन जाकर उनका बेटा देखा। उन्हें लड़का पसंद आया। उसके बाद उन्होंने उसकी कुंडली मांगी। होतीलाल जी ने कुंडली दे दी।
एक दिन वेद की दूसरी बेटी हिना की शादी के लिए रिश्ता आया। वे हैरान रह गए उनके दिमाग में अभी सुमन की विदाई ही घूम रही थी। उन्होंने इतनी जल्दी हिना की शादी के बारे में सोचा ही नही था। हिना के होने बाले ससुर उनके घर अपने छोटे बेटे के लिए रिश्ता लेकर आये थे।
वेद हतप्रभ होकर बोले -मेने अपनी बड़ी बेटी की शादी की है। इस समय मेरे हाथ खाली है। में इतनी जल्दी दूसरी बेटी की शादी का इंतजाम नही कर पाउँगा। मेरी माली हालत अच्छी नही है.
होतीलाल जी बोले -हम आपसे अभी शादी करने के बारे में नही कह रहे। हम चाहते है आप हमारे बेटे को आकर देख लो। उसके बाद जैसी तुम्हारी इच्छा हो वैसा करना।
उनकी विनम्रता देखकर वेद ने कहा -ठीक है। मै परिवार में विचार -विमर्श करके आपको जबाब दूँगा।
होतीलाल जी के जाने के बाद वेद लाहोर के ख्यालो में खो गए। होतीलाल जी का घर वेद के घर के पास था। होतीलाल जी के कोई बच्चे नही थे। वेद को अपने अभिभावकों का प्यार नही मिला था। उनको होतीलाल जी के घर जाकर बहुत प्यार मिलता था इसलिए वेद अपने खाली समय में उनके घर चले जाते थे। दोनों की जरूरत पूरी हो जाती थी। वे बचपन में होतीलाल जी के शुक्रगुजार थे। उनके कारण ही उन्हें पूर्णता का अहसास हुआ था। इसलिए वे होतीलाल जी के कारण सोचने के लिए मजबूर हो गए।
होतीलाल जी के बच्चे बहुत बाद में हुए जब उन्होंने बच्चे होने की उम्मीद छोड़ दी थी। उनके घर पहला बेटा हुआ। पहला बेटा होने के 14 साल बाद दूसरा बेटा हुआ। उनके घर बच्चे बहुत देर से तरसा-तरसा कर भगवान ने दिए । जब लोग दादा बनते है। उस उम्र में उन्हें औलाद का सुख मिला था उन्हें उन बच्चो का कुछ भी देख पाने की उम्मीद नही थी।
वेद को हमेशा अहसास रहता था मै खुद होतीलाल जी की गोद में खेल कर बड़ा हुआ हूँ। अब मै उनका समधी बनूँगा।
वेद ने सुकन्या के सामने बात चलायी तो उन्होंने कहा-आप रिश्ते के लिए मना मत करो। बल्कि कुंडली बगैरह ले आयो। उनका लड़का देख आयो जरूरी नही हमारे जाते ही सभी कुछ सही होता जायेगा। यदि सब कुछ सही रहा तो हम शादी के लिए कुछ समय माँग लेंगे।
वेद को सुकन्या की बात उचित लगी। उन्होंने एक दिन जाकर उनका बेटा देखा। उन्हें लड़का पसंद आया। उसके बाद उन्होंने उसकी कुंडली मांगी। होतीलाल जी ने कुंडली दे दी।
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