सुमन को देखते ही मोतीराम का बेटा मोहन हैरान रह गया। उसने इतनी अधिक सुंदरता की कल्पना नही की थी। सुमन के चारो और बहाने बना कर आने की कोशिश करने लगा। उसे देखकर सब पशोपेश में पड़ गए। इसी लड़के की शादी को लेकर मोतीराम जी परेशान थे। मोहन से ऐसे व्यव्हार की उम्मीद किसी को नही थी। सुमन की शक्ल और रंगरूप ही बहुत सुन्दर नही था बल्कि उसके बाल भी काले ,भारी और घुटनो तक लम्बे थे जबकि मोहन के परिवार में सबके बाल बहुत कम थे। वे अपने बालो को लम्बा करने के ढेरो यत्न करती थी पर उनके बालो में कोई खास अंतर नही आता था। सुमन के बालो को लेकर मोहन की बहनो के बीच में बहस छिड़ गयी। उनके लिए सुमन के बालो की सुंदरता को लेकर बहम था।इतने लम्बे बल असली नही हो सकते।
वे आपस में बहस कर रही थी -ये बाल असली हो ही नही सकते इसने जरूर नकली बाल लगा रखे है।
वे सब इस मौक़े की तलाश में थे किसी तरह सुमन के बाल खुलवाये जाये।सब अपने कारणों से सुमन को अपने घर ले जाना चाहते थे। उन सबको सुमन की सुंदरता को लेकर भरम था। उन्हें लग रहा था। इसने सुंदर बनने के लिए मेकअप का सहारा लिया है। जबकि सुमन प्राकृतिक रूप से इतनी सुंदर थी की उसने और परिवार के लोगो ने उसकी सुंदरता बढ़ाने के लिए कभी कोशिश करने के बारे में सोचा नही था। उनके घर में इतने साधन नही थे। उन सब के लिए जीवन जीना एक संघर्ष था।
सुंदरता उनके लिए महत्व नही रखती थी। उस घर में सुकन्या और उसकी चारो बेटियाँ सुंदर थी। उन्हें उनको और सुन्दर बनाने का ख्याल ही नही आता था। सुमन जैसी घर में तैयार होती थी वैसी ही तैयार होकर यहाँ आ गयी थी। सुमन का रंग इतना गोरा था कि उसके गाल और होठ अपने आप गुलाबी दिखाई देते थे। उसे किसी मेकअप की जरूरत नही थी। ये बात मोतीराम के परिवार बाले समझ नही सके।
मोतीराम जी चाहते थे। वेद उनके साथ उनके घर चले ताकि वे लोग इस विषय पर खुल कर बात कर सके। ये सब सुबह दस बजे के करीब वहाँ पहुँच गए थे। उन सबने वेद के परिवार को घर चलने के लिए जोर देना शुरू कर दिया। उन्होंने कई सारे कारण उन्हें अपने घर चलने के लिए गिना दिए। जिनके कारण वेद उनके घर चलने के लिए विवश हो गए।
वेद जब मोतीराम के घर पहुंचे तब उनकी लड़कियाँ सुमन को अपने साथ दूसरे कमरे में ले गयी। उससे मुँह हाथ धो कर ताजा होने के लिए कहा। सुमन सुबह से निकली हुई थी इस कारण उसे भी गर्मी लग रही थी। उसके मुँह पर उसे गंदगी का अहसास भी हो रहा था। उसने ज्यादा नानुकर करते हुए हाथ -मुँह धो लिए। उसके बाद मोहन की बहनो ने उसे अपने बाल ठीक ढंग से बनाने के लिए जोर देना शुरू कर दिया। सुमन को अपने बाल दिन में एक बार बनाने की आदत थी। इसलिए उसने मना कर दिया। तब उन सबको लगने लगा इसने जरूर नकली बाल लगाये है। उनका इसरार और बढ़ गया।
तब परेशान होकर उसने कहा ठीक है - कंघा दे दो यदि आप कह रही है तो मै अपने बाल बना लेती हूँ।
मोहन की बहन मेघा ने कंघा लेकर सुमन से कहा -आपके जितने सुंदर बाल इससे पहले मैने कभी नही बनाये। में इसे बनाना चाहती हूँ।
सुमन ने कहा-ठीक है जैसी आपकी इच्छा।
सुमन के मन में उनके इस व्यवहार से उनका प्यार प्रकट हो रहा था। उसे बहुत ख़ुशी हो रही थी। जिनसे वह पहले दिन मिल रही है। वे उसका इतना ध्यान रख रही है। इससे ज्यादा किसी को और क्या चाहिए। मोहन का व्यवहार भी उसके मन में गुदगुदी पैदा कर रहा था।
बहनो को अब उसकी सुंदरता को लेकर जो बहम थे सब खत्म हो गए। उन्होंने माँ को बता दिया सब कुछ सही है। तब मोतीराम जी को उन्होंने अपनी सहमति दे दी। मोतीराम वेद से शादी के लिए दबाब बनाने लगे। तब वेद ने कहा -मुझे शादी से कोई एतराज नही है। लेकिन पेसो की तंगी के कारण आप एक साल बाद शादी का महूर्त निकलवा लीजिये। हमें शादी करने में सहूलियत रहेगी।
वे आपस में बहस कर रही थी -ये बाल असली हो ही नही सकते इसने जरूर नकली बाल लगा रखे है।
वे सब इस मौक़े की तलाश में थे किसी तरह सुमन के बाल खुलवाये जाये।सब अपने कारणों से सुमन को अपने घर ले जाना चाहते थे। उन सबको सुमन की सुंदरता को लेकर भरम था। उन्हें लग रहा था। इसने सुंदर बनने के लिए मेकअप का सहारा लिया है। जबकि सुमन प्राकृतिक रूप से इतनी सुंदर थी की उसने और परिवार के लोगो ने उसकी सुंदरता बढ़ाने के लिए कभी कोशिश करने के बारे में सोचा नही था। उनके घर में इतने साधन नही थे। उन सब के लिए जीवन जीना एक संघर्ष था।
सुंदरता उनके लिए महत्व नही रखती थी। उस घर में सुकन्या और उसकी चारो बेटियाँ सुंदर थी। उन्हें उनको और सुन्दर बनाने का ख्याल ही नही आता था। सुमन जैसी घर में तैयार होती थी वैसी ही तैयार होकर यहाँ आ गयी थी। सुमन का रंग इतना गोरा था कि उसके गाल और होठ अपने आप गुलाबी दिखाई देते थे। उसे किसी मेकअप की जरूरत नही थी। ये बात मोतीराम के परिवार बाले समझ नही सके।
मोतीराम जी चाहते थे। वेद उनके साथ उनके घर चले ताकि वे लोग इस विषय पर खुल कर बात कर सके। ये सब सुबह दस बजे के करीब वहाँ पहुँच गए थे। उन सबने वेद के परिवार को घर चलने के लिए जोर देना शुरू कर दिया। उन्होंने कई सारे कारण उन्हें अपने घर चलने के लिए गिना दिए। जिनके कारण वेद उनके घर चलने के लिए विवश हो गए।
वेद जब मोतीराम के घर पहुंचे तब उनकी लड़कियाँ सुमन को अपने साथ दूसरे कमरे में ले गयी। उससे मुँह हाथ धो कर ताजा होने के लिए कहा। सुमन सुबह से निकली हुई थी इस कारण उसे भी गर्मी लग रही थी। उसके मुँह पर उसे गंदगी का अहसास भी हो रहा था। उसने ज्यादा नानुकर करते हुए हाथ -मुँह धो लिए। उसके बाद मोहन की बहनो ने उसे अपने बाल ठीक ढंग से बनाने के लिए जोर देना शुरू कर दिया। सुमन को अपने बाल दिन में एक बार बनाने की आदत थी। इसलिए उसने मना कर दिया। तब उन सबको लगने लगा इसने जरूर नकली बाल लगाये है। उनका इसरार और बढ़ गया।
तब परेशान होकर उसने कहा ठीक है - कंघा दे दो यदि आप कह रही है तो मै अपने बाल बना लेती हूँ।
मोहन की बहन मेघा ने कंघा लेकर सुमन से कहा -आपके जितने सुंदर बाल इससे पहले मैने कभी नही बनाये। में इसे बनाना चाहती हूँ।
सुमन ने कहा-ठीक है जैसी आपकी इच्छा।
सुमन के मन में उनके इस व्यवहार से उनका प्यार प्रकट हो रहा था। उसे बहुत ख़ुशी हो रही थी। जिनसे वह पहले दिन मिल रही है। वे उसका इतना ध्यान रख रही है। इससे ज्यादा किसी को और क्या चाहिए। मोहन का व्यवहार भी उसके मन में गुदगुदी पैदा कर रहा था।
बहनो को अब उसकी सुंदरता को लेकर जो बहम थे सब खत्म हो गए। उन्होंने माँ को बता दिया सब कुछ सही है। तब मोतीराम जी को उन्होंने अपनी सहमति दे दी। मोतीराम वेद से शादी के लिए दबाब बनाने लगे। तब वेद ने कहा -मुझे शादी से कोई एतराज नही है। लेकिन पेसो की तंगी के कारण आप एक साल बाद शादी का महूर्त निकलवा लीजिये। हमें शादी करने में सहूलियत रहेगी।
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