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        वेद के  बेटे   मनोज के लिए माला की शादी से पहले ही कई रिश्ते आ  रहे थे। लेकिन माला के बड़े होने के कारण उन्होंने किसी रिश्ते के लिए हामी नही भरी थी। अब उन्होंने मनोज की शादी के बारे में सोचना शुरू किया।
     उनके करीबी रिस्तेदार ने कहा -मेरी नजर में एक बहुत सुन्दर लड़की है। वह तुम्हारे परिवार से मेल खाती  है। में चाहता हूँ उससे मनोज की शादी हो जाये।
    वेद ने कहा -आपके लिहाज से वह हमारे परिवार के लायक है तो आगे बात चलाओ। तुमने जो मनोज के बारे में सोचा है वह गलत तो हो ही नही सकता। मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।
    उन्होंने कहा -अभी मै उसकी बड़ी  बहन की शादी  होने का इंतजार कर रहा हूँ। उसकी शादी होने के बाद में उनपर दबाब बनाऊँगा।
   वेद उनके शब्दों पर यकीं करके बैठ  गए। उन्हें मनोज के लिए एक सुन्दर लड़की की जरूरत थी। मनोज के लिए कई रिश्ते आ  रहे थे। लेकिन उनकी लड़कियाँ सुंदर नही थी। इसलिए वेद उन्हें  कोई बहाना बना कर टाल देते थे।
  कुछ समय बाद करनाल से उनके यहाँ उसी सुन्दर लड़की की बड़ी बहन का रिश्ता आया। वेद समझ नही पाये। उन्हें क्या जबाब दे। वे उनकी छोटी बेटी से मनोज की शादी के लिए मन बना बैठे थे। उन्होंने मना करने की जगह उस लड़की को देखने का मन बना लिया।जब छोटी बेटी की इतनी तारीफ सुनी है।  तो बड़ी बेटी भी उससे मिलती -जुलती हुई तो हम उसे पसंद कर लेंगे। 
    उस लड़की को उनके मामा के घर दिखाया गया। उस लड़की को देखकर सुकन्या नाखुश हो गयी यह लड़की उन्हें मनोज के लायक नही लगी। उसका रंग दबता हुआ था। उसके नाक नक्श भी उन्हें पसंद नही आये।
       वेद भी कहते थे -जब मेरी शादी हुई उस समय लड़की को देखे बिना शादी होती थी। उस समय मुझे सुकन्या जैसी सुन्दर लड़की मिल गयी  अब  मेरे खुद के हाथ में सुंदर लड़की लाना है  मै सुंदरता से समझोता क्यों करू। मेरे बेटे के लिए भी सुकन्या से मिलती लड़की लाऊँगा।
     उन्होंने उस लड़की के लिए ना  कहलवा दिया। उस समय तक मनोज के विचार किसी ने पूछना जरूरी नही समझा था। कुछ समय  बाद उस लड़की की शादी हो गयी। उस शादी में जो लोग  गए वे सब उसकी छोटी बहन की सुंदरता के झंडे गाड़  रहे थे। अब सुकन्या  का मन उसकी छोटी बहन को देखने के लिए मचलने लगा।            उन्होंने अपने रिश्तेदार से कहा -अब उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी हे तुम छोटी लड़की से शादी की बात चलाओ। उन्होंने अगले दिन लड़की वालो के घर जाने की हाँ  कर दी।
    जब कांतिलाल ने उस परिवार से शादी के बारे में बात चलायी तो उन्होंने इसके लिए तारीख पक्की कर दी। निश्चित दिन वेद ,सुकन्या अपने दामाद और बेटी के साथ आकर रोकना कर गए। उन्हें वह लड़की बहुत पसंद आई थी। उन्होंने मनोज के लिए ऐसी लड़की की कल्पना की थी लड़के वालो के मन में मनोज पहले से ही बैठा हुआ था। उन्होंने बड़ी नही तो छोटी से शादी होने पर तसल्ली का अनुभव किया।  बड़ी बहन की शादी के सात महीने बाद सोनी की शादी मनोज से हो गयी। सोनी वेद के घर दुल्हन बन कर आ  गयी

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