वेद के पुरे परिवार की मेहनत के कारण घर के हालत बदलने लगे थे। घर में खुशहाली दिखाई देने लगी थी। सुमन 17 साल की हो गयी थी। उसकी मेहनत और सुंदरता के चर्चे दूर तक फेल गए थे। सब उसे अपनी बेटी के और बहू के रूप में देखने के लिए लालायित दिखने लगे थे। सुकन्या की खुद की शादी १६ साल की उम्र में हो गयी थी। इसलिए सुकन्या वेद पर सुमन की शादी के लिए जोर देने लगी। सुमन के लिए लड़का देखने के लिए वेद को विवश करने लगी।
वेद उसे समझाने की कोशिश करता -अभी हमारे घर के हालत बदले है। ये हालत सुमन की मेहनत का फल है। यदि ऐसे उसे अभी रुखसत कर दिया तो हमें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अभी उसकी उम्र खेलने -खाने लायक है। तुम अभी से उसे शादी के बंधनो में बांध दोगी। तो सहज रूप से जी नही पायेगी।
सुकन्या जबाब देती - तुम्हे केवल सुमन दिखाई देती है। उसके पीछे उसकी तीन बहने और खड़ी है. हिना तो सुमन से भी बड़ी लगती है। उसके बाद माला भी जवानी की दहलीज पर खड़ी है। ये दिनों दो -दो साल के अंतर पर व्याहने लायक हो जाएँगी। हम इन्हे ज्यादा दिन घर पर नही रख पाएंगे।
वेद का मन अपनी प्यारी सुमन से इतनी जल्दी बिछड़ने के लिए तैयार नही था। वह इस मसले पर सुकन्या से झगड़ भी पड़ता था। मेरी सुमन अभी शादी लायक नही है। सुकन्या के जोर देने पर भी वह लड़का देखने नही जाते थे। इस कारण सुकन्या और वेद के बीच में कई बार अबोला भी हो जाता। पर वेद सुकन्या की बात मानने के लिए तैयार नही होता।
सुमन की सुंदरता के चर्चे दूर तक फेल गए थे। एक बार मोतीराम एक लड़की को अपने बेटे के लिए देखने गए। उन्हें वह लड़की पसंद नही आई।
उन्होंने अपने साथी से कहा -मुझे लगता है। अपनी कौम में कोई सुंदर लड़की नही है। में तो लड़कियाँ देख कर परेशान हो गया हूँ।
उनके साथी भगत राम एकदम बोल पड़े -आप ऐसे कैसे कह सकते हो सुंदर लडकिया भी आपको मिल सकती है। एक मेरी जानकारी में भी है। लेकिन आपको उस घर से दहेज़ ज्यादा नही मिल सकेगा।
मोतीराम की निराशा एकदम आशा में बदल गयी।
उन्होंने कहा -यदि कोई इतनी सुंदर लड़की है तो दहेज मांग ही कौन रहा है।
भगत राम बोले -एक बार विचार कर लो। बाद में मत कहना मुझे लुटवा दिया। लड़की की सुंदरता में कोई कमी नही है। ये बात में डंके की चोट पर कहता हूँ। उसके पिताजी बहुत बड़ी बीमारी से निकले है। इस कारण उनका पैसा ख़त्म हो गया है। वह तुम्हारी शान के मुताबिक शादी नही कर पाएंगे
मोतीराम के बहुत कहने पर भगत राम उन्हें सुमन के घर ले आये। सुमन मोतीराम की आँखों को भा गयी। उन्होंने वेद से कहा -मुझे अपने बेटे के लिए आपकी बेटी पसंद है। आप भी हमारे घर आकर हमारे बेटे को एक बार देख लो।
सुकन्या घर आये रिश्ते को पाकर खुश हो गयी। अब वेद के पास ना कहने का कोई कारण नही था। उसे लड़के वाले के घर जाना पड़ा। वह उनके घर पहुंचे उनके परिवार में पुराना पन था। उन्हें एक कमरे में बिठा दिया गया। कोई भी उनके पास आकर नही बैठा। वेद से बात करने के लिए कोई नही था। उन्हें मोतीराम का इंतजार करना पड़ रहा था। सुकन्या के कहने पर वेद बेमन से आये थे. उन्हें यहाँ का माहौल अजीब सा लग रहा था।
इतने में वेद को घर के अंदर से आवाज आई - लखपति के घर आये हो। उसके जैसा व्याह भी कर पाओगे।
इतनी बात सुनते ही वेद ने किसी से बात नही की। वे उलटे पैर वापस लौट आये।
वेद ने घर आकर सुकन्या से कहा -में ऐसे घर में अपनी बेटी की शादी नही करूँगा। जहाँ मै लड़का देखने गया था। कोई रिश्ता तय नही किया था। लड़के वाले खुद मेरे दरवाजे पर लड़की का हाथ मांगने आये थे। उस पर उन्होंने मेरी हैसियत का ताना सबसे पहले मार दिया। अभी रिश्ता हुआ नही है। उसपर ऐसे तेवर। ये मेरी लड़की को सुना -सुना कर पागल बना देंगे। में ऐसे परिवार में अपनी बेटी की शादी हरगिज नही करूंगा।
सुकन्या भी चुप हो गयी। ये सुनकर सारा घर शांत हो गया। जब शुभ दिन आयेगा ,तभी सुमन की शादी होगी।
वेद उसे समझाने की कोशिश करता -अभी हमारे घर के हालत बदले है। ये हालत सुमन की मेहनत का फल है। यदि ऐसे उसे अभी रुखसत कर दिया तो हमें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अभी उसकी उम्र खेलने -खाने लायक है। तुम अभी से उसे शादी के बंधनो में बांध दोगी। तो सहज रूप से जी नही पायेगी।
सुकन्या जबाब देती - तुम्हे केवल सुमन दिखाई देती है। उसके पीछे उसकी तीन बहने और खड़ी है. हिना तो सुमन से भी बड़ी लगती है। उसके बाद माला भी जवानी की दहलीज पर खड़ी है। ये दिनों दो -दो साल के अंतर पर व्याहने लायक हो जाएँगी। हम इन्हे ज्यादा दिन घर पर नही रख पाएंगे।
वेद का मन अपनी प्यारी सुमन से इतनी जल्दी बिछड़ने के लिए तैयार नही था। वह इस मसले पर सुकन्या से झगड़ भी पड़ता था। मेरी सुमन अभी शादी लायक नही है। सुकन्या के जोर देने पर भी वह लड़का देखने नही जाते थे। इस कारण सुकन्या और वेद के बीच में कई बार अबोला भी हो जाता। पर वेद सुकन्या की बात मानने के लिए तैयार नही होता।
सुमन की सुंदरता के चर्चे दूर तक फेल गए थे। एक बार मोतीराम एक लड़की को अपने बेटे के लिए देखने गए। उन्हें वह लड़की पसंद नही आई।
उन्होंने अपने साथी से कहा -मुझे लगता है। अपनी कौम में कोई सुंदर लड़की नही है। में तो लड़कियाँ देख कर परेशान हो गया हूँ।
उनके साथी भगत राम एकदम बोल पड़े -आप ऐसे कैसे कह सकते हो सुंदर लडकिया भी आपको मिल सकती है। एक मेरी जानकारी में भी है। लेकिन आपको उस घर से दहेज़ ज्यादा नही मिल सकेगा।
मोतीराम की निराशा एकदम आशा में बदल गयी।
उन्होंने कहा -यदि कोई इतनी सुंदर लड़की है तो दहेज मांग ही कौन रहा है।
भगत राम बोले -एक बार विचार कर लो। बाद में मत कहना मुझे लुटवा दिया। लड़की की सुंदरता में कोई कमी नही है। ये बात में डंके की चोट पर कहता हूँ। उसके पिताजी बहुत बड़ी बीमारी से निकले है। इस कारण उनका पैसा ख़त्म हो गया है। वह तुम्हारी शान के मुताबिक शादी नही कर पाएंगे
मोतीराम के बहुत कहने पर भगत राम उन्हें सुमन के घर ले आये। सुमन मोतीराम की आँखों को भा गयी। उन्होंने वेद से कहा -मुझे अपने बेटे के लिए आपकी बेटी पसंद है। आप भी हमारे घर आकर हमारे बेटे को एक बार देख लो।
सुकन्या घर आये रिश्ते को पाकर खुश हो गयी। अब वेद के पास ना कहने का कोई कारण नही था। उसे लड़के वाले के घर जाना पड़ा। वह उनके घर पहुंचे उनके परिवार में पुराना पन था। उन्हें एक कमरे में बिठा दिया गया। कोई भी उनके पास आकर नही बैठा। वेद से बात करने के लिए कोई नही था। उन्हें मोतीराम का इंतजार करना पड़ रहा था। सुकन्या के कहने पर वेद बेमन से आये थे. उन्हें यहाँ का माहौल अजीब सा लग रहा था।
इतने में वेद को घर के अंदर से आवाज आई - लखपति के घर आये हो। उसके जैसा व्याह भी कर पाओगे।
इतनी बात सुनते ही वेद ने किसी से बात नही की। वे उलटे पैर वापस लौट आये।
वेद ने घर आकर सुकन्या से कहा -में ऐसे घर में अपनी बेटी की शादी नही करूँगा। जहाँ मै लड़का देखने गया था। कोई रिश्ता तय नही किया था। लड़के वाले खुद मेरे दरवाजे पर लड़की का हाथ मांगने आये थे। उस पर उन्होंने मेरी हैसियत का ताना सबसे पहले मार दिया। अभी रिश्ता हुआ नही है। उसपर ऐसे तेवर। ये मेरी लड़की को सुना -सुना कर पागल बना देंगे। में ऐसे परिवार में अपनी बेटी की शादी हरगिज नही करूंगा।
सुकन्या भी चुप हो गयी। ये सुनकर सारा घर शांत हो गया। जब शुभ दिन आयेगा ,तभी सुमन की शादी होगी।
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