वेद के मन में मोतीराम के व्यवहार को लेकर आक्रोश था। कभी एकदम उनके सामने विवश दिखाई देते है तो कभी सारा गुस्सा उनपर उतारकर चले जाते हे. ये देखकर वेद ने सोच लिया था। ऐसे इंसान से रिश्ता नही जोडूगा जिसकी बात में दम नही है। ऐसे इंसान की बातो का क्या भरोसा जो सुनी -सुनाई बात पर आग -बबूला हो जाये।उन्होंने सारे तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया। सिर्फ लोगो की बातो में आकर उनके सामने अपना गुबार निकाल गए ।
इस बात को बीते हुए एक महीना बीत गया था। सबको इस रिश्ते के टूटने का दुःख अवश्य था लेकिन इस रिश्ते को फिर से जोड़ने की किसी तरह की कोशिश नही की गयी थी। सभी सोच रहे थे। किसी तरह कोई चमत्कार हो जाये और टुटा हुआ रिश्ता फिर से जुड़ जाये।
अंतत चमत्कार हो गया एक दिन मोतीराम उनके दरवाजे पर फिर से दिखाई दिए। उनके आने का कारण समझ नही आ रहा था। लेकिन सभ्यता के लिए उनके सामने उनका स्वागत किया। उनके बोलने का इंतजार करने लगे। इस बार वेद ने आगे बढ़कर कुछ शुरुरात नही की। उनको समझ नही आ रहा था। ऐसे इंसान के लिए वे किन शब्दों का इस्तेमाल करे।
वेद को बेटी की शादी का पहला अनुभव था।वेद के मन में बेटी का पिता होने का मलाल नही था। उन्हें सुमन का पिता होने पर गर्व था। वे हमेशा कहते थे जब तक बेटी बाप के घर में है में लड़के वालो के सामने क्यों झुकू। मुझे बेटी का बाप होने का कोई गिला नही है। भगवान मेरी जैसी बेटियाँ कितनो को देता है। उनकी ये कामना अंत तक बनी रही। उनकी बेटियो ने उनका सर नीचा करने लायक कभी कोई काम नही किया। वे उनकी आज्ञाकारी बेटी बनी रही।
मोतीराम जी बोले -मुझे माफ़ कर दीजिये मेने आपके सामने गलत शव्दो का प्रयोग किया। में लोगो की बातो में आ गया था। शादी की तारीख वही रहेगी।
वेद बोले -अपने इतने सारे इल्जाम मेरी बेटी पर लगाये थे। उसके बाद भी आप मेरी बेटी को बहु बना सकेंगे। सोच लो जब मन में एक बार खटका पैदा हो जाये इंसान को उसमें कमियाँ ही दिखाई देती है। शादी के बाद आप मेरी बेटी से न्याय कर पायेंगे इसकी मुझे उम्मीद नही है। आपको हमेशा लगेगा आपके बेटे को सुमन ने आपसे छीन लिया। आप किसी और रूप में उस पर अपना गुस्सा उतारने की कोशिश करेंगे। यह हमसे सहन नही होगा हम ये चाहते है। यह रिश्ता यही खत्म हो जाये। हमें भी सुमन के लिए कोई और लड़का मिल जायेगा। आप भी कोई और बहु तलाश कर ले.
मोतीराम बोले -आप ऐसा मत कहिये मै आपसे अपने कहे के लिए पहले ही माफ़ी मांग चूका हूँ। मै किस रूप में आपसे क्षमा मांगू जिससे आप बीती बाते भूल जाये। मेरा बेटा सुमन के आलावा किसी और लड़की से शादी करने के लिए तैयार ही नही है। इस बीच कई और जगह बात चलाने की कोशिश की लेकिन उसने किसी भी लड़की को देखने से मना कर दिया। उसके चेहरे से सारी रौनक खत्म हो गयी है। वह किसी से कुछ कहता नही है। लेकिन उसके चेहरे से उसका दुःख स्पष्ट दिखाई देता है। मुझसे बेटे का दुःख देखा नही गया। इसलिए में लड़के वाला होने के बाबजूद आपके पास आया हूँ। इस रिश्ते के टूटने से सबको दुःख होगा। बच्चे के लिए अभिभावकों को अपना अहम छोड़ देना चाहिए।
वेद भी सुमन को देखकर सोचते थे उसकी हंसी गायव गई गयी है। सुमन का चेहरा भी बुझा -बुझा सा हो गया था। सुमन वेद के सामने अपने को सामान्य रखने की कोशिश करती थी लेकिन वेद की पारखी आँखे उसके अंदर का दुःख महसूस कर रही थी । वेद और मोतीराम दोनों का दुःख सामान था। इसलिए वेद मोतीराम से समझोता करने के लिए तैयार हो गए।
वे मोतीराम से बोले -में इस बारे में अपनी पत्नी से पूछकर आपको जबाब दे सकूँगा।
वेद ने घर में जाकर सुकन्या से विचार -विमर्श किया। सुकन्या ने कहा-सबको इस रिश्ते के बारे में पता है। रिश्ता हम तोड़े या लड़केवाले, दोनों तरफ से हमारी बेटी की बदनामी होगी। हम किस-किसको समझायेंगे की रिश्ता हमने तोडा है। सब मेरे मुँह पर मेरी सी और दूसरे के सामने दूसरे के मन की बात करेंगे। दोनों हालत में हमें दुःख का सामना करना पड़ेगा। जब मोतीराम जी खुद चलकर आये है। आपसे अपने कहे की माफ़ी माँग रहे है। हमें और क्या चाहिए। आप उनसे आश्वासन ले लीजिये। आगे से ऐसा कुछ नही होना चाहिए। यदि वे ऐसा आश्वासन देते है। तो शादी करने से मुझे कोई गुरेज नही है।
वेद के मन में मोतीराम और सुकन्या के शब्दों का असर हो चूका था। वे शादी का निर्णय कर चुके थे। उन्होंने मोतीराम से आकर कहा -मेरी पत्नी की सहमति है। लेकिन वह आश्वासन चाहती है। बाद में सुमन को इस स्थिति का सामना नही करना पड़ेगा।
मोतीराम अपने घर से ही निर्णय करके आये थे। हर हालत में इस टूटे हुए रिश्ते को जोड़ना है। उन्होंने आश्वासन दिया। आपकी बेटी को हमारे घर में किसी तरह की परेशानी का सामना नही करना पड़ेगा। इस बात से आप निश्चिन्त रहे।
उनके इस आश्वासन से वेद और सुकन्या सुमन के भविष्य के प्रति आश्वस्त हो गए। उन्होंने सुमन की शादी की तैयारी करनी शुरू कर दी।
इस बात को बीते हुए एक महीना बीत गया था। सबको इस रिश्ते के टूटने का दुःख अवश्य था लेकिन इस रिश्ते को फिर से जोड़ने की किसी तरह की कोशिश नही की गयी थी। सभी सोच रहे थे। किसी तरह कोई चमत्कार हो जाये और टुटा हुआ रिश्ता फिर से जुड़ जाये।
अंतत चमत्कार हो गया एक दिन मोतीराम उनके दरवाजे पर फिर से दिखाई दिए। उनके आने का कारण समझ नही आ रहा था। लेकिन सभ्यता के लिए उनके सामने उनका स्वागत किया। उनके बोलने का इंतजार करने लगे। इस बार वेद ने आगे बढ़कर कुछ शुरुरात नही की। उनको समझ नही आ रहा था। ऐसे इंसान के लिए वे किन शब्दों का इस्तेमाल करे।
वेद को बेटी की शादी का पहला अनुभव था।वेद के मन में बेटी का पिता होने का मलाल नही था। उन्हें सुमन का पिता होने पर गर्व था। वे हमेशा कहते थे जब तक बेटी बाप के घर में है में लड़के वालो के सामने क्यों झुकू। मुझे बेटी का बाप होने का कोई गिला नही है। भगवान मेरी जैसी बेटियाँ कितनो को देता है। उनकी ये कामना अंत तक बनी रही। उनकी बेटियो ने उनका सर नीचा करने लायक कभी कोई काम नही किया। वे उनकी आज्ञाकारी बेटी बनी रही।
मोतीराम जी बोले -मुझे माफ़ कर दीजिये मेने आपके सामने गलत शव्दो का प्रयोग किया। में लोगो की बातो में आ गया था। शादी की तारीख वही रहेगी।
वेद बोले -अपने इतने सारे इल्जाम मेरी बेटी पर लगाये थे। उसके बाद भी आप मेरी बेटी को बहु बना सकेंगे। सोच लो जब मन में एक बार खटका पैदा हो जाये इंसान को उसमें कमियाँ ही दिखाई देती है। शादी के बाद आप मेरी बेटी से न्याय कर पायेंगे इसकी मुझे उम्मीद नही है। आपको हमेशा लगेगा आपके बेटे को सुमन ने आपसे छीन लिया। आप किसी और रूप में उस पर अपना गुस्सा उतारने की कोशिश करेंगे। यह हमसे सहन नही होगा हम ये चाहते है। यह रिश्ता यही खत्म हो जाये। हमें भी सुमन के लिए कोई और लड़का मिल जायेगा। आप भी कोई और बहु तलाश कर ले.
मोतीराम बोले -आप ऐसा मत कहिये मै आपसे अपने कहे के लिए पहले ही माफ़ी मांग चूका हूँ। मै किस रूप में आपसे क्षमा मांगू जिससे आप बीती बाते भूल जाये। मेरा बेटा सुमन के आलावा किसी और लड़की से शादी करने के लिए तैयार ही नही है। इस बीच कई और जगह बात चलाने की कोशिश की लेकिन उसने किसी भी लड़की को देखने से मना कर दिया। उसके चेहरे से सारी रौनक खत्म हो गयी है। वह किसी से कुछ कहता नही है। लेकिन उसके चेहरे से उसका दुःख स्पष्ट दिखाई देता है। मुझसे बेटे का दुःख देखा नही गया। इसलिए में लड़के वाला होने के बाबजूद आपके पास आया हूँ। इस रिश्ते के टूटने से सबको दुःख होगा। बच्चे के लिए अभिभावकों को अपना अहम छोड़ देना चाहिए।
वेद भी सुमन को देखकर सोचते थे उसकी हंसी गायव गई गयी है। सुमन का चेहरा भी बुझा -बुझा सा हो गया था। सुमन वेद के सामने अपने को सामान्य रखने की कोशिश करती थी लेकिन वेद की पारखी आँखे उसके अंदर का दुःख महसूस कर रही थी । वेद और मोतीराम दोनों का दुःख सामान था। इसलिए वेद मोतीराम से समझोता करने के लिए तैयार हो गए।
वे मोतीराम से बोले -में इस बारे में अपनी पत्नी से पूछकर आपको जबाब दे सकूँगा।
वेद ने घर में जाकर सुकन्या से विचार -विमर्श किया। सुकन्या ने कहा-सबको इस रिश्ते के बारे में पता है। रिश्ता हम तोड़े या लड़केवाले, दोनों तरफ से हमारी बेटी की बदनामी होगी। हम किस-किसको समझायेंगे की रिश्ता हमने तोडा है। सब मेरे मुँह पर मेरी सी और दूसरे के सामने दूसरे के मन की बात करेंगे। दोनों हालत में हमें दुःख का सामना करना पड़ेगा। जब मोतीराम जी खुद चलकर आये है। आपसे अपने कहे की माफ़ी माँग रहे है। हमें और क्या चाहिए। आप उनसे आश्वासन ले लीजिये। आगे से ऐसा कुछ नही होना चाहिए। यदि वे ऐसा आश्वासन देते है। तो शादी करने से मुझे कोई गुरेज नही है।
वेद के मन में मोतीराम और सुकन्या के शब्दों का असर हो चूका था। वे शादी का निर्णय कर चुके थे। उन्होंने मोतीराम से आकर कहा -मेरी पत्नी की सहमति है। लेकिन वह आश्वासन चाहती है। बाद में सुमन को इस स्थिति का सामना नही करना पड़ेगा।
मोतीराम अपने घर से ही निर्णय करके आये थे। हर हालत में इस टूटे हुए रिश्ते को जोड़ना है। उन्होंने आश्वासन दिया। आपकी बेटी को हमारे घर में किसी तरह की परेशानी का सामना नही करना पड़ेगा। इस बात से आप निश्चिन्त रहे।
उनके इस आश्वासन से वेद और सुकन्या सुमन के भविष्य के प्रति आश्वस्त हो गए। उन्होंने सुमन की शादी की तैयारी करनी शुरू कर दी।
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