#mangli

       होतीलाल जी के बेटे मदन की कुंडली लाने के बाद, वेद पंडितजी के पास हिना और उसकी   कुंडली मिलवाने चले गए। दोनों की कुंडली मिलने पर उन्होंने खुश होते हुए सुकन्या को बता दिया। सुकन्या उनकी ख़ुशी देखकर हैरान हो गयी।
    उसने पूछा -कल तक आप इस बारे में सोचकर परेशान थे आज इतना खुश क्यों हो रहे हो। कुंडली मिलने के कारण इतना खुश होते मैने किसी को नही देखा।
     वेद बोला -तुम जानती हो हमारे पिताजी ज्योतिष जानते थे। उन्होंने हिना की कुंडली बनायीं थी। उन्होंने कहा था।  लड़के वालो को कभी शादी से पहले इसकी कुंडली मत  देना बल्कि लड़के की कुंडली मांगना।  इस लड़की की कुंडली बहुत सख्त है। इसके ग्रहो के हिसाब से इसका पति शादी की रात को ही मर जायेगा। इसलिए उन्होंने कहा था जब भी इसकी शादी की बात चले तुम सबसे पहले लड़के की कुंडली मांगना उसे मिलाना यदि मिल जाये तब आगे बात चलाना। इसकी किस्मत में पति का मरण योग है। यदि लड़के के ग्रह इससे ज्यादा सख्त हुए तब ही वह जिन्दा बच  पायेगा। ऐसे में यदि में पहले किसी को इसकी कुंडली दे देता तो नाहक यह बदनाम हो जाती। में अपनी बेटी का अशुभ कैसे देख सकता था। ये बात मेने किसी को नही बताई थी। में तुम्हे भी दुखी नही करना चाहता था।
     सुकन्या बोली -हिना की कुंडली में मंगल का योग है।
    वेद बोला  - हिना मंगली तो नही है। लेकिन इसकी शादी किसी मंगली लड़के से होती तभी हमारी बेटी सुहागिन रह पायेगी। मदन की कुंडली के हिसाब से वह महामंगली है। इससे शादी करने से हिना का ख़राब योग खत्म हो जाता है। तुम ही बताओ मेरा खुश होना बाजीब हे कि  नही। हमें घर बैठे ऐसा लड़का मिल गया। और हमें क्या चाहिए।
     सुकन्या बोली -आप शादी के लिए तैयार हो। हमारे पास पैसे का इंतजाम नही है। ऐसे में हम क्या करेंगे।
     वेद बोला -होतीलाल जी आएंगे तब हम उनके सामने  अपनी समस्या रखेंगे । देखता हूँ वे क्या जबाब देते है।
      वेद ने होतीलाल जी के सामने अपनी समस्या रखी तो वे बोले -मै तुम्हारे हालत के बारे में अच्छी तरह से जानता हूँ। मेरा बड़ा बेटा  सुमन की शादी में आया था।  उसने शादी में हिना को देखा था उसने  हिना की बहुत तारीफ की तभी से हम सबका मन उससे मदन की शादी करने के लिए लालायित था। लेकिन हम तेरी हालत जानते थे। इसलिए एक साल रुक कर तुम्हारे पास आये है। हमें थोड़ा और रुकने में कोई परेशानी नही है। तू जानता है हम तेरे शुभ चिंतक है। तेरा कभी बुरा नही सोचेंगे।
    वेद उनके शब्द सुनकर आश्वस्त होकर बोला -हम पंडितजी से पूछकर आपको सगाई और शादी का शुभ दिन बता देंगे।
     वेद सुकन्या के पास जाकर बोला -अब तुम ही बताओ हमें क्या करना चाहिए। वे हर तरह से राजी है।
     सुकन्या बोली -हमें इस रिश्ते को छोड़ना नही चाहिए। ऐसे भले मानस हमें कहाँ मिलेंगे। हम  अभी रोके की रस्म कर देते है , कुछ समय  बाद  में इसकी गोद  भराई की रस्म करवा लेते है। उनको भी लगेगा कोई रस्म पूरी हुए। उसके  6  महीने बाद सगाई की रस्म हो जाएगी। उसके एक साल बाद शादी कर देंगे। हमारे उपर  ज्यांदा भार एक साथ नही पड़ेगा। लड़के वालो को भी सही लगेगा।
    सुकन्या की सलाह  सभी को अच्छी लगी। उसके अनुसार शादी की तेयारिया शुरू हो गयी।  

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