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     हिना  के विवाह के लिए इंतजाम होने लगे। वेद ने होतीलाल जी से बारातियो के बारे में पूछा।
      उन्होंने कहा-अब तक जिंदगी भर मेने दुसरो की दाबत में खाया है। बहुत दिनों बाद मुझे लोगो को बुलाने का मौका मिला है ,पास की बारात है। मेरे जानने वाले सभी इस विवाह में आएंगे। उन्होंने पहले से मुझे बुलाने के लिए कह रखा है। मै उनका दिल तोडना नही चाहता।
   वेद बोला -आपको पता है।  सरकार ने शादी में एक सीमा से अधिक बारातियो  पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। यदि आप ज्यादा बाराती लाओगे तो हम परेशानी में फंस जायेंगे।
   वेद के कहने पर होतीलाल जी कम बाराती लाने  के लिए राजी हो गए।  उन्होंने अपनी तरफ से कम लोगो को बुलाया था। लेकिन समाज में उनको लोग सम्मान बहुत देते थे। उनका अच्छा व्यवहार लोगो को शादी में आने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था। उस समय में लोग मिलन सार हुआ करते थे। हर घर से  पूरा  परिवार ही शादी में शामिल हुआ। जिसके कारण बारात बहुत ज्यादा हो गयी। सुकन्या ने इतनी बड़ी बारात देखी तो वह घबरा गयी। कही क़ानूनी दायरे में आने का खामियाजा उन्हें ना उठाना पड़े।जितने लोगो के लिए उन्होंने इंतजाम किये है। वह कम पड  गए  तो कितनी फजीहत होगी उसके बारे में सोच कर वह घबरा गयी।
      उसने मन ही मन भगवान को याद करना शुरू कर दिया। सब कुछ भगवान  के भरोसे छोड़ दिया। में जितना कर सकती थी मेंने सारे प्रयत्न कर लिए है। अब भगवन आपका ही सहारा है। आप ही मेरी बिगड़ी बनाने वाले हो आप के सिवा मुझे किसी और पर भरोसा नही है।
       वेद भी इतने बारातियो को देखकर हतोत्साहित हो गया।   वेद ने धीरे से होतीलाल जी के कानो में इसका जिक्र किया तो वे बोले -मेने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन मै भी इतने लोगो को देखकर हैरान हूँ। मुझे इतने ज्यादा लोगो के आने की उम्मीद नही थी। इसके लिए मै  आपसे माफ़ी मांगता हूँ।
    उनके नम्र व्यवहार से  वेद  पसीज गया और बोला -इसमें आप को माफ़ी मांगने की जरूरत नही है। हमे मिलजुलकर इससे बाहर आना है। इसमें मुझे आपका सहयोग चाहिए। आप केवल हर रूप में मेरा सहयोग कीजिये मै आपका आभारी रहूंगा।
    होतीलालजी बोले -आप बेहिचक परेशानी में मेरे पास आ सकते है। मै हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।
   उनका आश्वासन पाकर वेद कामो में लग गए। इस बार वेद ने क्रॉकरी में खाने का इंतजाम करवाया था। होतीलालजी के कहने पर उन्होंने 15 लोगो के पीतल की  थालियों में खाने का इंतजाम करवा दिए थे। लेकिन सबके लिए क्रॉकरी के इंतजाम होने के कारण पहले की तरह परेशानी का सामना नही करना पड़ा।
     इस विवाह में कोई परेशानी नही उठानी पड़ी सब कुछ सही तरह से निबट गया। सबने राहत की साँस ली। कहावत हे -सहयोग करने से मुश्किलें आसान हो जाती है। असहयोग में इंसान की छोटी सी भूल भी पहाड़ के सामान बड़ी हो जाती है। वेद के लिए पहली शादी और दूसरी शादी के अनुभव में जमीं आसमान का अंतर था। 
    

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