shadi

         सविता छोटे से गाँव  में रहती थी । अभी वह विद्यालय में पड़  रही थी उसमे बालसुलभ चंचलता थी । हर नई चीज को जानने की जिज्ञासा थी । उसके गाँव  में लड़कियों के लिए बहुत पावंदिया थी । उसका मन इन पावंदियो के विरुद्ध विरोध करता था । पुरुषो का वर्चस्व होने के कारण उसको  मन के अनुसार चलने की इजाजत नही थी । उसे घर के अंदर डरी सहमी   जिंदगी जीनी  पसंद नही थी । उसका मन मसोसता रहता था । वह भाई की तरह जीवन क्यों नही जी सकती । उसका साथ देने वाला उस घर में कोई नही था । हर समय उसे सिखाया जाता लड़किया ये नही करती ,लडकिया ऐसे नही करती या लडकिया ये नही कर सकती । वह अपने बड़ो से बहस करना चाहती तो उसे चुप करा दिया जाता । लडकिया ज्यादा नही बोलती । ज्यादा बोलने  बाली  लडकिया बिगड़ी होती है । उसे लगता लड़की बनना एक अपराध है । काश वह लड़की  के रूप में पैदा ही नही हुई  होती । उसका विद्रोही मन ये पावंदिया स्वीकार नही पाता ।
       सविता ने दसवी के पेपर दिये  थे उसके घर में उसकी शादी की बात चलने लगी । उसे अभी पड़ना था । उसने पिताजी के पास जाकर अपने मन की बात रखनी  चाही तो पहले माँ ने कहा -"बाप के सामने बहस करेगी । जो वे सोच रहे है तेरे भले की सोच रहे है । क्या बुड़ी होकर शादी करेगी  । "
      माँ ने सविता की एक नही सुनी । पर सविता हिम्मत वाली लड़की थी । उसने अपनी   शादी की बात को लेकर जिससे भी बात की उसने उसे ही चुप करा दिया । उसने आज तक अपने पिताजी के सामने कभी मुँह नही खोला था । आज उसने खुद अपने पिताजी से बात करने की सोची । उस गाँव  में औरतो  को पुरुषो के सामने बोलने का हक़ नही था । सविता की जिंदगी का मामला था पर उससे पूछा भी नही जा रहा था पंद्रह साल की सविता का मन इसे गवारा नही कर पा  रहा था   ।
      शाम के समय जब पिताजी घर आये । उसने पिताजी से कहा -" मुझे अभी शादी नही करनी है । मुझे आगे पढ़ना है । "उसके पिता हैरानी से उसका मुँह देखते रह गये । इससे पहले उनके सामने कभी कोई इस तरह से नही बोला था । वे समझ ही नही पा रहे थे उनकी बेटी सामने बैठ  कर ये सब कह रही है । जब उन्हें ये बात समझ आई तो वे आपे  से बाहर हो गये । और गुस्से से उसकी माँ को सुना कर बोले -" में पहले ही इसकी पढ़ाई  के खिलाफ था । तेरे कहने पर स्कूल में दाखिला कराया । उसका ही ये परिणाम है ।"
     सविता की माँ ने कहा ="मुझे कहाँ पता था । पढ़ने वाली लडकिया शादी के मामले  मै बड़ो के मुँह लगती है ।"
सविता बोली -" में शादी के खिलाफ नही हूँ । मै सिर्फ आगे पढ़ना  चाहती हूँ ।"
पिताजी बोले -" ज्यादा पड़ लिख जाएगी तब तेरे लिए पड़ा लिखा लड़का कहाँ  से लाएंगे ।"
सविता बोली -" मेंने  सिर्फ दसवी की है । "
पिताजी बोले -"ज्यादा पड़ने के लिए शहर जाना पड़ेगा । गाँव में इसके बाद कोई बड़ा स्कूल नही है ।मेँ  दूर के स्कूल में तुझे भेजूँगा नहीं । जमाना ख़राब है कुछ ऊँच -नीच हो गयी तो मुँह दिखाने लायक ना रहूँगा ।"
सविता ने कहा "-में ऐसा कोई गलत काम नही करूंगी जिससे आपको शर्मिंदा होना पड़े । में आपका सम्मान बढ़ाने का ही काम करूंगी।"
     सविता के पिताजी को उसका बोलना खलने लगा । वे उसकी माँ से बोले -इसे संभाल इसके तेवर अच्छे नहीं है  । ये एक दिन मुझे  मुँह दिखाने लायक ना  छोड़ेगी । "   ये सुनकर सविता की माँ अपना माथा पीटने लगी । उस घडी को कोसने लगी जब वो पैदा हुई  थी । सविता के आंसू और    विरोध करने का किसी  पर कोई असर नहीं हुआ ।
      सविता की शादी उससे 12 साल बड़े इंसान से कर दी गयी । सविता अभी सिर्फ पंद्रह साल की थी । अभी भी भारत में ऐसे बहुत से गाँव हे जहाँ लड़कियों की जायज मांग जैसे पढ़ाई की इच्छा को बगावत मान लिया जाता है ।
      

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