pahadi mandir

        आना सागर में एक कृत्रिम टापू बनाया गया है । नाविक ने हमे वहाँ  उतार  दिया वहाँ  पहले से ही  बहुत लोग सैर  कर रहे थे । उन्हें टापू पर देखकर नया अनुभव हो रहा था ।  टापू बहुत छोटा सा था । उसपर लोग घूम रहे थे । वहाँ लोगो की जरूरत  पूरी करने के लिए छोटी सी केन्टीन बनी हुई  थी । लोग उसमे अपनी जरूरत की चीजे ले रहे थे । वो टापू बहुत छोटा था । उसमे केन्टीन की ज्यादा जरूरत नही थी । लेकिन कहते है -"व्यापारी हर जगह पहुंच जाते है । " केन्टीन यही बात चरितार्थ कर रही थी ।
             अँधेरा छाने लगा हमने वापस लौटने की तैयारी की । लौटने वालो की लम्बी पंक्ति में हम भी अपना नंबर आने का इंतजार करने लगे । जब हम वापस आनासागर आये । दौलतबाग वीरान हो गया था । हमें बहुत हैरानी हुई क्योंकि दिल्ली जैसी जगह पर रहने वाले लोगो को इतनी जल्दी वीराने की आदत नही होती । बाग के  बाहर दुकाने अब भी गुलजार थी । हमने बाहर निकल कर अपनी पसंद की चीजे खाई ।
       शाश्त्री नगर का इलाका मुख्य शहर से थोड़ा हटकर है । वहाँ पर चारो और शांति का साम्राज्य था । जो अद्भुत महसूस हो रहा था । शहरी आवाजे नही सुनाई दे रही थी ऐसा लग रहा था हम प्रकृति की गोद  में खेल रहे है। हर पक्षी की आवाज सुनाई दे रही थी ।
        सुबह हमने वहाँ का प्रसिद्ध मंदिर" मेहँदी खोला" देखने का मन बनाया । यह मंदिर पहाड़ो के बीच  में बना हुआ है । चारो तरफ शांति छाई हुई थी । उस शांति में सिर्फ पक्षियों की आवाज ही सुनाई दे रही थी ।  हमें बहुत सारे  मोर दिखाई दिए प्रकृति के बीच इतने सारे मोर मेने पहली बार देखे थे । उनकी आवाज मन को मोह रही थी । पहाड़ो पर ट्रैकिंग का मजा आ रहा था । चारो और जंगल में छोटा सा मंदिर जिसमे शहरी शोर गुल बिलकुल नही था । हम वहाँ सुबह पुजारी से पहले ही पहुंच गए थे । पुजारी ने हमारे सामने मंदिर के कपट खोले थे ।
      ऊपर  जाते हुए हमें थकन का अनुभव हुआ था । पर लौटते हुए  हमने बातो -बातो में कब  रास्ता तय कर लिया पता नहीं चला । शोरोगुल से दूर प्रकृति की गोद में बीताये ये दिन मुझे  रोमांच से भर रहे है । 

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