sasural

       सविता शादी के बाद ससुराल में आयी  । उसके ससुराल का माहौल  भी मायके जैसा था । वहाँ  भी सब कुछ ठेठ गाँव का माहौल  था । अब सविता का मन घुटने लगा । उसे लगा इस घर में भी उसका जीवन बंधा -बंधा सा होगा वह यहाँ खुल कर साँस नही ले पायेगी । सविता के पति मनोहर की नौकरी सहारनपुर में थी वे सिर्फ छुट्टी के दिन ही घर पर आते थे बाकि दिन सहारनपुर में रहते थे । उन्होंने  कहा - सविता  को अपने साथ शहर ले जाना   चाहता हूँ । उनकी बात पर  तो घर में बबाल  मच गया ।
   सास ने कहा - अभी से अपने साथ रखने की बात करता है । साऱी  जिंदगी तेरे साथ रहेगी कुछ समय इसे बड़ो की सेवा कर लेने दे ।
 मनोहर बोला -वहाँ  मुझे खाने की दिक्क़त  आती है । उलटी सीधी ,कच्ची -पक्की रोटी कब तक खाऊ ।
माँ बोली - अब तक भी तो खा रहा था । बहू  के आते ही वो खाना बेस्वाद हो गया । तेरे में कुछ शर्म -लिहाज है  की नहीं । एक तू ही बहु बाला  हुआ है किसी और की तो अब तक शादी हुई  नही है । जो बड़ो से जुबान लडाता है ।
मनोहर बोला - आप आकर तो देखो वहाँ  कितनी परेशानी का मुझे सामना करना पड़ता है । सुबह जल्दी उठकर सारा घर का काम करता हूँ । उसके बाद तैयार होकर नौकरी पर जाऊ । पूरे  दिन वहाँ काम करू । थका हारा घर आउ तो कोई दो  रोटी पूछने के लिए भी नही होता । फिर पेट भरने के लिए खाने की  जुगाड़ में लगना  पड़ता है ।
     माँ बोली -अब तक भी तो जिंदगी जी रहा था । कुछ दिन बहु को हमारे साथ रहने दे इसे घर के संस्कार और रीति -रिवाज सीखा दू तब इसे अपने साथ ले जाना  ।


 ये सुनकर मनोहर चुप हो गए गाव के माहौल  में शादी के बाद भी पति के पास  पत्नी को अपने साथ रखने का अधिकार नही होता । इसलिए मनोहर ज्यादा देर तक परिवार बालो से बहस नही कर पाये ।
         मनोहर सहारनपुर और सविता गाँव  में सास ससुर की सेवा में दिन -रात  लगी रहती । गाँव में उसकी मदद करने के लिए कोई भी नहीं होता था । कब सुबह शाम में बदल जाती उसे पता ही नही चलता । कोई नौकर -चाकर उसकी मदद के लिए नही था । परिवार का कोई सदस्य उसकी मदद करने नही आता  था । सविता सिर्फ पंद्रह साल की थी अब वह पूरी गृहस्थी अकेले सँभालने लगी थी । उससे यदि कोई काम गलत हो जाता उससे कोई हमदर्दी नहीं दिखाता था । बल्कि उसके काम में कमी निकाल कर सारा घर उसका मजाक बना देता । शाम को दो बात करने के लिए पति का साथ भी नही होता ।
 सविता मन ही मन सोचती रहती -क्या ऐसी ससुराल होती है । इन्हे बहु की नही नौकरानी की जरूरत थी ।
    आज भी गाँव में बहु को  घर के काम- काज सीखाने के नाम पर नौकरानी की जरूरत पूरी की जाती है ।
    

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