एक बार मै और मेरे पति सब्जी मंडी में सब्जी खरीदने गए । हम बाजार में सब्जी खरीद रहे थे । अचानक हमे अजीब लगने लगा पर उस तरफ हमारा ध्यान नही गया । हम सब्जी खरीदते रहे । कुछ देर बाद मेने अपने पति को अपने करीब नही देखा । उन्हें देखने के लिए निगाह घुमायी तो वे सब्जी खरीदते हुए थोड़ी दूर चले गए थे ।
मेरे पति मोहन बाजार में दूर एक दुकान के पास सामान खरीदते हुए दिखाई दिए । मेने उनके पास एक सांड को खड़े देखा । में सांड के बारे में उन्हें बताना चाहती थी । पर वो मेरी तरफ देख ही नहीं रहे थे । सब्जी मंडी में शोर बहुत ज्यादा था । मोहन मेरी आवाज नही सुन रहे थे । में उन्हें सांड के बारे में सचेत नही कर पा रही थी । साड खाने का सामान खाते हुए उनके बिलकुल करीब आ गया था । मोहन सांड के बिलकुल नजदीक आ गये पर उनका ध्यान साड और मेरी तरफ विल्कुल नही था । सांड ने खाना खाने के बाद अपना सर ऊपर किया तो मोहन उसके सींगो के साथ उपर उठ गए । वो हैरानी में समझ ही नही पाए ऐसा कैसे हो गया । वो सकते में आ गए । उनकी हालत खराब हो गयी ।पहले तो उनकी घिग्गी बध गयी । फिर उनके मुंह से आवाज निकली -"बचाओ"। उस मंडी में वो सांड अधिकतर आता था । तब काफी लोगो का ध्यान मोहन की तरफ चला गया । लोग उन्हें शांत रहने का इशारा करने लगे ।पर उनके इशारो का असर मोहन पर नही हो रहा था ।
बहुत मुश्किल से मोहन को उनके इशारो का मतलब समझ आया । वो लोगो को और अपनी हालत समझ गए । इतने भारीभरकम सांड का सामना करने की हालत उनमे नही है । न ही उस भीड़ में कोई इंसान उनकी मदद कर पायेगा । तब उन्होंने अपने आपको भाग्य और सांड के भरोसे छोड़ दिया । क्योंकि अभी तो सांड शांति से जुगाली कर रहा था यदि भड़क गया तो उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान पंहुचा सकता था
मोहन सांड के सिर पर सींगो के बीच बैठ कर उसे जुगाली करते हुए देखते रहे । कुछ समय बाद सांड ने दूबारा खाने के लिए सर नीचे किया तब मोहन उसके सिर से नीचे उत्तर कर एक तरफ भागे । उस सांड को कुछ फर्क ही नही पड़ा । सांड के सर पर एक आदमी काफी देर तक बैठा रहा और कब उसके सर से उत्तर कर चला गया । साड को अहसास ही नही हुआ ।
उन्हें सही सलामत देखकर मेरी साँस में साँस आई । सांड की सवारी करने के बाद पहली बार किसी इंसान को वापस सही हालत में देखने का मौका पहली बार मिला था । साड अपने आकर में मृत्यु का दूत ही दिख रहा था ।
इसके बाद हम सब्जी लेना भूल गए कांपते कदमो से घर की तरफ भागे । उसके बाद कसम खायी । आगे से कभी बड़ी सब्जी मंडी से सब्जी नही लाएंगे । अब भी हम अपनी कसम पर कायम है । आस -पास का सब्जी बाजार ही ठीक है ।
अब उस वाकये को बीते हुए कफी साल बीत गए हे उन पलो को सोच कर हंसी भी आने लगी है ।
मेरे पति मोहन बाजार में दूर एक दुकान के पास सामान खरीदते हुए दिखाई दिए । मेने उनके पास एक सांड को खड़े देखा । में सांड के बारे में उन्हें बताना चाहती थी । पर वो मेरी तरफ देख ही नहीं रहे थे । सब्जी मंडी में शोर बहुत ज्यादा था । मोहन मेरी आवाज नही सुन रहे थे । में उन्हें सांड के बारे में सचेत नही कर पा रही थी । साड खाने का सामान खाते हुए उनके बिलकुल करीब आ गया था । मोहन सांड के बिलकुल नजदीक आ गये पर उनका ध्यान साड और मेरी तरफ विल्कुल नही था । सांड ने खाना खाने के बाद अपना सर ऊपर किया तो मोहन उसके सींगो के साथ उपर उठ गए । वो हैरानी में समझ ही नही पाए ऐसा कैसे हो गया । वो सकते में आ गए । उनकी हालत खराब हो गयी ।पहले तो उनकी घिग्गी बध गयी । फिर उनके मुंह से आवाज निकली -"बचाओ"। उस मंडी में वो सांड अधिकतर आता था । तब काफी लोगो का ध्यान मोहन की तरफ चला गया । लोग उन्हें शांत रहने का इशारा करने लगे ।पर उनके इशारो का असर मोहन पर नही हो रहा था ।
बहुत मुश्किल से मोहन को उनके इशारो का मतलब समझ आया । वो लोगो को और अपनी हालत समझ गए । इतने भारीभरकम सांड का सामना करने की हालत उनमे नही है । न ही उस भीड़ में कोई इंसान उनकी मदद कर पायेगा । तब उन्होंने अपने आपको भाग्य और सांड के भरोसे छोड़ दिया । क्योंकि अभी तो सांड शांति से जुगाली कर रहा था यदि भड़क गया तो उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान पंहुचा सकता था
मोहन सांड के सिर पर सींगो के बीच बैठ कर उसे जुगाली करते हुए देखते रहे । कुछ समय बाद सांड ने दूबारा खाने के लिए सर नीचे किया तब मोहन उसके सिर से नीचे उत्तर कर एक तरफ भागे । उस सांड को कुछ फर्क ही नही पड़ा । सांड के सर पर एक आदमी काफी देर तक बैठा रहा और कब उसके सर से उत्तर कर चला गया । साड को अहसास ही नही हुआ ।
उन्हें सही सलामत देखकर मेरी साँस में साँस आई । सांड की सवारी करने के बाद पहली बार किसी इंसान को वापस सही हालत में देखने का मौका पहली बार मिला था । साड अपने आकर में मृत्यु का दूत ही दिख रहा था ।
इसके बाद हम सब्जी लेना भूल गए कांपते कदमो से घर की तरफ भागे । उसके बाद कसम खायी । आगे से कभी बड़ी सब्जी मंडी से सब्जी नही लाएंगे । अब भी हम अपनी कसम पर कायम है । आस -पास का सब्जी बाजार ही ठीक है ।
अब उस वाकये को बीते हुए कफी साल बीत गए हे उन पलो को सोच कर हंसी भी आने लगी है ।
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