सविता अब बहुत खुश थी क्योंकि मनोहर ने उसका ११वी क्लास में प्रवेश दिलवा दिया था । उसे लगने लगा जैसे उसे चाँद मिल गया है । उसके कई बर्षो की कामना पूरी हुई थी उसे इस बात की परेशानी नही थी की वह शगुन और पति के साथ सारे परिवार की जिम्मेदारी उठाते हुए पढ़ाई कैसे करेगी । उसे लगने लगा पढ़ना उसके लिए कोई मुश्किल काम नही है ।
अब मनोहर ने उसे किताबे ला दी थी । सविता घर का सारा काम ख़त्म करने के बाद जैसे ही पढ़ने बैठती तभी शगुन के उठने का समय हो जाता । उसे भी मम्मी की किताबे चाहिए होती सविता उसे कितने ही उसके पसंद के खिलौने उसके सामने रखती वह घूम फिर के माँ की किताबो के पास आ जाती । किताबो के सामने उसे कोई खिलौना अच्छा नही लगता ।
तब सविता हँसते हुए शगुन से कहती - "जब तेरा पढ़ने का समय आये तब पढ़ना अभी मुझे पढ़ने दे ।"
शगुन अभी केबल २ साल की थी उसे किताबे भी खिलौने लगती या खाने की कोई चीज जिसे उसे मुँह में डालना था । उसके लिए माँ के शब्दों का कोई मतलब नही था । वह अपनी सोच के अनुसार किताबो को खोलने की कोशिश करती तो उसका पन्ना फट जाता । शगुन एकदम समझ जाती उससे कुछ गलत हुआ है वह माँ के मुख की तरफ देखने लगती । थोड़े से अपने छोटे -छोटे दांत दिखला देती या मुस्कुरा देती । गुस्सा होते हुए भी शगुन की हरकत पर सविता मुस्कुरा देती ।
सविता की पढ़ने की इच्छा जबरदस्त थी । सविता थकने पर भी एक बाँह पर शगुन का सिरहाना बना कर कर उसे सुला रही होती दूसरे हाथ में उसकी पढने की किताब होती । वह कभी भी शगुन पर गुस्सा नही होती उसका और घर का काम ख़त्म होने पर जब तक थक कर निढाल न हो जाये पढती रहती । ऐसे ही रात के समय वह घर का सारा काम ख़त्म करके किताबे ले कर बैठ जाती । उसे कोई नही कहता था पढ़ने के लिए उसके लिए थकान का कोई मतलब नही था । वह चुपचाप पढती रहती ।
मनोहर की जब रात को आँख खुलती वह सविता को पढ़ते देखता उसे बड़ी हैरानी होती वह उससे कहता - तुम्हे पता हे कितना समय हुआ है ।
सविता एकदम चौंक कर घडी को देखती और हंसती हुई कहती - अरे । इतना समय हो गया । पता ही नही चला । अभी थोड़ी देर में सो जाती हूँ । थोड़ा सा रह गया हे इसे ख़त्म कर लूँ ।
थका हारा मनोहर उसका जबाब सुनकर सो जाता । कुछ समय बाद जब फिर से मनोहर की आँख खुलती । वह सविता से कहता - तुमने सोने के लिए कहा था मालूम है । आधी रात बीत चुकी है । कब सोएगी ।
सविता जबाब देती - अभी पांच मिनट में सो जाती हूँ ।
मनोहर कहता - सुबह जल्दी उठ कर काम भी करना है । सुबह कैसे उठोगी जब सोयेगी ही नही ।
सविता कहती - उसकी आप चिंता मत करो में आपका सारा काम कर दूंगी ऐसा कभी नही होगा । कि आपको काम से छूट्टी करनी पड़े ।
सविता अपने शव्दो की पक्की थी उसके कारण मनोहर का कोई काम देर से नही होता था सविता रात को कितनी भी देर से सोये वह सुबह जल्दी उठकर सारे काम निबटा देती थी । उसकी पढ़ाई के कारण उसके घर के कामो में कभी भी कोई व्यवधान नही आया ।
अब मनोहर ने उसे किताबे ला दी थी । सविता घर का सारा काम ख़त्म करने के बाद जैसे ही पढ़ने बैठती तभी शगुन के उठने का समय हो जाता । उसे भी मम्मी की किताबे चाहिए होती सविता उसे कितने ही उसके पसंद के खिलौने उसके सामने रखती वह घूम फिर के माँ की किताबो के पास आ जाती । किताबो के सामने उसे कोई खिलौना अच्छा नही लगता ।
तब सविता हँसते हुए शगुन से कहती - "जब तेरा पढ़ने का समय आये तब पढ़ना अभी मुझे पढ़ने दे ।"
शगुन अभी केबल २ साल की थी उसे किताबे भी खिलौने लगती या खाने की कोई चीज जिसे उसे मुँह में डालना था । उसके लिए माँ के शब्दों का कोई मतलब नही था । वह अपनी सोच के अनुसार किताबो को खोलने की कोशिश करती तो उसका पन्ना फट जाता । शगुन एकदम समझ जाती उससे कुछ गलत हुआ है वह माँ के मुख की तरफ देखने लगती । थोड़े से अपने छोटे -छोटे दांत दिखला देती या मुस्कुरा देती । गुस्सा होते हुए भी शगुन की हरकत पर सविता मुस्कुरा देती ।
सविता की पढ़ने की इच्छा जबरदस्त थी । सविता थकने पर भी एक बाँह पर शगुन का सिरहाना बना कर कर उसे सुला रही होती दूसरे हाथ में उसकी पढने की किताब होती । वह कभी भी शगुन पर गुस्सा नही होती उसका और घर का काम ख़त्म होने पर जब तक थक कर निढाल न हो जाये पढती रहती । ऐसे ही रात के समय वह घर का सारा काम ख़त्म करके किताबे ले कर बैठ जाती । उसे कोई नही कहता था पढ़ने के लिए उसके लिए थकान का कोई मतलब नही था । वह चुपचाप पढती रहती ।
मनोहर की जब रात को आँख खुलती वह सविता को पढ़ते देखता उसे बड़ी हैरानी होती वह उससे कहता - तुम्हे पता हे कितना समय हुआ है ।
सविता एकदम चौंक कर घडी को देखती और हंसती हुई कहती - अरे । इतना समय हो गया । पता ही नही चला । अभी थोड़ी देर में सो जाती हूँ । थोड़ा सा रह गया हे इसे ख़त्म कर लूँ ।
थका हारा मनोहर उसका जबाब सुनकर सो जाता । कुछ समय बाद जब फिर से मनोहर की आँख खुलती । वह सविता से कहता - तुमने सोने के लिए कहा था मालूम है । आधी रात बीत चुकी है । कब सोएगी ।
सविता जबाब देती - अभी पांच मिनट में सो जाती हूँ ।
मनोहर कहता - सुबह जल्दी उठ कर काम भी करना है । सुबह कैसे उठोगी जब सोयेगी ही नही ।
सविता कहती - उसकी आप चिंता मत करो में आपका सारा काम कर दूंगी ऐसा कभी नही होगा । कि आपको काम से छूट्टी करनी पड़े ।
सविता अपने शव्दो की पक्की थी उसके कारण मनोहर का कोई काम देर से नही होता था सविता रात को कितनी भी देर से सोये वह सुबह जल्दी उठकर सारे काम निबटा देती थी । उसकी पढ़ाई के कारण उसके घर के कामो में कभी भी कोई व्यवधान नही आया ।