#DEBT TRAP

                  कर्ज का मकड़जाल 

  सरकार के द्वारा दी जाने वाली रियायतों  के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री  राजीव गाँधी ने कहा था "-यदि सरकार जनता के लिए एक रूपये भेजती है तो उन एक केवल पंद्रह पैसे ही पहुंच पाते है।" ये सच्चाई आज भी सही साबित हो रही है।
         मोदी सरकार जनता की भलाई के लिए कई तरह के लोन देने के लिए तैयार है। ऊपर से आदेश भी है। लेकिन जब ये आदेश यथार्थ के धरातल पर उतरते है। तब इनकी सच्चाई सामने आती है।
      ऐसा ही एक वाकया मेरे जानने वाले ने मुझे बताया।  एक दिन उसके पास फोन आया।
     जिसमे कहा गया "हम तुम्हे छह करोड़ का लोन  दे सकते है। " वह इंसान बहुत खुश हुआ।
       उसने कहा" मुझे इसके लिए क्या करना पड़ेगा।
    उसे बताया गया "-हम तुम्हारे नाम से छ करोड़ सेंक्शन करेंगे लेकिन तुम्हे मिलेंगे 2  करोड़। "
उसे बहुत हैरानी हुई -"उसने कहा में 2 करोड़ लेकर 6 करोड़ का कर्ज कैसे उतारूंगा।"
     तब उसे जबाब मिला उसकी आप चिंता मत कीजिये उसका भी हम इंतजाम कर देंगे।  उसने गहराई से जाकर पूछने की कोशिश की.
    तब उन्होंने बताया "-जब कर्ज चुकाने का समय आएगा तब हम तुम्हारे नाम से एक और लोन सेंक्शन कर देंगे।"
     इसका मतलब ये लोन का बंधन ऐसा बंधेगा जिससे निकलना कभी सम्भव नहीं होगा। उन्होंने लोन लेने से इंकार कर दिया। क्योंकि मिलने वाले लोन के बदले में ब्याज के साथ आप सोचो उसे कितने % पैसा चुकाना पड़ेगा। ये सब बैंक वाले और ऊपर पद पर बैठे हुए लोगो की सांठ -गांठ  से चलता है।
       इस समय सारे कर्जदार देश छोड़ कर भाग रहे है या अपने संसाधन बेच कर चुका रहे है।इसमें नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग कह भी रहे है। हमारे ऊपर जितना लोन बताया जा रहा है उसका केवल 25 % मिला है।  जितना लोन मिलते वक्त वे खुश थे लेकिन सरकार के बदलने पर उनके होश फाख्ता हो रहे है। उस समय कर्जदारों ने इस वक्त की कल्पना नहीं की थी। इसे ही कहते है दूर के ढोल सुहावने होते है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...