सरकार टैक्स के नियमो में बदलाव कर रही है !जिससे आम जनता को राहत मिले। लेकिन जनता उतनी ही ज्यादा परेशान होती जा रही है!इसके कई कारण है।
पुराने टैक्स के तरीके को आसान बनाने के लिए GST लाया गया ।हम बहुत खुश हुए। लेकिन मुझे अभी तक कोई फायदा नजर नहीं आया।
इसे भरने में यदि गलती हो जाती है तब दुगनी पेनल्टी लगती है । अभी इस काम की शुरुआत है। गलती होना लाजमी है. बड़ी पेनल्टी से बचने के लिए मद्यस्थ को ढूंढा जाता है। मान लो गलती होने पर एक लाख की पेनल्टी लगती है यदि मध्यस्थ उसे 20 हजार लेकर ठीक करवा दे तो कोन तैयार नहीं होगा! सरकार की सख्ती के कारण मधयस्थ की कीमत बढ़ गई है! इससे सरकार को कोई फायदा नहीं हो रहा बल्कि अधिकतर पैसे मध्यस्थ की जेब में जा रहे है।
इसके कारण जहाँ एक CA से काम चल जाता था वहां लोग सलाह लेने के लिए चार CA रखने लगे है। लोगो को एक की जगह चार CA की पगार देनी पड़ रही है। सारे CA इसे भरने में बहुत परेशान हो रहे है। सरकार की सख्ती के कारण सभी की नींद उडी हुई है।
हर महीने और तीन महीने टैक्स भरने के कारण अधिकतर लोगो को पूरे साल CA की दरकार रहती है।
सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर टैक्स काट लिया जाता है। लेकिन उसे अपने वेतन पर टैक्स देने के बाबजूद जो चीज खरीदता है उस पर भी टैक्स देना पड़ता है। सुनने में 5 %,१०% टैक्स अच्छा लगता है। दूसरी तरफ हमें 30 % वेतन और हर जरूरी चीज पर टैक्स देने के बाद अपने वेतन का कितने %प्राप्त होता है। सोचो तो लगता है हम घर चलाने के लिए कम बल्कि सरकार चलाने के लिए कमा रहे है। हमें मेहनताने के रूप में वेतन का ३०% ही प्राप्त होता है।
सरकार ने वस्तु के उत्पादन पर केवल टैक्स लगाने के लिए कहा था। लेकिन आज हर उत्पादक को टैक्स देना पड़ता है। सरकार ने आरम्भ में सभी कारोबारियों को कहा था -"तुम अभी टैक्स दे दो बाद में तुम्हे उसका भुगतान कर दिया जायेगा।" लेकिन उन व्यापारियों को कई साल होने के बाद भी पिछला भुगतान नहीं किया गया। .
ऐसे व्यापारी किसकी शरण में जाकर फरियाद करे। सरकार के पास व्यापारियों को देने के लिए पैसा नहीं है। तो व्यापारी कहाँ से आगे का भुगतान करे।
करोना के कारण सब बंद पड़ा है मजदूरों का वेतन ,सामानो की खरीद ,फॅक्टरी का बकाया। हर बना सामान जो खरीदार के इंतजार में पडा है। उनके बिकने की उम्मीद बिलकुल खत्म हो चुकी है।क्योंकि भारतीय मंडी और विदेशी बाजार इस समय बिलकुल खत्म हो चुका है। इन सब का भुगतान देने में कौन मदद के लिए सामने आएगा।
सभी को मालिक बहुत अमीर लगते है लेकिन जिसके पास जितने पैसे होते है। उनके पास उसी हिसाब से खर्चे होते है उन खर्चो को पूरा करने के ख्याल से मालिकों की नीद उडी हुई है। मजदूर वर्ग को तंगी में गुजारा करने की आदत होती है। लेकिन ऐसे व्यापारी कही अपने को दिवालिया घोषित करना शुरू न कर दे। या उनके ख़ुदकुशी करने की नौबत न आ जाये।
सरकार को इस समय व्यापारियों को राहत देने के कदम उठाने की कोशिश करनी चाहिए। व्यापारी वर्ग इस समय कराह रहा है।रोजगार बंद होने शुरू हो जायेंगे तब मजदूरों को कौन रोजगार देगा। सरकार के पास इतनी नौकरियाँ नहीं है। उसकी फरियाद यदि नहीं सुनी गई तो भारत आर्थिक रूप से पिछड़ जायेगा।
भारत में किसान तो ख़ुदकुशी कर रहा है उन्हें राहत पैकेज दिए जा रहे है। व्यापारियों पर भी कुछ तरस खाओ उनहे ख़ुदकुशी के आलम से बचाओ।
भारत के बारे में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के सपने देखना मुंगेरीलाल के सपने ही न बन जाये। टैक्स को लेकर इतनी सख्ती बिचोलियो का फायदा कर रही है। पूर्ब प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शब्द मुझे याद आ रहे है -" उनके अनुसार हम जनता के लिए यदि एक रुपया देते है तो उन तक केवल 15 पैसे पहुंच पा रहे है। "वैसे ही जनता से यदि टैक्स के एक रुपया वसूल किया जा रहा है। वह सरकार तक केवल 15 पैसे पहुंच रहा है।
हमे व्यापारियों को चोर समझने की जगह रोजगार देने वाला और देश की उन्नति में सहायक समझना चाहिए। सरकार ने अपने और व्यापारियों के बीच जितने मध्यस्थ रख लिए है। उन्हें कम करने चाहिए। उनके ऊपर सख्ती करने की जगह उन्हें तरक्की करने के एवज में इनाम देना चाहिए। जिससे उत्साहित होकर लोग प्रगति के रस्ते पर आगे बड़े। सरकार अकेले अपने दम पर तरक्की नहीं कर सकती है। उसे जनता का साथ चाहिए। जब जनता के हौंसले पस्त होंगे तब सरकार का हौंसला कौन बढ़ाएगा।
इसे भरने में यदि गलती हो जाती है तब दुगनी पेनल्टी लगती है । अभी इस काम की शुरुआत है। गलती होना लाजमी है. बड़ी पेनल्टी से बचने के लिए मद्यस्थ को ढूंढा जाता है। मान लो गलती होने पर एक लाख की पेनल्टी लगती है यदि मध्यस्थ उसे 20 हजार लेकर ठीक करवा दे तो कोन तैयार नहीं होगा! सरकार की सख्ती के कारण मधयस्थ की कीमत बढ़ गई है! इससे सरकार को कोई फायदा नहीं हो रहा बल्कि अधिकतर पैसे मध्यस्थ की जेब में जा रहे है।
इसके कारण जहाँ एक CA से काम चल जाता था वहां लोग सलाह लेने के लिए चार CA रखने लगे है। लोगो को एक की जगह चार CA की पगार देनी पड़ रही है। सारे CA इसे भरने में बहुत परेशान हो रहे है। सरकार की सख्ती के कारण सभी की नींद उडी हुई है।
हर महीने और तीन महीने टैक्स भरने के कारण अधिकतर लोगो को पूरे साल CA की दरकार रहती है।
सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर टैक्स काट लिया जाता है। लेकिन उसे अपने वेतन पर टैक्स देने के बाबजूद जो चीज खरीदता है उस पर भी टैक्स देना पड़ता है। सुनने में 5 %,१०% टैक्स अच्छा लगता है। दूसरी तरफ हमें 30 % वेतन और हर जरूरी चीज पर टैक्स देने के बाद अपने वेतन का कितने %प्राप्त होता है। सोचो तो लगता है हम घर चलाने के लिए कम बल्कि सरकार चलाने के लिए कमा रहे है। हमें मेहनताने के रूप में वेतन का ३०% ही प्राप्त होता है।
सरकार ने वस्तु के उत्पादन पर केवल टैक्स लगाने के लिए कहा था। लेकिन आज हर उत्पादक को टैक्स देना पड़ता है। सरकार ने आरम्भ में सभी कारोबारियों को कहा था -"तुम अभी टैक्स दे दो बाद में तुम्हे उसका भुगतान कर दिया जायेगा।" लेकिन उन व्यापारियों को कई साल होने के बाद भी पिछला भुगतान नहीं किया गया। .
ऐसे व्यापारी किसकी शरण में जाकर फरियाद करे। सरकार के पास व्यापारियों को देने के लिए पैसा नहीं है। तो व्यापारी कहाँ से आगे का भुगतान करे।
करोना के कारण सब बंद पड़ा है मजदूरों का वेतन ,सामानो की खरीद ,फॅक्टरी का बकाया। हर बना सामान जो खरीदार के इंतजार में पडा है। उनके बिकने की उम्मीद बिलकुल खत्म हो चुकी है।क्योंकि भारतीय मंडी और विदेशी बाजार इस समय बिलकुल खत्म हो चुका है। इन सब का भुगतान देने में कौन मदद के लिए सामने आएगा।
सभी को मालिक बहुत अमीर लगते है लेकिन जिसके पास जितने पैसे होते है। उनके पास उसी हिसाब से खर्चे होते है उन खर्चो को पूरा करने के ख्याल से मालिकों की नीद उडी हुई है। मजदूर वर्ग को तंगी में गुजारा करने की आदत होती है। लेकिन ऐसे व्यापारी कही अपने को दिवालिया घोषित करना शुरू न कर दे। या उनके ख़ुदकुशी करने की नौबत न आ जाये।
सरकार को इस समय व्यापारियों को राहत देने के कदम उठाने की कोशिश करनी चाहिए। व्यापारी वर्ग इस समय कराह रहा है।रोजगार बंद होने शुरू हो जायेंगे तब मजदूरों को कौन रोजगार देगा। सरकार के पास इतनी नौकरियाँ नहीं है। उसकी फरियाद यदि नहीं सुनी गई तो भारत आर्थिक रूप से पिछड़ जायेगा।
भारत में किसान तो ख़ुदकुशी कर रहा है उन्हें राहत पैकेज दिए जा रहे है। व्यापारियों पर भी कुछ तरस खाओ उनहे ख़ुदकुशी के आलम से बचाओ।
भारत के बारे में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के सपने देखना मुंगेरीलाल के सपने ही न बन जाये। टैक्स को लेकर इतनी सख्ती बिचोलियो का फायदा कर रही है। पूर्ब प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शब्द मुझे याद आ रहे है -" उनके अनुसार हम जनता के लिए यदि एक रुपया देते है तो उन तक केवल 15 पैसे पहुंच पा रहे है। "वैसे ही जनता से यदि टैक्स के एक रुपया वसूल किया जा रहा है। वह सरकार तक केवल 15 पैसे पहुंच रहा है।
हमे व्यापारियों को चोर समझने की जगह रोजगार देने वाला और देश की उन्नति में सहायक समझना चाहिए। सरकार ने अपने और व्यापारियों के बीच जितने मध्यस्थ रख लिए है। उन्हें कम करने चाहिए। उनके ऊपर सख्ती करने की जगह उन्हें तरक्की करने के एवज में इनाम देना चाहिए। जिससे उत्साहित होकर लोग प्रगति के रस्ते पर आगे बड़े। सरकार अकेले अपने दम पर तरक्की नहीं कर सकती है। उसे जनता का साथ चाहिए। जब जनता के हौंसले पस्त होंगे तब सरकार का हौंसला कौन बढ़ाएगा।
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