#shoppers pain

        दुकानदारों का दर्द 

    में एक दिन अमर कॉलोनी जैसे इलाके में  गई। मेरे घूमने और देखने के तरीके  से उन्हें शंका होने लगी। उनकी कुछ समय पहले दुकानें सील हुई थी। वे एक-  एक कर मेरे पीछे इकट्ठे होते चले गए। मै सील बंद इलाका केवल देखने के उद्देश्य से गई थी। उनकी हरकतों से मेरे अंदर डर पैदा होने लगा। क्योंकि हम दो  लोग थे । मेरे पीछे लगभग 50 लोगो की भीड़ चलने लगी थी। 
      मेने रूककर उनके पीछे आने का कारण पूछा। तो उन्होंने कहा -"आप किस सिलसीले में यहां आये हो। क्या सरकारी कर्मचारी हो। "
 मेरे मुँह से तत्काल निकल गया -"आपको इस बात का शक क्यों हो रहा है। "
  उन्होंने कहा -" आप अनेक जगह रुककर फोटो खींच रहे हो। क्या और भी दुकाने बंद होनी है। "
   मेने अपनी जान बचाने के उद्देश्य से कहा - " मै  सरकारी नहीं प्रायवेट कम्पनी से हूँ। केवल देखने आयी हूँ आपके साथ कोई ज्यादती तो नहीं हुई है। "
     बहुत से वृद्ध जन के आँखों में आंसू निकल आये वे फफक -फफक कर रोने लगे। मेरे कदमो में गिर गए। उनकी हालत दयनीय थी।  
      उन्होंने कहा "-हम कल तक  रोजगार देने वाले थे। लेकिन आज हमारी हालत इतनी खराब हो गई है। घर में भोजन का इंतजाम भी करने में असमर्थ है। "
       जितने भी फैक्टरी और दुकान मालिक है। उन सब का ऐसा हाल हो गया है। मेरी आँखों से आंसू निकल आये' मुझे समझ नहीं आ रहा था कैसे सांत्वना दूँ। 
      उन्हें देखकर लग रहा था। सरकार की सख्त नीति के कारण एक रौबदार इंसान किस तरह फकीर की भूमिका में आ जाता है। मै  सरकार से दरियाफ्त करती हूँ। रसूखदार लोगो को फिर से इज्जतदार जिंदगी जीने का मौका दो।  सरकार जनता के दम  से जीतती है। उनके आंसू सत्ता को भी हिला देते है। हर तरफ त्राहिमाम का आलम है। 

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