#tax

      टैक्स के कारण प्रत्येक इंसान परेशान है। सरकारी कर्मचारी को पता नहीं होता उसकी आमदनी कितनी है। उसके कितने रूपये कहाँ जमा होते है। साल के आखिर में जब इनकम टैक्स कटने का समय आता है.टैक्स कितना जमा करवाना है।पूरे साल की कुल आमदनी को जमा किया जाता है.
       पहले हमें सेलरी स्लिप नहीं मिलती थी। इसलिए हमे केवल आखिर में ही कुल आमदनी पता चलती थी। वरना बैंक के द्वारा ही पता चलता था। अभी हमें इसी साल से सेलरी स्लिप मिलने लगी है।
  तब पता चलता है.सरकारी कर्मचारी को केवल चिकित्सा भत्ता ,और परिवहन भत्ते पर ही रियायत मिलती है।
         हमारे वेतन  में से दो महीने की आमदनी   कट जाएगी। हम साल में 12  महीने काम करने के एवज में 10 महीने का वेतन पाते  है। लगभग वेतन का 30 %  कटता है।
      इसी समय पर बच्चो के विद्यालय के खर्चे शुरू हो जाते है। बहुत सारे विद्यालयों में वार्षिक शुल्क के रूप में बहुत सारे रूपये ले लिए जाते है। उनकी कॉपी ,किताबो और अन्य वस्तुए खरीदने के लिए पैसे चाहिए।
       अपना आयकर कम  से कम जमा करवा पड़े उसके लिए  काफी सारी जगह पैसे जमा करवाने पड़ते है। इस तरह जमा करवाने वाले पैसे लगभग 5 साल के लिए जमा करवाने पड़ते है।
     हम अपने वेतन  पर टैक्स देने के अलावा हर जरूरी चीज पर टैक्स देते है। जैसे नहाने का सामान ,कपड़े। बिजली का सामान, फर्नीचर ,रेस्टोरेंट ,होटल आदि जितनी भी चीजे इस्तेमाल की जाती है. उन सभी पर टैक्स देना पड़ता है।
       इस तरह टैक्स देने के कारण सरकारी कर्मचारी हमेशा जमा करने के जुगाड़ में लगा रहता है।हमारी आमदनी में से कुल 30 % प्राप्त होता है। बाकि 7०%  हम टैक्स में देते है ये कहाँ का इंसाफ है। 

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