मेरे मार्गदर्शक गुरुजन
हर काम आसान हो जाता है।
जब दिलो का तार जुड़ जाता है।
फिर कितना भी हो मनमुटाव
प्यार से भरी जिंदगी में होता है ठहराव।
आते है कई मोड़ ऐसे
जब मन विचलित होता है।
जब उन कठिनाइयों मै
बस साथ अपनों का होता है।
हृदय की बात कह दी आपने,
हमारे गुरुजनो का आशीर्वाद
हम सभी को प्राप्त होता रहे।
फिर तो दुनिया की ऐसी
कोई जंग नहीं जो
जिसे हम न जीत सके।
ऐसी दुश्वारियां नहीं
जिनसे हम निकल न सके।
और फिर हमारे गुरुजनो की
बात ही अलग है।
उनकी शिक्षा और मार्गदर्शन का
कोई मूल्य ही नहीं।
हमारे गुरुजन ऐसे है।
जो न गिनकर सिखाते है।
न तोलकर सिखाते है।
हमारे गुरुजन जब भी सिखाते हैं।
दिल खोलकर सिखाते हैं।
मानते है इन्हे गुरु अपना
दिखाया जिसने जीवन का सपना।
पग -पग पर दिया दिशा निर्देश
जिससे सजा जीवन परिवेश।
कवयित्री- श्रुति पाठक
2- आधुनिक लड़कियां
हैं यहाँ सुशील कन्यायें
मीठी कड़क चाय जैसी।
काम में तेज ,कुछ बातो में ,
कभी सीधी ,कभी करारी।
हैं इनका एक अलग स्थान।
दुनियां के मंदिर में अमिट योगदान।
कवयित्री- श्रुति पाठक
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें