करोना के कारण बदला जीवन
मैने अपने जीवन में ऐसा वक्त इससे पहले नहीं देखा था। जब हमारे पास समय है। लेकिन उसका सदुपयोग करने के लिए काम नहीं है। महामारी के कारण सब घरो में बंद हो गए है।किसी से मिलना भी चाहे तो लगता है उसके साथ विषाणु हमारे घर में न आ जाये। किसी के घर में आने से भी डर लगता है। किसी के घर मन बहलाने के लिए जाने से भी डर लगता है।
शुरू में घर में रहना बहुत दुखदायी लग रहा था। लेकिन अब धीरे -धीरे आदत पड़ने लगी है। क्योंकि हमारी पीढ़ी जब तक कुछ घंटे घर से बाहर न निकले तो दिल घबराने लगता था। हमे हमेशा पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में बाहर रहने की आदत रही है।
मुझे अब पुराना वक्त याद आ रहा है। जब कुछ लोग किसी के घर जाने और खाना खाने से बचने के बहाने ढूंढा करते थे। तब उन्हें हम बहमी समझते थे। कुछ इसके लिए टोने -टोटके का नाम लिया करते थे। हमे वे दकियानूसी लगते थे.
हमारी पीढ़ी दावत के आमंत्रण को सम्मान समझा करती थी लेकिन दावत में जाने से पहले अब लोग सोचा करेंगे। जाये या न जाये। लेकिन कोरोना ने हमे इसका कारण समझा दिया है। सौ सालो में क्वारंटीन का मतलव भूलने के कारण हमारी सोच बदल गयी थी।
अब लोकडावन खुलने के बाद भी हमारी जिंदगी सहज नहीं हो सकेगी। हमे हमेशा के लिए हाथ धोने की आदत पड़ जाएगी। कही अन्य स्थान का खाना खाने से पहले दस बार सोचेंगे। अनावश्यक वस्तुए घर के अंदर लाने से बचेंगे। सामाजिक सम्बन्ध में प्रगाढ़ता लाने से पहले सोचेंगे। इस महीने में हमारे जीने का तरीका पूरी तरह से बदल चूका होगा।
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