#mandiro me orto ka pravesh nishedh

       
 हमारे धार्मिक स्थल आज भी बहुत सारे  है जहाँ औरतो का आना निषेध है। जबकि पुरुष अकेले प्रवेश कर सकते है।  जिस देश में औरतो को देवी माना जाता है उन्हें अर्धांगिनी का दर्जा दिया जाता है। ऐसे देश में औरते मंदिरो में प्रवेश नही कर सकती जबकि सारे समुदायों के लिए सभी राजनेता एकजुट होकर उन्हें प्रवेश दिलाने में लगे है औरतो की तरफ आज भी नेताओ का ध्यान नही जा रहा। 
        दक्षिण का सबरीमाला मंदिर, हाजी अली की दरगाह और शिंगणापुर का शनि मंदिर इसी श्रेणी में आता है। शिंगणापुर ऐसा इलाका है जहॉ घरो में आज भी लोग ताले नही लगाते। किसी दुकान यहाँ तक बैंक में भी ताले लगाने की आदत नही है। आपको सुनकर हैरानी हुई।
       बड़े शहरो में आप कुछ समय के लिए बाहर जाने पर बिना ताला लगाये जाने की कल्पना नही कर सकते। वहाँ शिंगणापुर में ताले बाजार में मिलते ही नही है। लोगो के अंदर शनि भगवान के प्रति अटूट आस्था के कारण ऐसा सम्भव हो पा रहा है। 
      शनि देव के प्रति अटूट विश्वाश के कारण तृप्ति  देसाई ने सैंकड़ो ओरतो के साथ 26 जनवरी 2016  को इस मंदिर में प्रवेश की कोशिश की लेकिन पुलिस वालो ने उन्हें मंदिर में घुसने नही दिया। सेंकडो औरतो  का समूह बल भी मंदिर में प्रवेश नही कर सका। आप इस प्रथा को क्या नाम देंगे। हमारी आधी  आबादी  औरते  की होने के बाबजूद ,भारत को आजाद हुए 70 साल 
 हो चुके है। आज भी नारी को सभी मंदिरो में प्रवेश का हक कब तक मिल सकेगा। 
      ये औरते मंदिर में प्रवेश के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी मिल चुकी है। उन्होंने इसका संतोषजनक जबाब नही दिया है। 
       अभी तक सेंकडो की तदाद अपना हक़ नही ले सकी है। इस संख्या को ओर अधिक बन कर अपने अधिकारों की लड़ाई तेज करनी पड़ेगी। तभी इन मंदिरो में प्रवेश का अधिकार मिल सकेगा। 

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