पठानकोट की आतंकवादी घटना
अब से 500 साल पहले ये लोग हिन्दू से मुस्लिम बने थे कितनी विपरीत परिस्थिति में इनके पूर्वजो ने धर्म बदला होगा । उन्हें इसका एहसास नही है। वे कटटर मुस्लिम बन गए है। बादशाह ओरंगजेब ने जिस उद्देश्य से भारत में मुस्लिम कौम खड़ी की थी। आज उसका उद्देश्य पूरा हो गया है। यदि ओरंगजेब आज इस कत्लेआम को देखता तो खुश हो जाता।
भारत पर जब आतंकवादी घटना होती थी। उसका एहसास पश्चिम देशो को नही होता था। लेकिन जब से वहाँ आतंकवादी घटना होने लगी है। तब जाकर वे हमारे दर्द को समझ सके है। आज अमेरिका ने नवाज शरीफ को इस घटना के लिए सख्त कदम उठाने की ताकीद की है। अमेरिका के आदेश के कारण नवाज शरीफ इस मामले में कोशिश करते दिखाई दे रहे है। यदि पश्चिमी देश पहले सख्ती बरतते तो जिस आतंक से भारत सिसक रहा है। उसकी आंच पश्चिमी देशो तक ना पहुचती वह पहले ही बुझ चुकी होती।
आपने कहाबत सुनी होगी -जाके पैर न फटी बिबाई वो क्या जाने पीर पराई।
हम बर्षो से आतकवाद से आहत है। इस घटना के बाद मुंबई आतंकवाद का मुख्य अभियुक्त डेविड उस समय में दोषी लोगो के बारे में बताने के लिए अमरीकन जेल से तैयार हुआ है। इस घटना को 7 साल बीत गए है।
इसे कहते है -देर आये दुरुस्त आये।
हमारे नेताओ की डरने की आदत भी इसके लिए जिम्मेदार है। यदि हम भी सख्ती से इसके खिलाफ खड़े होते तो दूसरे देश भी हमारी पीड़ा को समझते। हमारे सेनिको की म्यांमार की कार्यवाही,मोदी के ईट का जबाब पत्थर से देने की नीति ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया है।
हमें सामने वाले के सामने हमेशा रोने गिड़गिड़ाने की नीति नही अपनानी चाहिए बल्कि अपनी ताकत का स्वाद भी चखाते रहना चाहिए। वर्ना हमारी हालत भिखारी जैसी होगी।
कई बार दूसरे देशो में जाकर जब हमारे नेता अपनी फरियाद सुनाते थे तो उनके नेता सदा हमारा मजाक उड़ाते हुए कहते थे -जो परेशानी आपके देश की है। उसके विरुद्ध आप खुद कोई कार्यवाही करने के स्थान पर हमसे मदद की उम्मीद क्यों करते हो। सभी आपके देश की लाचारी समझते है। कि आप गिड़गिड़ाने के आलावा कोई सख्त कार्यवाही नही कर सकते इसलिए कोई देश आपके लिए नही सोचता। हम अपने देश के बारे में सोचे या आपके लाचार देश के लिए कोई काम करे। जब तक आप खुद उठ खड़े नही होंगे तब तक किसी से उम्मीद मत रखो।
आज हमें एक होकर आतंकवाद से लड़ना चाहिए। तभी इससे मुक्ति मिल सकेगी।

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