भारतीय सरकार की किसानो के लिए बीमा योजना
भारत में सभी का पेट भरने वाले किसान आज अपना पेट भरने के भी काबिल नही रहे है। उनका आत्महत्या करने का आंकड़ा दिनोदिन बढ़ता जा रहा है। एक किसान की मौत सिर्फ एक इंसान की मौत नही होती बल्कि पूरे परिवार के खात्मे की शुरुरात हो जाती है। जो इंसान मौत की चादर ओढ़ने के लिए विवश हो रहा होता है। वह अपने अंतिम समय में रौशनी की नन्ही सी किरण तलाश रहा होता है। जीवन से निराश ब्यक्ति भी मरना नही चाहता। उसके चारो और घना अंधकार होता है। उससे मुक्ति के लिए ही वह मौत का वरन करता है।
वह जानता है उसकी मौत के बाद उसका परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच जायेगा। उसकी कर्मठता उसकी लाचारी और बेबसी के सामने दम तोड़ देती है। उसे मालूम होता है जो उसे जीने नही दे रहे वे उसके परिवार का किस तरह शोषण करेंगे। उनके मोह के बंधन भी उसके अंदर जीवन की लालसा पैदा नही कर पाते।
उसके लेनदार कर्ज के लिए उससे जीने और मेहनत करने का अधिकार तक छीन लेते है। भारतीय किसान मेहनत से कभी नही डरता लेकिन उसके सामने कोई रास्ता नही बचता इसलिए वह मजबूर होकर मौत की गोद में सो जाता है।
हमारे समाज में मर्द को ताकत का प्रतिक और औरत कमजोर कहलाती है। एक ताकतवर इंसान जब मौत को गले लगाने के लिए मजबूर हो जाता है तब आप खुद सोचिये उस परिवार के बाकि छोटे और नाजुक सदस्य किस हालत में जिंदगी जीते होंगे। उनकी जिंदगी बहुत दयनीय होती है। जिसमे आंसू अधिक और रोटी कम होती है।
किसान की दयनीय हालत को बदलने के लिए सरकार ने पहले भी बीमा योजना बनाई थी लेकिन उसकी क़िस्त आम किसान की हैसियत से कही ज्यादा होती थी जिसका फायदा केवल बड़े किसानो को मिल पाता था गरीब किसान बीमा की किस्तें चुकाने से भी अपने आप को लाचार महसूस करता था। इसलिए दुखो के समय गरीब किसान को कभी बीमा का फायदा नही मिल पाया।
हमारी एक दिन की मेहनत का नुकसान होता है तो हम कई दिन तक परेशान रहते है। आप किसान की हालत सोच के देखिये उसके पुरे साल की मेहनत खुले में पड़ी होती है। जिसपर मौसम की मार, लोगो की दुश्मनीऔर कर्ज की मार उसकी बरस भर की मेहनत को मिट्टी में मिला देती है।
सरकार की नई बीमा योजना में किस्तें कम रखी गयी है। शायद इसका फायदा गरीब किसान को मिल सके। अब फसलो के आलावा अन्य चीजो का भी बीमा होगा।
हमारे किसानो की हालत सुधारने के लिए उन्हें नई तकनीको और नई चीजो की जानकारी भी अधिक से अधिक दी जानी चाहिए। उन्हें कम जमीन पर अधिक फसले उगाने के तरीके ,पशु -पालन ,मुर्गी -पालन और मछली पालन के बारे में भी बताना चाहिए। उनकी खेती में से इतना कुछ बच जाता है जो मुर्गियों,पशुओ और मछलियो के भोजन का भी इंतजाम हो जाये। जब उसकी आमदनी बढ़ेगी उसका जीवन स्तर उन्नत होगा तभी वह नई जानकारी हासिल कर सकेगा।
सरकार को ऐसे कर्मठ और भावुक लोगो का सहयोग लेना चाहिए जो सही मायने में किसानो के हमदर्द हो। उनका दोहन करने वाले ना हो अन्यथा ये योजना भी कागजो तक सीमित रह जाएगी।
भारत में सभी का पेट भरने वाले किसान आज अपना पेट भरने के भी काबिल नही रहे है। उनका आत्महत्या करने का आंकड़ा दिनोदिन बढ़ता जा रहा है। एक किसान की मौत सिर्फ एक इंसान की मौत नही होती बल्कि पूरे परिवार के खात्मे की शुरुरात हो जाती है। जो इंसान मौत की चादर ओढ़ने के लिए विवश हो रहा होता है। वह अपने अंतिम समय में रौशनी की नन्ही सी किरण तलाश रहा होता है। जीवन से निराश ब्यक्ति भी मरना नही चाहता। उसके चारो और घना अंधकार होता है। उससे मुक्ति के लिए ही वह मौत का वरन करता है।
वह जानता है उसकी मौत के बाद उसका परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच जायेगा। उसकी कर्मठता उसकी लाचारी और बेबसी के सामने दम तोड़ देती है। उसे मालूम होता है जो उसे जीने नही दे रहे वे उसके परिवार का किस तरह शोषण करेंगे। उनके मोह के बंधन भी उसके अंदर जीवन की लालसा पैदा नही कर पाते।
उसके लेनदार कर्ज के लिए उससे जीने और मेहनत करने का अधिकार तक छीन लेते है। भारतीय किसान मेहनत से कभी नही डरता लेकिन उसके सामने कोई रास्ता नही बचता इसलिए वह मजबूर होकर मौत की गोद में सो जाता है।
हमारे समाज में मर्द को ताकत का प्रतिक और औरत कमजोर कहलाती है। एक ताकतवर इंसान जब मौत को गले लगाने के लिए मजबूर हो जाता है तब आप खुद सोचिये उस परिवार के बाकि छोटे और नाजुक सदस्य किस हालत में जिंदगी जीते होंगे। उनकी जिंदगी बहुत दयनीय होती है। जिसमे आंसू अधिक और रोटी कम होती है।
किसान की दयनीय हालत को बदलने के लिए सरकार ने पहले भी बीमा योजना बनाई थी लेकिन उसकी क़िस्त आम किसान की हैसियत से कही ज्यादा होती थी जिसका फायदा केवल बड़े किसानो को मिल पाता था गरीब किसान बीमा की किस्तें चुकाने से भी अपने आप को लाचार महसूस करता था। इसलिए दुखो के समय गरीब किसान को कभी बीमा का फायदा नही मिल पाया।
हमारी एक दिन की मेहनत का नुकसान होता है तो हम कई दिन तक परेशान रहते है। आप किसान की हालत सोच के देखिये उसके पुरे साल की मेहनत खुले में पड़ी होती है। जिसपर मौसम की मार, लोगो की दुश्मनीऔर कर्ज की मार उसकी बरस भर की मेहनत को मिट्टी में मिला देती है।
सरकार की नई बीमा योजना में किस्तें कम रखी गयी है। शायद इसका फायदा गरीब किसान को मिल सके। अब फसलो के आलावा अन्य चीजो का भी बीमा होगा।
हमारे किसानो की हालत सुधारने के लिए उन्हें नई तकनीको और नई चीजो की जानकारी भी अधिक से अधिक दी जानी चाहिए। उन्हें कम जमीन पर अधिक फसले उगाने के तरीके ,पशु -पालन ,मुर्गी -पालन और मछली पालन के बारे में भी बताना चाहिए। उनकी खेती में से इतना कुछ बच जाता है जो मुर्गियों,पशुओ और मछलियो के भोजन का भी इंतजाम हो जाये। जब उसकी आमदनी बढ़ेगी उसका जीवन स्तर उन्नत होगा तभी वह नई जानकारी हासिल कर सकेगा।
सरकार को ऐसे कर्मठ और भावुक लोगो का सहयोग लेना चाहिए जो सही मायने में किसानो के हमदर्द हो। उनका दोहन करने वाले ना हो अन्यथा ये योजना भी कागजो तक सीमित रह जाएगी।

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