#murder

   
रम्या और महेश  की सुखद जिंदगी में  ग्रहण लग गया था। महेश अब खामोश रहने लगा था। वह रम्या के सामने सहज रहने की कोशिश भरसक कर रहा था। लेकिन उसके चेहरे से उसका तनाव स्पष्ट दिखाई दे जाता था। लेकिन रम्या  महेश को खुश रखने के अलावा कुछ नही कर पा रही थी। 
      एक दिन उसने सुबह आगरा जाने के बारे में रम्या को बताया। रम्या ने उसका कारण जानना चाहा तो महेश ने चुप्पी साध ली.
    रम्या के बहुत पूछने पर सिर्फ इतना बताया- उसे फाइल से सम्बंधित सुराग मिले है। शायद मुझे खोई हुई फाइल आज मिल जाये। 
  रम्या ने इससे ज्यादा पूछताछ करना जरूरी नही समझा। महेश को बुलाने के लिए एक आदमी आया था। जिसे रम्या नही जानती थी। 
       रम्या ने पूछा -यह कौन है। इसे मैने पहले कभी नही देखा। 
                महेश ने बताया -इसके द्वारा हमें उस इंसान तक पहुँचने में मदद मिलेगी। जिसके पास फाइल है।  इस लिए मै इसके साथ सुबह निकल रहा हूँ। ताकि हम उस इंसान तक पहुँच  सके।जल्दी निकलने पर वह आदमी हमें घर पर ही मिल जायेगा वरना हमें काफी समय उसका इंतजार करना पड़ेगा। 
     उसे लगा दोनों का जाना अनिवार्य होगा इसलिए उनका जाना उचित है। वह दोनों सुबह  कार  से चले गए। रम्या उनके जाने के बाद घर के काम सँभालने लगी। अभी काम पूरा भी नही हुआ था। उसके घर फोन आया की महेश को गोली मार  दी गयी है। 
      उस फाइल के कारण महेश को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा। उन निर्दयी लोगो के बारे में क्या कहा जाये जिनके लिए इंसान की कीमत धन के सामने कुछ नही है। उन्होंने एक पल के लिए नही सोचा उनके इस कदम से कितने लोगो की जिंदगी अंधकार में डूब जाएगी। उनके होठो की हंसी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। उस नन्ही सी बच्ची का ख्याल भी नही आया जिसने सही मायने में पिता का प्यार अनुभव नही किया। रम्या का क्या कसूर था। जिसे इतना बड़ा गम अकेले सहना पड़ेगा। उसकी दुनियाँ उजड़ गयी। यदि इंसान बीमारी में खत्म होता है। तो इंसान मन से तैयार होता है। उसे इस सदमे को सहने की ताकत आ जाती है। लेकिन इस आघात का सामना करने की ताकत कहाँ  से आये। रम्या  सकते की हालत में इस समय को देख रही है। 

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