मालदा हिंसा
गोधरा कांड और दादरी कांड को खबरों में बहुत उछाला गया था। उसमे एक इंसान की मौत के बाद मोदी को और अखिलेश सरकार को इस्तीफा देने के लिए जोर दिया जा रहा था। मोदी को विदेशो में भी जाने के लिए वीजा नहीं दिया गया। इस तरह का व्यवहार उनके साथ लगभग 10 साल तक किया गया।
दादरी कांड पर बहुत सारे बुद्धिजीवियों ने अपने पुरुस्कार लौटा दिए। उनकी गिनती 75 के आसपास थी। उनके अनुसार देश में असहिष्णुता का माहौल पैदा हो गया है। ऐसे माहौल का वे लोग विरोध कर रहे थे।सभी अख़बार इस घटना से भरे हुए थे।
आज मालदा में 2 लाख मुस्लिमो ने कैसे थाने का घेराव कर लिया। पुलिस वालो को दौड़ा -दौड़ा कर पीटा। थाने को जला दिया। थाने से सारे हथियार लूट लिए गए। पूरे इलाके में हिन्दुओ के घरो को जला दिया गया। हिन्दुओ पर हिंसात्मक कार्यवाही की। इस बारे में सच्ची खबर कही सुनाई नही दे रही। ममता सरकार बिलकुल चुप्पी लगा चुकी है।कोई भी राजनितिक दल इस मसले पर आवाज नही उठा रहा। अब उनके अंदर की सहिष्णुता की भावना कहाँ खो गयी है। क्यों नही आज वे अपने पुरुस्कार वापिस कर रहे।
भारत में मुस्लमान एक आवाज पर कई लाख एकदम इकठे हो जाते है। आपने कभी हिन्दुओ को इतनी अधिक संख्या में इकट्ठे होते देखा है।
एक अख़लाक़ के लिए सारी राजनितिक पार्टियाँ लामबंद हो गए थी.क्योंकि वे मोदी सरकार को नीचा दिखाकर मुसलमानो का वोट बैंक अपने हक में करना चाहती थी। हमारी वोट बैंक की नीति कब तक इस तरह असुरक्षा का माहौल पैदा करती रहेगी।
हमारे देश में कोई पुलिसवाला या ट्रैफिक पुलिसवाला किसी मुसलमान पर आरोप लगाने से डरता है क्योंकि उसका चलान काटते ही मुसलमानों की भीड़ इकट्ठी होकर उन्हें पीटने लगती है.कोई हिन्दू उन्हें बचाने के लिए नही आता क्योंकि हिदुओ के द्वारा उस पुलिस वाले को बचाते ही हर तरफ हिन्दू मुस्लिम दंगे का नाम दे दिया जायेगा। .यदि यही माहौल रहा तो भारत में मुसलमानो की समांनातर सरकार चलने लगेगी जिसपर कोई कानून लागू नही किया जा सकेगा।
कानून की रक्षा करने वालो के अंदर यदि डर बैठ जायेगा तो वे कानून को किस तरह लागू करवा सकेंगे। हमें यदि सुरक्षा के माहौल में रहना है तो इस वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठना होगा। वरना हम खुद अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मार लेंगे। 1947 में पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान का उदय हुआ था लेकिन ऐसा माहौल रहा तो आने वाले समय में भारत में से ही 5 ,6 , मुश्लिम देश बन के उभरेंगे।
गोधरा कांड और दादरी कांड को खबरों में बहुत उछाला गया था। उसमे एक इंसान की मौत के बाद मोदी को और अखिलेश सरकार को इस्तीफा देने के लिए जोर दिया जा रहा था। मोदी को विदेशो में भी जाने के लिए वीजा नहीं दिया गया। इस तरह का व्यवहार उनके साथ लगभग 10 साल तक किया गया।
दादरी कांड पर बहुत सारे बुद्धिजीवियों ने अपने पुरुस्कार लौटा दिए। उनकी गिनती 75 के आसपास थी। उनके अनुसार देश में असहिष्णुता का माहौल पैदा हो गया है। ऐसे माहौल का वे लोग विरोध कर रहे थे।सभी अख़बार इस घटना से भरे हुए थे।
आज मालदा में 2 लाख मुस्लिमो ने कैसे थाने का घेराव कर लिया। पुलिस वालो को दौड़ा -दौड़ा कर पीटा। थाने को जला दिया। थाने से सारे हथियार लूट लिए गए। पूरे इलाके में हिन्दुओ के घरो को जला दिया गया। हिन्दुओ पर हिंसात्मक कार्यवाही की। इस बारे में सच्ची खबर कही सुनाई नही दे रही। ममता सरकार बिलकुल चुप्पी लगा चुकी है।कोई भी राजनितिक दल इस मसले पर आवाज नही उठा रहा। अब उनके अंदर की सहिष्णुता की भावना कहाँ खो गयी है। क्यों नही आज वे अपने पुरुस्कार वापिस कर रहे।
भारत में मुस्लमान एक आवाज पर कई लाख एकदम इकठे हो जाते है। आपने कभी हिन्दुओ को इतनी अधिक संख्या में इकट्ठे होते देखा है।
एक अख़लाक़ के लिए सारी राजनितिक पार्टियाँ लामबंद हो गए थी.क्योंकि वे मोदी सरकार को नीचा दिखाकर मुसलमानो का वोट बैंक अपने हक में करना चाहती थी। हमारी वोट बैंक की नीति कब तक इस तरह असुरक्षा का माहौल पैदा करती रहेगी।
हमारे देश में कोई पुलिसवाला या ट्रैफिक पुलिसवाला किसी मुसलमान पर आरोप लगाने से डरता है क्योंकि उसका चलान काटते ही मुसलमानों की भीड़ इकट्ठी होकर उन्हें पीटने लगती है.कोई हिन्दू उन्हें बचाने के लिए नही आता क्योंकि हिदुओ के द्वारा उस पुलिस वाले को बचाते ही हर तरफ हिन्दू मुस्लिम दंगे का नाम दे दिया जायेगा। .यदि यही माहौल रहा तो भारत में मुसलमानो की समांनातर सरकार चलने लगेगी जिसपर कोई कानून लागू नही किया जा सकेगा।
कानून की रक्षा करने वालो के अंदर यदि डर बैठ जायेगा तो वे कानून को किस तरह लागू करवा सकेंगे। हमें यदि सुरक्षा के माहौल में रहना है तो इस वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठना होगा। वरना हम खुद अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मार लेंगे। 1947 में पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान का उदय हुआ था लेकिन ऐसा माहौल रहा तो आने वाले समय में भारत में से ही 5 ,6 , मुश्लिम देश बन के उभरेंगे।

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