#yog or kala matiyabind

     
  योग से  कई बीमारियो का इलाज किया जा सकता है। इसका ज्वलंत उदाहरण में हूँ। बचपन से मै कई बीमारियो का शिकार रही लेकिन मेरे अंदर हमेशा आगे बढ़ने की इच्छा रही। जिसके कारण मैने अपनी बीमारियो की कभी परवाह नही की बल्कि जिस काम को करने के बारे में ठान  लिया उसे अंजाम तक हमेशा पहुँचाया। 
    बचपन से  मेरे सिर में बहुत दर्द रहता था लेकिन उसके साथ ही मैने अपनी पढ़ाई  पूरी की। पढ़ाई में व्यवधान ना  आये इसलिए हमेशा दर्दनाशक दवाइयाँ  अपने साथ रखती थी। कई बार महीने में 15  दिन तक दवाइयाँ खानी  पड़ती थी। मैने कभी अपने आप को आम इंसान की तरह स्वस्थ महसूस नही किया था। मुझे दवाइयाँ खाते हुए डर भी लगता था लेकिन बीमारो की तरह बिस्तर पर पड़े रहना मुझे कभी मंजूर नही था।
      बड़े होने के बाद मुझे जुकाम बहुत ज्यादा होता था। एक बार मुझे किसी ने राय दी तुम्हारी नाक की हड्डी बढ़ गयी है। इसका  इलाज करवा कर देखो ।  में डॉ के पास  गयी।  
      उन्होंने मेरे एक्सरे वगेरह किये और परिणामस्वरूप कहा -तुम्हारी नाक की हड्डी बड़ी हुई है। इसका ऑपरेशन करवाना होगा।
     मैने जैसे ही ऑपरेशन का नाम सुना मै डर  गयी दुवारा फिर उस डॉ के पास नही गयी। 
      कुछ समय बाद मुझे त्वचा की बीमारी हुई। इसे भी सबने लाइलाज मान लिया था। मेने बिलकुल हिम्मत हार बैठी थी। इतनी सारी बीमारियो के साथ एक सामान्य जिंदगी जीना बहुत तकलीफ देह होता है। मै इतनी तकलीफो के साथ जिंदगी जीने की जगह मौत मांगने लगी थी। 
     एक दिन मेरी सहेली ने मुझे योग की कक्षा में चलने के लिए कहा। मैने उसके साथ रवि शंकर जी की पांच दिन की "जीने की कला " कक्षा में भाग लिया। मुझे आरम्भ में कुछ खास असर नही दिखाई दिया। मै हिम्मत हारने लगी थी। लेकिन इसे मैने लगातार करती रही। शुरू में प्राणायाम करने का मुझे कोई खास कारण समझ में नही आया। लेकिन इसे चालू रखा। 
     काफी समय बाद मैने गौर किया। अब मुझे जुकाम होने का पता ही नही चलता। जुकाम के कारण नाक बंद,सिर दर्द ,साँस लेने में परेशानी ,आँखों से पानी आना बंद हो गया है। अब सिर का दर्द भी इतना भयंकर नही होता की दवाई कहानी पड़े। अब मै घर में सिर  दर्द की दवाई भी नही रखती। 
      किसी ने मुझे पंचकर्मा करवाने की सलाह दी। यह आयुर्वेद का एक रूप है। मेने पंचकर्मा कई बार करवाया जिससे मेरे अंदर की शुद्धि हो गयी जिससे त्वचा की परेशानी कम हो गयी। 
     उन्होंने मुझे ध्यान लगाने  आसान तरीका बताया जिसके कारण मेरी एकाग्रता बढ़ गयी। मुझे अंदर से भय का अहसास भी नही रहा। मै आज बचपन की अपेक्षा ज्यादा स्वस्थ महसूस हूँ। 
      अभी विदेशो में हुए शोध से मालूम चला है कुछ योग काले मोतियाबिंद के लिए हानिकारक है। लेकिन आजकल काला मोतियाबिंद हर उम्र के इंसानो को अपने पंजे में दबोच रहा है। इसका कोई सही इलाज नही ढूंढा जा सका है। मेने इसके कारण छोटी उम्र के बच्चो  को भी अँधा होता देखा है। मुझे लगता है। यदि प्राणायाम और ध्यान जैसी योग की कसरते की जाये तो मन शांत रहने से काला मोतियाबिंद का असर कम होगा। डॉ कुछ आँखों से संबंधित कसरते करवाते है। जिससे आँखों की रौशनी पर अच्छा असर पड़ता है। आँखों की बंद हुई नसे भी खुलने लगती है। मैने अपने सामने ऐसे बच्चो को देखा है यदि उनपर सही समय पर ध्यान नही दिया जाता तो वे अंधे होते। इसलिए मै खान -पान और योग की कुछ खास कसरतों के  महत्व पर जोर देती हूँ। 

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