#rohit vemula or ajadi ki pribhasha

                                               रोहित वेमुला  और आजादी 
भारत की आजादी के बाद संविधान को लागु हुए आज ६७ साल पुरे हो गए है।  संसार में भारत ही सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसमें अब तक सही तरह से चुनाव करवाये जाते है। लोगो के अंदर आज भी प्रजातंत्र  की भावना  दिखाई देती  है।
      भारत एक ऐसा देश है। जहाँ सभी हर दूसरे इंसान को असहिष्णु समझते है। लेकिन जितनी आजादी भारत में दिखाई देती है। उतनी आजादी किसी अन्य देश में दिखाई नही देती। भारत ऐसा देश है जिसमे प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई भी बोल सकता है। कोई भी अल्पसंख्यक संस्थान प्रधान मंत्री को अपने संस्थान में  आने से मना कर सकता है लेकिन एक प्रधानमंत्री ही निरीह प्राणी होता है जो उनकी आज्ञा को सर- माथे लेता है। विरोध में कुछ बोल नही सकता बिना बोले ही समाचार चैनल उसके खिलाफ अनर्गल बकबास करने लगते  हे। 
        भारत में इतने बरसो से आतंकवाद दिखाई दे रहा है। आतंक फैलाने वाले देश के बारे में सभी अच्छी तरह जानते है लेकिन उसके बाद भी उस देश के खिलाफ केवल शव्दिक कार्यवाही करने के आलावा भारतीय नेताओ ने कोई सख्त कदम नही उठाये।
       कुछ समय पहले अपने देखा होगा फ्रांस, रूस ,अमरीका जैसे देशो में एक आतंकवादी घटना होते ही उन देशो ने आतंकवादी देश को मिटा डालने की कसम खा ली। लगभग 60 %जनता जान माल को बचाने के लिए दूसरे देशो में शरण की तलाश में भाग रही है। लेकिन वहाँ की जनता अपने नेताओ के साथ है। 
        भारत में कोई भी सख्त कदम उठाने वाला नेता आज तक नही आया लेकिन बिना सख्त कदम उठाये ही मोदी के खिलाफ बयान बाजी करने से लोग रुक नही रहे। कहा जाता है -एक समय ऐसा आएगा जब भारत में ढेर सारे हथियार होने के बाबजूद, भारत को आतंकवादियों से बचाने के लिए दूसरे देशो से गुहार लगानी पड़ेगी। 
        भारत में रहने वाले रोहित वेमुला का उदाहरण हमारे सामने है। उसने मुंबई में 186 लोगो को मौत के घाट उतारने वाले याकूब को फांसी देने के खिलाफ एक संगठन बना डाला। उसके आंदोलन कारी गतिविधियों के खिलाफ जब अखवारों में उछाला गया और पुलिस वालो ने  उनके कार्यो को देश के  खिलाफ बताया तो उन्हें तीन बार चेतावनी दी गयी। उन प्रतिबंधों का भी  उन लोगो पर कोई असर नही हुआ। 
      उसने अपने हॉस्टल के कमरे को याकूब मेमोरियल हाल बना डाला। लोगो को वहाँ आकर याकूब को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रोत्साहित करता था। 
     रोहित के अनुसार एक याकूब की फांसी से हजारो याकूब पैदा होंगे। उसके अनुसार "मुज्जफरनगर बाकी है " एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बना डाली। जिसमे मुस्लिमो को हिन्दुओ पर हमले करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसे देखकर आप  रोहित वेमुला को  क्या कहेंगे। 
     भारत में गाय के मांस पर प्रतिबन्ध है। लेकिन रोहित के दिमाग में ऐसा खलल पैदा हो गया था। वह हैदराबाद विश्वविद्यालय में गौ -मांस की दावत का आयोजन करता था। आप किसी हिन्दू से इस तरह की उम्मीद कर सकते है। 
  उसके इन सब कार्यो को देखते हुए   उसके साथ उसके साथियो को निलंबित कर दिया गया। रोहित को निलंबन के बाद भी अपने कार्यो के लिए ग्लानि पैदा नही हुई बल्कि उसने हॉस्टल के बाहर रहकर आंदोलन जारी रखा। उसकी फांसी लगा लेने के बाद सारी  राजनीतिक पार्टियाँ एक स्वर में उसे  देशप्रेमी साबित करने में लगी है। 
    रोहित की फांसी लगा लेने का मुझे दुःख है। उसकी जिंदगी यदि सही रास्ते पर चलती तो देश को एक और अम्बेडकर जैसा नेता मिल सकता था लेकिन आप खुद सोच कर देखिये उसका कृत्य कितना सही था। 
       यदि आने वाले समय में भारत के ऊपर आतंकवादी आक्रमण होने पर आप सोच कर देखिये इन सबका जिम्मेदार कौन होगा। वो नेता जो वोटबैंक की राजनीति करते है। जिनके चारो तरफ खूब सारी पुलिस केवल उन्हें बचाने के काम में लगी रहती है। जिनके ऊपर जो खर्च हो रहे है वे हमारे दिए हुए कर का नतीजा ही है। उनके द्वारा हमारी सुरक्षा में ही घात लगाई जा रही है।
      हमारे लिए अपने देश की और अपनी रक्षा कितनी मायने रखती है। एक बार रोहित वेमुला जैसे लोगो के साथ सहानुभूति रखने से पहले एक बार जरूर सोचने की कोशिश करना आपके लिए क्या सही है। सारे देश के छात्र  उसके साथ एकजुटता दिखाने में लगे है लेकिन आने वाले समय में यदि कोई आतंकवादी घटना में आपका अपना प्रिय दुनिया से चला जाये तो आप इसके लिए किसे दोष देंगे ?जरूर सोचना।  

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