तनाव और इंसानी रिश्ते
तनाव के कारण रिश्तो का रूप बदल रहा है। पहले समय में आक्रामक केवल आदमी माने जाते थे लेकिन आजकल ओरतो को लेकर भी ऐसी खबरे समाचार चैनल पर दिखाई जा रही है जिन पर आसानी से यकीन नही हो पाता। ये विदेशी नही भारतीय महिलाओ की कहानियाँ है।
इसका कारण उनका परिवरिश ऐसे माहौल में हो रहा है या उन्हें इतने समय तक प्रताड़ित किया गया है कि वे अब नियंत्रण से बाहर हो रही है।
कल समाचारो में एक औरत अकेले में अपनी बीमार और बूढ़ी सास को बहुत बुरी तरह से मार रही थी। जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।
उस सास ने इससे पहले भी अपने बेटे से इस बारे में शिकायत की होगी जिस पर उसके बेटे को यकीन नही आया होगा। कई बार की शिकायत का उस पर असर हुआ कि उसने पत्नी की अनुपस्थिति में cctv चुपचाप लगवा दिया।
वह खुद इस वीडियो को देखकर हैरान हो गया होगा। इसपर संदेह करने का कोई कारण नही था। ये विडिओ उसने पुलिस को दिखाया तो उसकी पत्नी को पुलिस पकड़ कर ले गयी।
आज समाचारो में पत्नी का बयान आया - ये लोग मुझे बहुत सताते थे। इसलिए में अकेले में सास से बदला लेती थी।
लेकिन बदला उसने एक बूढ़ी और बीमार औरत से ही लेने के बारे में क्यों सोचा। वह बूढ़ी औरत अपना बचाव करने में भी असमर्थ थी। जैसे- आदमी अपना सारा गुस्सा कमजोर आदमी पर उतार कर अपनी मर्दानगी समझते है।क्या यही मानसिकता उस औरत की थी।
अभी सिंगापुर की सर्वे रिपोर्ट पड़ी जिसमे कहा गया है। तनाव का कारण हमारे आसपास के लोग होते है। बीमारो का इलाज करने वाले और सेवा करने वाले दोनों को तनाव झेलना पड़ रहा होता है। उनका तनावग्रस्त होना भी तनाव के बीमारो की संख्या बड़ा रहा है।
विदेशो में तनाव के शिकार नर्स और डॉ को रिलेक्सेशन सेंटर में भेज दिया जाता है। जहाँ जाकर वे तनावरहित हो जाते है। लेकिन भारत में ऐसी व्यवस्था नही है। उनको तनावग्रस्त होते हुए ही अपने काम को अंजाम देना पड़ता है। मरीजों की अधिक संख्या भी तनाव का कारण बन जाती है।
जिस घर में मरीज होते है। उस घर की गृहिणियों को भी तनाव से गुजरना पड़ता है। उनकी मानसिक हालत कोई समझने की कोशिश नही करता बल्कि काम का दबाब बढ़ाते जाते है। जिस का विस्फोट इस रूप में होने लगा है।
औरत पुरे परिवार की धूरी होती है। उसका बचपन से ही इस तरह पालन -पोषण किया जाना चाहिए कि उसके अंदर कोमलता बनी रहे। उसके अंदर सेवाभाव की भावना होनी चाहिए यदि वह तनावग्रस्त हो तो पूरे परिवार को उसके साथ मिलकर काम करना चाहिए वरना अकेले में उसका ऐसा आक्रामक रूप देखने को अक्सर मिलने लगेगा।
तनाव के कारण रिश्तो का रूप बदल रहा है। पहले समय में आक्रामक केवल आदमी माने जाते थे लेकिन आजकल ओरतो को लेकर भी ऐसी खबरे समाचार चैनल पर दिखाई जा रही है जिन पर आसानी से यकीन नही हो पाता। ये विदेशी नही भारतीय महिलाओ की कहानियाँ है।
इसका कारण उनका परिवरिश ऐसे माहौल में हो रहा है या उन्हें इतने समय तक प्रताड़ित किया गया है कि वे अब नियंत्रण से बाहर हो रही है।
कल समाचारो में एक औरत अकेले में अपनी बीमार और बूढ़ी सास को बहुत बुरी तरह से मार रही थी। जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।
उस सास ने इससे पहले भी अपने बेटे से इस बारे में शिकायत की होगी जिस पर उसके बेटे को यकीन नही आया होगा। कई बार की शिकायत का उस पर असर हुआ कि उसने पत्नी की अनुपस्थिति में cctv चुपचाप लगवा दिया।
वह खुद इस वीडियो को देखकर हैरान हो गया होगा। इसपर संदेह करने का कोई कारण नही था। ये विडिओ उसने पुलिस को दिखाया तो उसकी पत्नी को पुलिस पकड़ कर ले गयी।
आज समाचारो में पत्नी का बयान आया - ये लोग मुझे बहुत सताते थे। इसलिए में अकेले में सास से बदला लेती थी।
लेकिन बदला उसने एक बूढ़ी और बीमार औरत से ही लेने के बारे में क्यों सोचा। वह बूढ़ी औरत अपना बचाव करने में भी असमर्थ थी। जैसे- आदमी अपना सारा गुस्सा कमजोर आदमी पर उतार कर अपनी मर्दानगी समझते है।क्या यही मानसिकता उस औरत की थी।
अभी सिंगापुर की सर्वे रिपोर्ट पड़ी जिसमे कहा गया है। तनाव का कारण हमारे आसपास के लोग होते है। बीमारो का इलाज करने वाले और सेवा करने वाले दोनों को तनाव झेलना पड़ रहा होता है। उनका तनावग्रस्त होना भी तनाव के बीमारो की संख्या बड़ा रहा है।
विदेशो में तनाव के शिकार नर्स और डॉ को रिलेक्सेशन सेंटर में भेज दिया जाता है। जहाँ जाकर वे तनावरहित हो जाते है। लेकिन भारत में ऐसी व्यवस्था नही है। उनको तनावग्रस्त होते हुए ही अपने काम को अंजाम देना पड़ता है। मरीजों की अधिक संख्या भी तनाव का कारण बन जाती है।
जिस घर में मरीज होते है। उस घर की गृहिणियों को भी तनाव से गुजरना पड़ता है। उनकी मानसिक हालत कोई समझने की कोशिश नही करता बल्कि काम का दबाब बढ़ाते जाते है। जिस का विस्फोट इस रूप में होने लगा है।
औरत पुरे परिवार की धूरी होती है। उसका बचपन से ही इस तरह पालन -पोषण किया जाना चाहिए कि उसके अंदर कोमलता बनी रहे। उसके अंदर सेवाभाव की भावना होनी चाहिए यदि वह तनावग्रस्त हो तो पूरे परिवार को उसके साथ मिलकर काम करना चाहिए वरना अकेले में उसका ऐसा आक्रामक रूप देखने को अक्सर मिलने लगेगा।

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