#rksha mantri

                              रक्षामंत्री के खिलाफ आरोप 
 
   हमारे रक्षामंत्री वी. के ,सिंह कई बार आरोपों में घिरे है। इससे पहले इतने अधिक आरोप किसी अन्य जनरल पर कभी नही लगे। लेकिन उन आरोपों ने उन्हें उनके कार्यकाल में ही नही घेरा बल्कि वे आरोप आज भी उनका पीछा नही छोड़ रहे है। 
     उनके गलत  उम्र लिखा होने का विवाद कोर्ट तक पंहुचा उस समय लगता था। उन्हें समय से पहले रिटायर होना पड़ेगा। 
     उनके राज में कई घोटालो का पर्दाफाश हुआ। जबकि इससे पहले आम जनता के सामने इस तरह के घोटाले लाये ही नही गए। 
     उनके राज में सबसे भयानक खबर सुनाई दी कि सेना ने दिल्ली की तरफ कुच  किया है। सेना हरियाणा से दिल्ली पर कब्जा करने निकल पड़ी है। ये खबर उस समय सुर्ख़ियो में थी। आज भी इसका जिन्न गाहे -वगाहे उठ खड़ा होता है।  कांग्रेसी मंत्री " मनीष तिवारी जी "ने अपनी किताब में फिर से इस घटना को सच्ची खबर के रूप में स्थान दिया है।
     इस खबर की सच्चाई पर मुझे यकीन नही  है। हमारे सामने दूसरे देशो के उदाहरण है। जिसमे सेना किसी भी चुनी हुई सरकार को हटा कर खुद शासन चलाने लगती है। सारी जनता पर तानाशाही लागू कर दी जाती है। मानवाधिकारों का कोई मतलब नही रहता। सारे बड़े नेता जेल में ढूंस  दिए जाते है। लेकिन भारत को आजाद हुए 68 साल हो गए है। इतने सालो में एक बार भी सेना का शासन नही रहा इसका मुख्य कारण हमारे संविधान निर्माताओ ने सारी शक्तियाँ किसी एक इंसान के हाथो में सौंपी नही है। 
      हमारी तीनो सेनाओ(जल, थल, नभ ) के पास अलग -अलग मुख्य सेनाधिकारी है। उनके बाद तीनो सेनापतियों की  सारी रिपोर्ट राष्ट्रपति के पास जाती है। प्रधानमंत्री  और राष्ट्रपति   एकमत होकर सेना के मामले में निर्णय  लेते है। तीनो सेनाध्यक्ष अपनी -अपनी सेना को आदेश दे सकते है। लेकिन तीनो सेनाओ को एकसाथ निर्देश देने वाला कोई एक सेनाध्यक्ष नही होता। वे अपनी सेना के मुख्य जरूर होते है लेकिन तीनो सेनाओ पर अधिकार ज़माने के लिए कोई एक सेनाध्यक्ष कभी बनाया ही नही गया। इसके फायदे अब दिखाई देते है। 
      हमारे देश में यदि तीनो सेनाओ के उपर  एक और मुख्य सेनाध्यक्ष होता तो इतने समय तक  भारत में प्रजातंत्र लागू नही रह  पाता। हमारे यहाँ भी पाकिस्तान की तरह नाममात्र के नेता होते। जिनके खिलाफ होने पर सेना शासन संभाल कर उन्हें सीखचों के पीछे डाल देती। 
       हम पाकिस्तान के मुख्यमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कितनी भी बयान बाजी कर ले। लेकिन वे पाकिस्तान के नाममात्र के शासक है। उनके सदभाव का हाथ बढ़ाते ही वहाँ की सेना ऐसा कदम उठा लेती है कि  भारत की भावनाए आहत हो जाती है। 
     भारत की सेना  पर इस तरह के आरोप कभी नही लगाये गए। संसार के सभी देशो की सेनाओ से यदि तुलना की जाये तो हर जगह उन्होंने अपने अच्छे कामो के द्वारा भारत का नाम रोशन किया है। संयुक्त राष्ट  के द्वारा यदि  किसी देश में  सेना की तैनाती होती है। तो सबसे पहले भारतीय सेना के लिए गुहार लगाई जाती है। उसके बाद ही किसी दूसरे देश को अपनी सेना भेजने के लिए कहा जाता है। हमारे देश के संस्कारी सैनिक दूसरो की भलाई के लिए अपनी जान की परवाह भी नही करते। 
      मै वी के सिंह जी की ईमानदारी पर यकीन करती हूँ। वे  सैनिको के समान बेबाक बोलते है। उन्हें नेताओ के सामान लाग- लपेट के बोलना नही आता इसका खामियाजा उन्हें अक्सर उठाना पड़ता है। उनके इरादो पर संदेह करना गलत है। उनकी ईमानदार   छवि के कारण ही वे केबिनेट मंत्री बने है। 

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