sadhna

कामना ने अपनी जिंदगी से समझोता कर लिया था । लेकिन उसके मायके वाले और ससुराल वाले दोनों चाहते थे वो किसी पर निर्भर ना  रहे उसकी पढ़ाई  तो इतनी थी की उसे अच्छी जगह नौकरी मिल जाए । सभी उसकी भलाई के विषय में सोचते रहते थे । उन्ही दिनों दिल्ली में सरकारी नौकरी निकली । उनके भाई ने उनसे सारे कागजो पर दस्तखत करवा कर फार्म भर दिया । उसे पता भी नहीं चला और फार्म भर कर जमा हो गया । परीक्षा की तारीख जब आ  गयी तब भाई ने बताया ,तेरा रोल नंबर आ गया हे और उसे पढ़ाई  के लिए अपने साथ ले आया । दिल्ली आकर सही ढंग  से प्रतियोगिता की तैयारी में लग गई । उसकी मेहनत  रंग लाई । वो सरकारी विद्यालय में अद्यापिका  लग गयी ।
             अब वह भाई के घर में रहने लगी क्योकि भाई के घर के पास विद्यालय था इसलिए उसे आने -जाने में कोई दिक्कत नहीं आती थी । अब उसके बच्चे यहाँ के माहोल में डल  गए थे । उसके बच्चो को अच्छी शिक्षा मिल रही थी । उसका आधा दिन विद्यालय में और बाकी  समय बच्चो और घर की देखभाल में बीत   जाता था । अब भी उसका पढ़ाई से मोहभंग नहीं हुआ था । उसने एम, ए, की पढ़ाई  शुरू कर दी । बच्चों  की पडाई के  साथ -साथ उसकी पढ़ाई भी  चल रही थी ।
        ससुराल में देवर शेखर की शादी अच्छी लड़की से हो गयी थी । उसकी गृहस्थी बस गयी थी । कामना के ससुराल वाले भी उसकी नौकरी लग जाने से खुश थे । कामना में नया आत्मविश्वास आने लगा हे वह भलभाँति सारी  जिम्मेदारी निभा रही हे । पर नम्रता ने आज भी उसका दामन  नहीं छोड़ा हे । उसके जीवन से जो हंसी गायब हो गयी थी वह धीरे -धीरे वापस आने लगी हे । उसके बच्चे विवेक और विवान भी अच्छे नंबर लाते  हे । जिस भाई के साथ कामना रहती हे वह भाई डॉक्टर हे । उसके बेटे मामा  की तरह डॉक्टर बनना चाहते हे ।  कामना की उन्नति हो गयी हे । उसके बच्चे बहुत मेहनत  करते हे । शायद उनका डॉक्टर बनने का सपना भगवान  पूरा कर दे । उसकी साधना अब पूरी होती दिखाई दे रही हे । उसका पूरा जीवन त्याग और तपस्या की जीती जागती कहानी बन गया है ।
       

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