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कामना के दोनों बच्चो में दो साल का अंतर है ।बड़े बेटे का नाम विवेक और छोटे का नाम विवान रखा ।  दोनों भाई बड़े प्यार से रहते थे उनपर माँ -पिता न्योछावर थे देखने  में बहुत प्यारे और भोले भाले थे । उनकी शरारतो पर कामना और रमेश कुर्बान होते थे । अभी विवेक और विवान कुछ ही सालो के हुए उनके पिता जी को एक फुंसी हुई उन्होंने इस को इतना महत्त्व नहीं दिया । आस -पास इलाज करवाया पर असर नहीं हो रहा था।  उन्होंने वड़े शहर में दिखाया उनका एक ऑपरेशन करने के लिए डॉक्टर ने कहा । उन्हें ये इतना बड़ा नहीं लगा । रमेश ऑपरेशन के लिए तैयार हो गए ।
        कामना को रमेश ने जब ऑपरेशन के बारे में बताया उसे भी ये इतनी बड़ी बात नहीं लगी । क्योंकि एक फुंसी का ऑपरेशन होना किसी को भी बड़ा नहीं लगता । जिस दिन रमेश का ऑपरेशन होना था कामना ने अपने देवर शेखर को मदद के लिए बुला लिया था । दोनों रमेश के पास थे डॉक्टर रमेश को जब अंदर स्ट्रेचर पर ले जा रहे थे । रमेश ने कामना का हाथ पकड़ लिया । कामना को अजीव लगा, साथ ही   रमेश को ऑपरेशन से डर लग रहा हैयह सोच  वह हंसती हुई बोली -"चिंता मत करो ,तुम जल्दी ऑपरेशन कराके आ  जाओगे । फुंसी का  ऑपरेशन कोई इतना बड़ा नहीं होता ।"रमेश के अंदर बैचेनी थी जिसे कामना नहीं समझ पा  रही थी । रमेश भी शब्दों में व्यक्त नही कर पा  रहे थे । उनको अंदर ले जाया गया । कामना रमेश का बाहर इंतजार कर रही थी उसे पूरी उम्मीद थी रमेश ख़ुशऔर स्वस्थ बाहर  आयेगे ।
         कालगति ने कुछ और ही सोच रखा था । ऑपरेशन थिएटर से रमेश नहीं उनकी लाश ही बाहर आयी । किसी को रमेश की मौत पर यकीन नहीं आ  रहा था । कामना रोते -रोते बेहाल हुई जा रही थी ।उसके मुँह  से एक ही शब्द निकल रहा था "मुझे पता होता की आप वापस नही आओगे में कभी ऑपशन के लिए हा नहीं कहती।  "कामना रोते -रोते  बेसुध हुई  जा रही थी ।
        कामना की उम्र अभी सिर्फ २५ साल थी । शहरो में लडकिया इस उम्र में घर बसाने के बारे में सोचती है उस उम्र में उसका भगवान ने  सब  छीन लिया । कामना के लिए सब्र करना मुश्किल  हो रहा था । कई बार लगता हे भगवान  से कामना की खुशिया देखी  नहीं गयी इसलिए रमेश को अपने पास बुला लिया । इस घटना के बरसो बाद भी उसे नहीं पता चला  कि  उसके पति का ऑपरेशन किस का हुआ था । क्योंकि फुंसी का इलाज ऐसा मुश्किल  नहीं हो सकता कि इंसान की जान ही चली जाए ये प्रश्न आज भी  उलझा हुआ है । 

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