- कन्या कुमारी हम रात के समय पहुंचे । हमें वातावरण का पता नहीं चल पा रहा था । खाना खाने के बाद जब हम बापस होटल आ रहे थे । हमें चारो और घूमती हुई रोशनी दिखाई दे रही थी । पर इस रोशनी का कारन समझ नहीं आ रहा था । मुझे कुछ लाइट हाउस जैसा लग रहा था पर मैंने किसी को ये बात नहीं बताई । कही मेरा मजाक न बन जाए । हम बापस होटल में आकर सो गए ।
- हमे होटल के दो कमरे मिले थे । एक कमरा बहुत बड़ा था दूसरा कुछ छोटा था । एक रसोई भी थी । सब बहुत अच्छा लग रहा था ।हम सुबह सागर देखने जाएगे ये सोचते हुए हम सो गए ।
- अगले दिन सुबह हमारा दरबाजा खटकने लगा तब हम उठे । हमे बताया खिड़की के बाहर देखो । जिसे देखने का विचार करते हुए हम रात को सोए थे । वह सागर तो हमारे पास ही था । सागर एक तस्वीर की तरह लग रहा था । काफी समय बाद यकीन आया । हमारा सपना सच हो गया
I am retired hindi teacher in govt school. trevller , apne yatra ke anubhav aapke sath share kar rahi hu . yatra me aane vali kathinaiyan aur khushiyan dono me aapke satha rhungi
kanya kumari
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