bus ka safar

में और शैलजा बचपन से एक ही विद्यालय में पढे थे  ।मै  बचपन में  बहुत शरारती थी । वह एकदम सीधी थी । बचपन के दिन कब बीत गए पता ही नहीं चला ।  उसके पिता जी  लकड़ी का काम करते थे ।  वो दो बहने थी बड़ी बहन राधा बहुत डरपोक और दुनिया से अनजान थी । उसे घर से बाहर जाकर कुछ काम करते भी मैंने कभी नहीं देखा । इतनी सीधी लड़की की कल्पना करना भी आसान नहीं हे । 
      एक दिन उसे घर से बाहर बस का सफर करना पड़ा । एक तो पहले जिंदगी में उसने बस में कभी सफर नहीं किया ।  उसे हमारे साथ जाते हुए बहुत डर  लग रहा था । हम सब उसकी हिम्मत बड़ा रहे थे  कि  दिल्ली में बस का सफर करना मुश्किल नहीं हे । हम तो रोज ही सफर करते हे किसी तरह वह हमारे साथ चलने के लिए तैयार हो गयी । 
      उन दिनों बस में सफर करना आसान नहीं होता था । दिल्ली की बस में बहुत ही ज्यादा भीड़ रहती थी उसमे चढ़ना और उतरना बहुत मुश्किल  होता था । हमें तो आदत पड़  गयी थी इसलिए हमे फरक नहीं पड़ता था । बस में चढ़ने बालो की भीड़ देखकर पहले ही उसकी हिम्मत जबाब दे गयी उसने साफ मन कर दिया में नहीं चलूंगी पर बार - बार मिन्नते करने पर वो बस में चलने को तैयार हो गयी । अबकी बार  कम भरी  बस आई । किसी तरह वह बस में चढ़ पाई । हमे लगा अब सफ़र आसानी से कट जाएगा । बस में हमे  बैठने की जगह नहीं मिली । हमें कोई फर्क नहीं पड़ा पर वो और भी ज्यादा घबरा गयी । वो सुरक्षा के लिहाज से  एक बुड्ढे इंसान के पास बाली सीट पर जाकर खड़ी हो गयी । राधा बहुत घबरा रही थी । पर हम सोच रहे थे इसी तरह उसकी धीरे धीरे घबराहट दूर होगी । 
           अचानक चालक ने बस को ब्रेक लगा दी वह अपने आप को संभाल  नहीं पाई और उस बुड्ढ़े  आदमी की गॉद  में जाकर गिर गयी वह बहुत बुड्ढ़ा  था । उस आदमी को बहुत गुस्सा आया । राधा शरमाई और घबराई उठ खड़ी हुई ।  उस आदमी का गुस्सा शांत नहीं हुआ वह पूरे  समय उटपटांग राधा के लिए बोलता रहा।  राधा की हालत देखकर हमने उस बुड्ढे को  समझाने  की बहुत  कौशिश की । लेकिन उस पर कोई असर नहीं । राधा रोने लगी । पर उस बुड्ढे का बोलना बंद नहीं हुआ । 
          राधा की हालत देखकर हम बस से पहले ही उतर गए । इस हादसे के बाद राधा  ने  जिंदगी में कभी बस में  सफर नहीं किया । आज भी उस दिन को याद करके हमारी हंसी रोके नहीं रूकती । बाद में हमने राधा का बहुत मजाक बनाया "तुझे गिरने के लिए और कोई नहीं मिला और खड़ी हो सुरक्षित स्थान पर जाकर ।"इसे सुनकर राधा और भी शर्मा जाती थी । 
          

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