- में अपने रिश्तेदार के घर अपने बेटे को लेकर गयी वहाँ हमे बहुत अच्छा लग रहा था । बेटा बहुत खुश था । वो बच्चो के साथ खेल रहा था । हम सभी बहुत खुश थे । कोई एक दूसरे से दूर नहीं होना चाहता था । पर हमें घर भी लोटना होता हे । शाम के समय हम लौटने के लिए तैयार हुए । उन्होंने बेटे को चलते समय कुछ पैसे दिए । बेटे ने न कहा । पर रिश्तेदार ने जबरदस्ती उसके हाथ में पैसे रख दिए । बेटा गुस्से से भर गया । बोला - " में भीख नहीं लेता" । हम सुनकर हैरान रह गए । उसे बहुत समझाने के कौशिश की पर वह नहीं माना । वह प्यार और भीख में अंतर नहीं कर पा रहा था ।
- में अपनी बहन के घर गई वहाँ काफी लोग आये हुए थे । बहुत मजा आ रहा था बहुत बातें हो रही थी । एक भतीजे की बेटी बार -बार हमारे बीच में आकर अपनी बात कहने की कौशिश कर रही थी । वह केवल तीन साल की थी । हमे उसपर प्यार तो बहुत आ रहा था पर जितना ध्यान वो चाहती थी उतना उसे नहीं दे पा रहे थे ।
- कुछ समय बाद जिद करने लगी पापा गोदी ले लो । बातो में उसपर ध्यान नहीं दे पा रहे थे । वो जोर से कहने लगी पापा गोदी ले लो । मुझे शरारत सूझी । मेने उसके पापा के कंधे पर हाथ रख कर कहा - "ये मेरा बेटा हे " । इतना सुनते ही अपनी माँ की गोदी में चढ़ते हुए कहने लगी -"पापा दादी गोदी ले ली "। हम समझ ही नहीं पा रहे थे कि हाथ रखते ही उसने कैसे समझ लिया । कि उसका स्थान हमने ले लिया । वहाँ सभी उस बच्चे से बड़े थे । हमारा हसते - हँसते बुरा हल हो गया ।
I am retired hindi teacher in govt school. trevller , apne yatra ke anubhav aapke sath share kar rahi hu . yatra me aane vali kathinaiyan aur khushiyan dono me aapke satha rhungi
shararat
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