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कामना पति की अंतिम क्रिया के बाद ससुराल  में आकर रहने लगी । उस घर में सास -ससुर ,दादी सास -दादा ससुर,चाचा जी का परिवार ,ताया जी का परिवार ,और नन्द ,देवर रहते थे । उसके पति सभी के दुलारे थे । बड़े लोग रमेश की मौत के सदमे से उबर नहीं पा  रहे थे । उनका लाडला उन्हें छोड़कर क्यों चला गया । वे सब  सदमे में थे । उसके ससुर कामना और रमेश पर पाबंदी लगाते थे । वे हर समय अपने को दोष देते रहते थे । हमेशा यही कहते -"यदि मेने इतनी सख्ती न बरती होती तो रमेश आज मेरे पास  होता । इस तरह मुझे छोड़कर नहीं जाता । " उन्हें कैसे समझाते जाने वाले को कौन रोक सकता है । वह तो खुद अपने परिवार से बहुत प्यार करते थे । वो किसी से दूर नही जाना चाहते थे ।
       रमेश की मौत के बाद उस साल परिवार में पांच और लोगो की मौत हुई । वे रमेश के सदमे से बाहर नहीं निकल पा  रहे थे । कोई तसल्ली काम नहीं आ रही थी । कोई शव्द दिलासा नहीं दिला  पा रहे थे । ऐसा लगता था उस परिवार को किसी की नजर लग गयी है । भरा पूरा परिवार खाली  हो गया था । हर तरफ एक चुप्पी छा  गयी थी ।
       अब उसके ससुर जी ने देवर शेखर से कामना की शादी करने की बात सबके सामने रखी । सब  ना नुकुर के बाद इस शादी के लिए तैयार हो गए । कामना इस शादी के लिए तैयार नहीं हुई । वह रमेश को बहुत प्यार करती थी उसे भूलना उसके लिए बहुत मुश्किल  था । वह रमेश की मौत से बहुत डर  गयी थी । कामना रमेश की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार मानने लगी थी । सभी लोग उसकी छोटी उम्र  और छोटे दो बच्चो को लेकर फ़िक्र मंद थे ।
       कामना उन लड़कियों में थी जो कभी किसी काम के लिए ना  नहीं कहती थी । इतने बड़े परिवार की जरूरते पूरी करना आसान नहीं होता । मेने एक दिन उससे पूछा -"जब तुम बीमार पड़ जाती थी तब क्या करती थी । " उसका जबाब सूनकर  में हैरान हो गयी । कामना ने कहा - " जब मुझसे उठा नहीं जाता था में लेट  जाती थी । सबको पता था में तभी लेटती हु जब बीमार होती हु कोई भी मुझसे काम के लिए नहीं कहता था सब काम कर लेते थे । " इसी तरह दिन गुजरते जा रहे थे । धीरे -धीरे कामना परिपक्व होती जा रही थी । समय अपनी गति से चला जा रहा था । 

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