salankhe or sar

मेरा क्लास में अभी प्रवेश हुए एक सप्ताह हुआ था हम अभी कॉलेज को जानने की कौशिश कर रहे थे । मेरा प्रवेश अपने शहर से दूर हुआ था । सब कुछ नया लग रहा था । मेरी २ सहेली बन गयी थी । मै उनके साथ घूम रही थी । इतने में मुझे ऑफिस से बुलावा आया । इतने में एक ने कहा मुझे जाना है । वह चली गयी । मै  और कमला ऑफिस की तरफ चल पड़ी । हमारे ऑफिस में एक कमरे के बीच में दो क्लर्क बैठे हुए थे । दोनो  क्लर्क और हमारे बीच में एक खड़ी सलाखों की रैलिंग  जैसी चीज लगी हुई थी । वहाँ  उनसे बात करना तो बहुत आसान था । लेकिन उन्होंने   एक कागज पर मुझे हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया था ।
         मुझे लगा ये काम बहुत आसान है ,मैने हाथ अपना आगे बढ़ाया पर मेरा हाथ रजिस्टर तक नहीं पहुंच पा रहा था । रेल्लिंग के अंदर मेज और मेरे बीच में  क्लर्क की कुर्सी भी थी । उस हिसाब से मेरा हाथ छोटा पड रहा था । मै  पूरी कौशिश कर रही थी कि किसी तरह मेरा हाथ उस रजिस्टर तक पहुंच जाए पर मै  सफल नहीं हो पा  रही थी । मुझे समझ नहीं आ  रहा था कि  मेरा हाथ इतना छोटा क्यों रह गया क्योंकि में सामान्य कद की लड़की कहलाती हूँ ।
        मैने अपनी पूरी कौशिश करनी शुरू  कर दी कुछ उन्होंने अपना रजिस्टर आगे किया और कुछ मैने हिम्मत की आखिर मैने रजिस्टर  पर हस्ताक्षर कर दिए आखिर मुझे सफलता मिल ही गयी मै  खुश हो गयी । मैबादमे ने जब सलाखों से बाहर निकलने की कौशिश की तो पता चला इस कौशिश में मैने  अपना सर ही उन सलांखो के बीच में फंसा लिया हे ।
        मेने अपना सर उसमे से निकलने की कौशिश करनी शुरू कर दी पर में जितना सर बाहर निकालने की कौशिश कर रही थी उतना ही फंसता जा रहा था । हम सब की हवाईंया उड़ गयी इस बात की तो किसी ने उम्मीद ही नहीं की थी ऐसा भी हो सकता है । मै  भविष्य की कल्पना करके और भी घबरा रही थी कि  में कैसे निकल पाऊँगी । क्लर्क दोनों लड़के थे वो भी नहीं समझ पा  रहे थे कि  वो क्या करे । वो मुझे छू भी नहीं सकते थे । इस समय कॉलेज में बहुत कम लोग थे उस तरफ तो हम चारो के आलावा कोई और नहीं था ।
       अंत में मेरी कौशिश रंग लायी और में उस सलाखों से आजाद हो गयी । में कमरे से बाहर निकली तो लगा इस बात को लेकर मेरा बहुत मजाक बनेगा । मेने ऐसा जाहिर ही नहीं होने दिया कि कुछ अजूबा हुआ हे क्योंकि दोनों क्लर्क भी ज्यादा बड़ी उम्र के नहीं थे । मै कमरे से बाहर  आकर इस तरह हँसी  जैसे ये मेरे साथ न होकर किसी और के साथ हुआ हे  लेकिन में बाहर  निकल कर भी बहुत घबराई हुए थी ।  इतने सालो बाद आज भी  ये बाते  याद करके हंसी आ जाती हे । बाद में ये मामला ऊपर पहुंचा और वो रेलिंग हटवा दी गयी अब वो कमरा  भी सामान्य कमरो जैसा बनवा दिया गया । फिर कोई भी इस मुसीबत में नहीं फंसा । मेरी बात भी मजाक बनने से बुच गयी । 

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