कन्याकुमारी में तैयार होकर जब हम बाहर निकले छत पर ऐसा लग रहा था मानो कोई गिला पोछा लगा कर गया हे । हम बहुत हैरान हुए इतनी सुबह सफाई कौन कर गया हे । कही गन्दगी नहीं थी ।
वहाँ कई मंदिर ऐसे हे जहाँ साडी पहनना जरुरी हे । रास्ते में औरते प्लास्टिक के मटके लेकर जा रही थी इससे पहले मेने ऐसे मटके नहीं देखे थे ।
हम गर्मियों में १३ दिन के सफर पर गए थे । वहाँ गर्मी बहुत ज्यादा थी ।
कन्याकुमारी से रामेश्वरम के लिए बस ली । बस का सफर १० घंटे का था । रात के समय पहुचने पर कुछ आस पास का पता नहीं चल रहा था । अगले दिन सुबह हमने भव्य मंदिर देखा । मनमोहक मंदिर को देखकर अच्छा लगा । दक्षिण के मंदिरो में टिकिट लगती हे ।
वहाँ कई मंदिर ऐसे हे जहाँ साडी पहनना जरुरी हे । रास्ते में औरते प्लास्टिक के मटके लेकर जा रही थी इससे पहले मेने ऐसे मटके नहीं देखे थे ।
हम गर्मियों में १३ दिन के सफर पर गए थे । वहाँ गर्मी बहुत ज्यादा थी ।
कन्याकुमारी से रामेश्वरम के लिए बस ली । बस का सफर १० घंटे का था । रात के समय पहुचने पर कुछ आस पास का पता नहीं चल रहा था । अगले दिन सुबह हमने भव्य मंदिर देखा । मनमोहक मंदिर को देखकर अच्छा लगा । दक्षिण के मंदिरो में टिकिट लगती हे ।
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