ma ka dukh

एक माँ के लिए मानसिक रोगी बच्चे को पालना  बहुत कठिन होता हे । ये बात उनके पास रहने बाले लोग ही  जान पाते हे । बहुत समय पहले एक  मानसिक रोगी लड़की को जब देखा तब में काफी छोटी थी। उसके माँ और पिता अद्यापक  थे । माँ सुबह के समय नौकरी पर जाती थी सुबह पिता उसकी देखभाल करते थे । दोपहर को माँ आ जाती थी । तब पिता काम पर जाते थे । इसी तरह उनकी जिंदगी बीत  रही थी । वो उसे किसी के भरोसे नहीं छोड़ पाते  थे ।
      बचपन में उस का   पोलियो के कारन आधा शरीर बेकार हो गया था । उसे अपने शरीर  और दिमाग पर नियंत्रण नहीं था । वे अपनी बेटी को किसी के पास नहीं छोड़ पाते थे । वह अपनी बेसिक जरुरतो के लिए भी बड़ो पर निर्भर थी ।  वह अजीव तरह से बोलती थी । जो हमें समझ नहीं आता था । उनका दुःख उस समय तो समझ नहीं पाती  थी । १३ साल की उम्र  में वह बीमार हो गयी । जब तक बीमारी समझ में आती उसका देहांत हो गया ।
      पुलिस के अनुसार अभिभावकों ने उसे जहर दिया था । पर उसके अभिभाबको  का त्याग मेने देखा था । वो दिनरात बेटी के साथ रहकर उसकी देखभाल करते थे ।   इस इल्जाम के कारन वो रो भी नहीं पा  रहे थे \बाद में पता चला उसके पेट में अपेंडिक्स की थेली  फट गयी । वह सही समय पर बता नहीं पाई उसे क्या हुआ हे ॥ जब तक पता चला उसके शरीर में जहर फेल चूका था ।उसकी मौत  हो गयी आज भी मुझे वो परिवार और उसकी दास्ताँ सोचने पर मजबूर कर देती हे । इक लड़की की मौत परिवार को जेल के सीखचों  तक पंहुचा सकती हे । उनका एक बेटा  सुनील हे । बेटी की मौत के बाद उन्होंने अब दूसरा बच्चा बुलाया । एक बेटी हुई जिसका नाम सीमा रखा हे अब उनका जीवन खुशियो से भरा हे । 

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