sadhna

कामना ने अपनी जिंदगी से समझोता कर लिया था । लेकिन उसके मायके वाले और ससुराल वाले दोनों चाहते थे वो किसी पर निर्भर ना  रहे उसकी पढ़ाई  तो इतनी थी की उसे अच्छी जगह नौकरी मिल जाए । सभी उसकी भलाई के विषय में सोचते रहते थे । उन्ही दिनों दिल्ली में सरकारी नौकरी निकली । उनके भाई ने उनसे सारे कागजो पर दस्तखत करवा कर फार्म भर दिया । उसे पता भी नहीं चला और फार्म भर कर जमा हो गया । परीक्षा की तारीख जब आ  गयी तब भाई ने बताया ,तेरा रोल नंबर आ गया हे और उसे पढ़ाई  के लिए अपने साथ ले आया । दिल्ली आकर सही ढंग  से प्रतियोगिता की तैयारी में लग गई । उसकी मेहनत  रंग लाई । वो सरकारी विद्यालय में अद्यापिका  लग गयी ।
             अब वह भाई के घर में रहने लगी क्योकि भाई के घर के पास विद्यालय था इसलिए उसे आने -जाने में कोई दिक्कत नहीं आती थी । अब उसके बच्चे यहाँ के माहोल में डल  गए थे । उसके बच्चो को अच्छी शिक्षा मिल रही थी । उसका आधा दिन विद्यालय में और बाकी  समय बच्चो और घर की देखभाल में बीत   जाता था । अब भी उसका पढ़ाई से मोहभंग नहीं हुआ था । उसने एम, ए, की पढ़ाई  शुरू कर दी । बच्चों  की पडाई के  साथ -साथ उसकी पढ़ाई भी  चल रही थी ।
        ससुराल में देवर शेखर की शादी अच्छी लड़की से हो गयी थी । उसकी गृहस्थी बस गयी थी । कामना के ससुराल वाले भी उसकी नौकरी लग जाने से खुश थे । कामना में नया आत्मविश्वास आने लगा हे वह भलभाँति सारी  जिम्मेदारी निभा रही हे । पर नम्रता ने आज भी उसका दामन  नहीं छोड़ा हे । उसके जीवन से जो हंसी गायब हो गयी थी वह धीरे -धीरे वापस आने लगी हे । उसके बच्चे विवेक और विवान भी अच्छे नंबर लाते  हे । जिस भाई के साथ कामना रहती हे वह भाई डॉक्टर हे । उसके बेटे मामा  की तरह डॉक्टर बनना चाहते हे ।  कामना की उन्नति हो गयी हे । उसके बच्चे बहुत मेहनत  करते हे । शायद उनका डॉक्टर बनने का सपना भगवान  पूरा कर दे । उसकी साधना अब पूरी होती दिखाई दे रही हे । उसका पूरा जीवन त्याग और तपस्या की जीती जागती कहानी बन गया है ।
       

parivar

कामना पति की अंतिम क्रिया के बाद ससुराल  में आकर रहने लगी । उस घर में सास -ससुर ,दादी सास -दादा ससुर,चाचा जी का परिवार ,ताया जी का परिवार ,और नन्द ,देवर रहते थे । उसके पति सभी के दुलारे थे । बड़े लोग रमेश की मौत के सदमे से उबर नहीं पा  रहे थे । उनका लाडला उन्हें छोड़कर क्यों चला गया । वे सब  सदमे में थे । उसके ससुर कामना और रमेश पर पाबंदी लगाते थे । वे हर समय अपने को दोष देते रहते थे । हमेशा यही कहते -"यदि मेने इतनी सख्ती न बरती होती तो रमेश आज मेरे पास  होता । इस तरह मुझे छोड़कर नहीं जाता । " उन्हें कैसे समझाते जाने वाले को कौन रोक सकता है । वह तो खुद अपने परिवार से बहुत प्यार करते थे । वो किसी से दूर नही जाना चाहते थे ।
       रमेश की मौत के बाद उस साल परिवार में पांच और लोगो की मौत हुई । वे रमेश के सदमे से बाहर नहीं निकल पा  रहे थे । कोई तसल्ली काम नहीं आ रही थी । कोई शव्द दिलासा नहीं दिला  पा रहे थे । ऐसा लगता था उस परिवार को किसी की नजर लग गयी है । भरा पूरा परिवार खाली  हो गया था । हर तरफ एक चुप्पी छा  गयी थी ।
       अब उसके ससुर जी ने देवर शेखर से कामना की शादी करने की बात सबके सामने रखी । सब  ना नुकुर के बाद इस शादी के लिए तैयार हो गए । कामना इस शादी के लिए तैयार नहीं हुई । वह रमेश को बहुत प्यार करती थी उसे भूलना उसके लिए बहुत मुश्किल  था । वह रमेश की मौत से बहुत डर  गयी थी । कामना रमेश की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार मानने लगी थी । सभी लोग उसकी छोटी उम्र  और छोटे दो बच्चो को लेकर फ़िक्र मंद थे ।
       कामना उन लड़कियों में थी जो कभी किसी काम के लिए ना  नहीं कहती थी । इतने बड़े परिवार की जरूरते पूरी करना आसान नहीं होता । मेने एक दिन उससे पूछा -"जब तुम बीमार पड़ जाती थी तब क्या करती थी । " उसका जबाब सूनकर  में हैरान हो गयी । कामना ने कहा - " जब मुझसे उठा नहीं जाता था में लेट  जाती थी । सबको पता था में तभी लेटती हु जब बीमार होती हु कोई भी मुझसे काम के लिए नहीं कहता था सब काम कर लेते थे । " इसी तरह दिन गुजरते जा रहे थे । धीरे -धीरे कामना परिपक्व होती जा रही थी । समय अपनी गति से चला जा रहा था । 

funsi

कामना के दोनों बच्चो में दो साल का अंतर है ।बड़े बेटे का नाम विवेक और छोटे का नाम विवान रखा ।  दोनों भाई बड़े प्यार से रहते थे उनपर माँ -पिता न्योछावर थे देखने  में बहुत प्यारे और भोले भाले थे । उनकी शरारतो पर कामना और रमेश कुर्बान होते थे । अभी विवेक और विवान कुछ ही सालो के हुए उनके पिता जी को एक फुंसी हुई उन्होंने इस को इतना महत्त्व नहीं दिया । आस -पास इलाज करवाया पर असर नहीं हो रहा था।  उन्होंने वड़े शहर में दिखाया उनका एक ऑपरेशन करने के लिए डॉक्टर ने कहा । उन्हें ये इतना बड़ा नहीं लगा । रमेश ऑपरेशन के लिए तैयार हो गए ।
        कामना को रमेश ने जब ऑपरेशन के बारे में बताया उसे भी ये इतनी बड़ी बात नहीं लगी । क्योंकि एक फुंसी का ऑपरेशन होना किसी को भी बड़ा नहीं लगता । जिस दिन रमेश का ऑपरेशन होना था कामना ने अपने देवर शेखर को मदद के लिए बुला लिया था । दोनों रमेश के पास थे डॉक्टर रमेश को जब अंदर स्ट्रेचर पर ले जा रहे थे । रमेश ने कामना का हाथ पकड़ लिया । कामना को अजीव लगा, साथ ही   रमेश को ऑपरेशन से डर लग रहा हैयह सोच  वह हंसती हुई बोली -"चिंता मत करो ,तुम जल्दी ऑपरेशन कराके आ  जाओगे । फुंसी का  ऑपरेशन कोई इतना बड़ा नहीं होता ।"रमेश के अंदर बैचेनी थी जिसे कामना नहीं समझ पा  रही थी । रमेश भी शब्दों में व्यक्त नही कर पा  रहे थे । उनको अंदर ले जाया गया । कामना रमेश का बाहर इंतजार कर रही थी उसे पूरी उम्मीद थी रमेश ख़ुशऔर स्वस्थ बाहर  आयेगे ।
         कालगति ने कुछ और ही सोच रखा था । ऑपरेशन थिएटर से रमेश नहीं उनकी लाश ही बाहर आयी । किसी को रमेश की मौत पर यकीन नहीं आ  रहा था । कामना रोते -रोते बेहाल हुई जा रही थी ।उसके मुँह  से एक ही शब्द निकल रहा था "मुझे पता होता की आप वापस नही आओगे में कभी ऑपशन के लिए हा नहीं कहती।  "कामना रोते -रोते  बेसुध हुई  जा रही थी ।
        कामना की उम्र अभी सिर्फ २५ साल थी । शहरो में लडकिया इस उम्र में घर बसाने के बारे में सोचती है उस उम्र में उसका भगवान ने  सब  छीन लिया । कामना के लिए सब्र करना मुश्किल  हो रहा था । कई बार लगता हे भगवान  से कामना की खुशिया देखी  नहीं गयी इसलिए रमेश को अपने पास बुला लिया । इस घटना के बरसो बाद भी उसे नहीं पता चला  कि  उसके पति का ऑपरेशन किस का हुआ था । क्योंकि फुंसी का इलाज ऐसा मुश्किल  नहीं हो सकता कि इंसान की जान ही चली जाए ये प्रश्न आज भी  उलझा हुआ है । 

padai

जिंदगी में बहुत सीधी लडकिया भी होती है । जिन्हे देखकर हैरानी होती है ।  ऐसी ही  कामना नामक लड़की मेरे जीवन में आई । उसके मुह से किसी की बुराई मेने कभी नहीं सुनी । कभी भी दुनिया में किसी को न कहते हुए  सुना । उसका विवाह बहुत बड़े परिवार में हो गया था । उस समय कामना की उम्र  बहुत छोटी थी । उसके पति दूर शहर में नौकरी करते थे । वे कभी - कभी आते थे । बड़े परिवार के कुछ नियम होते है । उनका उन्हें पालन करना  पड़ता था । उसके ससुर  जी बहुत सख्त किस्म के इंसान थे । वे कामना की पढ़ाई  पर  बहुत जोर देते थे । इसीलिए उसे पति के साथ दूसरे शहर भी नहीं जाने देते थे । जब उसके पति आते थे उनपर कई तरह की पावंदी लगा देते थे । वे उसका विरोध करते थे । पर पिताजी अपना व्यव्हार बदलने के लिए बिलकुल तैयार नहीं होते थे ।
          अब कामना बी . एड  की पढ़ाई कर रही थी । इस पढ़ाई  के लिए  कामना को दूसरे शहर जाना पड़ता था । उसके ससुर जी जब  कामना और रमेश को  एक ही समय घर से निकलना होता तब भी दोनों को एक साथ नहीं जाने देते थे । कामना को पहले घर से जाने के लिए कहते उसके आधे घंटे बाद उसके पति को घर से जाने देते । मुझे सुनकर हैरानी हुई । मैंने पूछा इससे क्या फायदा होता था । कामना ने बताया "- यदि रमेश पहले घर से निकलते तो वो किसी जगह रूककर उसके आने का इंतजार करते । और उसे कॉलेज नहीं जाने देते । कही और ले जाते उसकी पढ़ाई में बाधा  आती ।" यदि वह पहले बाहर  जाती ओरतो को घर से बाहर रूककर इंतजार करने की आदत नहीं होती ।  इसलिए  उसके ससुरजी हमेशा कामना को ही पहले घर से जाने देते फिर रमेश को निकलने देते । रमेश हमेशा कामना को कही रूककर इंतजार करने के लिए कहते  पर उसे राह  में रूककर इंतजार करने में शर्म आती  थी वह कभी भी नहीं रुकी इस बात पर रमेश उससे बहुत झगड़ा करते थे ।  इस तरह कामना की पढ़ाई  ससुराल में रहते हुए पूरी हो गयी ।    
            अब वह रमेश के साथ शहर में जाकर रहने लगी । इस बीच उसके दो बच्चे  प्यारे  हुए ।    अब वह सुखी जीवन का सुख उठा रही थी । 

ganji ladki

मुझे आज भी लड़कियों  की हालत देखकर कई बार बहुत हंसी आती  हे आजकल लडकिया लड़को को दोस्त बनाना शान की बात समझती हे चाहे घर का माहोल केसा भी हो आज में ऐसी एक लड़की रेशमा के बारे में अपना अनुभव बताना चाहती हु । एक दिन मेने एक लड़की को सर पर एक कपडा बांधे  देखा जैसे अरबी लोग बांधते हे मुझे लगा इसके सर में कोई बीमारी हो गयी है  तभी इसने इस तरह से सर ढका  हे । मेने ज्यादा ध्यान नहीं दिया । क्योकि कई बच्चो को त्वचा की बीमारी हो जाती हे ।
       अगले दिन एक साथी ने बताया रेशमा को देखकर केसा लग रहा हे । मेने कहा बहुत अजीव लग रही हे पूछने पर बीमारी बताई हे । उसने कहा -" ये झूठ बोल रही है ।" इसकी सहेलियों ने बताया हे -"इसके पापा काफी सख्त हे ये लड़को के साथ बात करती हुई इसके पिताजी को दिखाई दी । उन्होंने इसे इस तरह से दोस्ती करने से मना  किया पर ये नहीं मानी । "
      कई बार इसे समझाने की कौशिश की  ।इस पर कोई असर नहीं हुआ । कल इसे पापा ने फिर किसी लड़के से बात करते देख लिया उन्हें इतना गुस्सा आया कि  उन्होंने उसी वक्त इसके सारे बाल  कटवा कर गंजी करवा दिया । पापा बोले देखता हु -" कौन गंजी लड़की को अपनी दोस्त बनाता है । और अपनी बाइक पर  घूमता हे ।"हमें सुनकर बहुत हंसी आई पापा का कहना भी सच हे कोई भी लड़का किसी गंजी लड़की के साथ घूमना पसंद नहीं करेगा ।
     ऐसी लडकिया यदि घर बालो का कहना नहीं मानती तो उनके पिता कोई भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटते ।

trasadi

मेरा सामना रैना से हुआ में उसे देखती ही रह गयी वह बहुत सुन्दर लड़की हे गोरी लम्बे बालो बाली , आजकल इतने लम्बे बाल बहुत कम लड़कियों के होते हे । मुझे उसकी आवाज कुछ अजीब लग रही थी । मेने उसकी आवाज में कुछ शब्दों में तुतलाहट महसूस की उससे इस बारे  में पास बुला कर धीमी आवाज में बात करने की कौशिश की उसे सुनाई नहीं दिया । मेने कुछ और ऊँची आवाज में बात की पर उसे सुनाई नहीं दिया । में नहीं चाहती थी मेरे और उसके बीच की आवाज कोई और सुने । इतने में पास की लड़कियों ने कहा -" ये ऊँचा सुनती हे । " में हैरान हो गयी इतनी सुन्दर लड़की अगर न बोले तो कोई भी उसका दीवाना हो जाए ।
मेने उससे उसकी आवाज से सम्बंधित बात की, इससे पहले भी ऐसे बच्चो की आवाज ,स्पीच थेरेपी के द्वारा ठीक  होते देखी  हे । रैना से इलाज के बारे में बात की ।
       उसने अपने परिवार के बारे में बताया । वो तीन बहने और एक भाई हे । सभी की आवाज में कमी हे मै  सुनकर हैरान रह गई । उसके परिवार में कोई भी सही बोल और सुन नहीं सकता । उसका डॉक्टर से इलाज चल रहा हे । उस डॉक्टर ने सुनने  की मशीन दिलवाने के लिए कहा हे पर उसके परिवार वाले अभी खरीदने की हालत में नहीं हे ।
        रैना की बड़ी बहन की शादी एक गूंगे इंसान से हो गयी हे। कुछ ही दिनों में उसके बड़े भाई की भी शादी होने बाली हे ।  उससे बड़ी बहन बी,ए  कर रही है । रैना  स्कॉलर शिप लेती हे वह पडने में बहुत अच्छी हे । उसे देखकर लगता हे कि इतने अच्छे दिमाग के साथ भगवान  ने उसे ऐसी कमी क्यों दे दी ।
        मेंरा सामना अभी सिर्फ रैना से ही हुआ हे । उसे देखकर मुझे बहुत दुःख हुआ । में उनके अभिभावकों की कल्पना करके सहम जाती हु । उनका दुःख कितना बड़ा हे । चारो बच्चो में एक जैसी कमी हे ।
 मेने एक ऐसे डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी जो उसका बिना पेसो के इलाज कर सकता है । शायद उसकी कमी दूर हो जाए वो ऊँची आवाज में सुन लेती हे , मशीन के द्वारा वो और भी अच्छा  सुन सके । वो डॉक्टर उसकी तुतलाहट  का इलाज भी कर दे । अब वो और उसके अभिभावक कितनी मेहनत  करके उसे सामान्य जिंदगी दिला  पायेगे ।इसका जवाब   वक्त के पास ही हे । 

bachcho ke karname |


  1. बच्चो की नींद भी हैरान कर देती हे मेने अपने बेटे को स्कूल जाने के लिए उठाया पहले तो राजन उठा नहीं । जबरदस्ती उठा  कर उसे टॉयलेट में जाकर बिठा दिया में अपने काम के लग गयी । सुबह घर के काम भी बहुत होते है । कब २० मिनट बीत गए पता ही नहीं चला ।  राजन अभी तक नहीं आया मेने उसे जाकर देखा तो हैरान रह गयी । वह टॉयलेट सीट पर सो रहा था ।  उसे बिलकुल याद नहीं था की सुबह हो गयी । स्कूल भी जाना हे  । 
  2. बच्चो के लिए जिंदगी बहुत मजेदार होती है । राजन टॉयलेट में से आ भी जाए तो भी उसे सम्भालना बहुत मुश्किल होता हे । वह अपनी कछी  को  सही जगह पहनने के स्थान पर सर पर टोपी की तरह पहन कर घूमता हे ।    पुरे दिन उसे सही तरह से काम करवाने में मेरी सारी  ताकत ख़त्म हो जाती है 
  3. रात  के समय राजन को टॉयलेट जाना पड़ा वह बहुत छोटा था मेरी उसके साथ जाने की इच्छा नहीं हो रही थी मेने उसे पलंग से उतार  दिया  खुद जाओ अब बड़े हो गए हो  मेने आँख बंद कर ली क्योंकि मुझे भी बहुत तेज नींद आ रही थी ।  कुछ देर बाद मेने देखा वो पापा के जुते  को पॉट समझ कर बैठा  हे । क्योंकि उसे भी बहुत तेज नींद आ  रही थी । 
  4. बच्चे सारे दिन अपने बड़ो को काम करते देखते हे ,वह वैसा ही करने की कौशिश करते हे एक दोपहर मै  सो रही थी ।जब  सोकर  उठी राजन कही दिखाई नहीं दिया । मैने  उसे टॉयलेट में जाकर देखा वहाँ  वह कुछ कर रहा था । मेने पूछा" यहाँ क्या कर रहा हे ।"राजन बोला - "टट्टी चला रहा हुँ ।"  में हैरान रह गयी वो रसोई में से   चम्म्च   ले आया था । उसी चम्मच का इस्तेमाल हो रहा था । 

ek dastan

अनीता बहुत सुन्दर और लम्बी लड़की थी । उसे जो देखता देखता ही रह जाता था । फ़िल्मी हीरोइन तो कई तरीको से अपने आप को सुन्दर बनाने की कौशीश करती हे पर वो बिना किसी तरह की कौशिश के ही लोगो की आँखों में बस जाती थी । राह चलते  लोग  रुक कर उसे देखने लगते थे । वो बहुत ही हंसी मजाक करती रहती थी ।वह बहुत ही हाजिरजबाब थी । भगवान ने उसे फुर्सत से बनाया था । दूर कही लोगो का झुण्ड हंस रहा होता हमारे मन में आबाज उठती वहाँ अनीता ही होगी ।
         वो तीन बहने थी तीनो हर तरह से काबिल गुणों की किसी में कोई कमी नहीं थी । उसकी शादी जल्दी ही हो गयी थी । पढ़ाई पूरी होते ही उसकी सरकारी नौकरी लग गयी ।  उसे देखते ही लगता कितनी किस्मत वाली हे जिसे जिंदगी में मुश्किलो  का सामना नहीं करना पडा ।  जिस घर में उसकी शादी हुए वो अपने तरीको से उसे चलना चाहते थे । पर उसकी भी अपनी सीमाये होती है ।
       उसे सुबह ७ बजे विद्यालय आना होता था  तब तक दूध वाला नहीं आ पाता था ।
उसके ससुराल में हर चीज ताजी  प्रयोग होती थी रात को सुबह के लिए दूध तक नहीं बचा  सकते थे इसलिए   उसे बिना चाय पिए ही आना पड़ता था । नाश्ते का  तो कोई मतलब ही नहीं था वोविद्यालय में  सुबह ८ बजे तक चाय मंगवा लेती थी हमें तब तक इन सब का कारन नहीं पता था । अधिकतर नाश्ता भी बाहर  से आता  था हमें बहुत अजीव लगता था  पर हमने इन सबके बारे में नहीं सोचा । तब तक उसकी शादी को कुछ ही महीने हुए थे ।
       उसने अपनी पसंद के लड़के से शादी की थी।  पर शादी के बाद इंसान का सही रूप सामने आता  हे । रवि शादी से पहले उसकी हर इच्छा पूरी करने की कौशिश करता था । अब उसके प्रति लापरवाह हो गया था । वह उसकी शिकायत करती तो हम सभी कहते -" ये अपने अब के दुःख से दुखी नहीं पहले के सुख से दुखी हे। " उसकी हर बात का मजाक बना देते । हम उसकी किसी बात की गहराई नहीं समझ पाते ,कुछ समय बाद अनिता कही और चली गयी तब भी हम उस के दर्द को नहीं समझ पाए । वो और उसके पति अलग रहने लगे ।           ससुराल वालो से अलग होने पर कुछ हालत बदले थे पर जिम्मेदारी अनीता की बड  गयी थी क्योंकि हमारे समाज में लड़को का पालन इस तरह से किया जाता हे कि लड़के हमेशा लापरवाह ही बने रहते हे । अनीता सुबह पहले से जल्दी उठ कर घर का सारा काम पूरा करके आती  पर रवि उसके साथ सहयोग करने की जगह सोता रहता । अनीता को बहुत गुस्सा भी आता । लेकिन  रवि  पर कोई असर नहीं होता अनीता भी नाजो से पली थी उसे सबकुछ अजीब लगता।  रवि डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था वह" m .d. "नहीं था इसलिए उसे नौकरी भी नहीं मिल रही थी । सारी  जिम्मेदारी निभाते हुए वह थक गयी थी । रवि मदद करने के लिए तैयार नहीं होता था । शादी के बाद सब कुछ औरत का ही क्यों बदलता हे ,ये प्रशन उसे परेशान करता रहता था ।  सब कौशिश करके वह थक गयी तब वह गुस्से में मायके आ गयी ।
        मायके में वह खुश थी । मायके में सब उसका कुछ न कुछ काम कर देते थे सब का उसे प्यार मिलता था अब उसने रवि को छोड़ने का मन बना लिया । अब रवि का मन बदल गया था वह उसे वापस बुलाना चाहता था पर उसका मन रवि के प्रति ख़राब हो चूका था । उसने अपना गर्भपात भी करवा लिया ।  कुछ समय बाद वह रवि से अलग रहने लगी । एक साल में ही सब कुछ समाप्त हो गया ।  हमे सब बहुत अलग लग रहा था । उसने तलाक लेने से पहले अपना स्थानांतरण करवा लिया था । इसलिए उसे समझाने का मौका भी नहीं मिल पाया
      बहुत समय बाद हमने सुना उसनेसुनील से  दूसरी शादी कर ली । उसका पति सहयोग पूर्ण ब्यबहार  करता था अब उसका जीवन खुशियो से भरा था । लेकिन स्वास्थ्य अब उसका साथ नहीं दे रहा था जब भी सुनते उसकी एक नई  बीमारी के बारे में पता चलता , उसे थायरॉइड  ,त्वचा 'की बीमारी हो गयी । उसके सुन्दर शरीर पर कई ऑपरेशन के निशान दिखने लगे । उसका सुन्दर शरीर भी देखने लायक नहीं रहा । जितनी भी बीमारी उसे लगी सभी लाइलाज थी । जब हमने  सुना  हैरान रह गए की उसका देहांत हो गया । हमे यकींन नहीं आ  रहा । उसकी उम्र केवल ३४  साल थी ।
        जिसके खुशहाल जीवन को देखकर लोगो को रश्क  होता था उसका जीवन इतना दुखो से भरा होगा किसने इस बात की कल्पना की होगी । सब कुछ भगवान ने उसे जल्दी दे दिया और जीवन भी जल्दी छीन भी लिया । 

salankhe or sar

मेरा क्लास में अभी प्रवेश हुए एक सप्ताह हुआ था हम अभी कॉलेज को जानने की कौशिश कर रहे थे । मेरा प्रवेश अपने शहर से दूर हुआ था । सब कुछ नया लग रहा था । मेरी २ सहेली बन गयी थी । मै उनके साथ घूम रही थी । इतने में मुझे ऑफिस से बुलावा आया । इतने में एक ने कहा मुझे जाना है । वह चली गयी । मै  और कमला ऑफिस की तरफ चल पड़ी । हमारे ऑफिस में एक कमरे के बीच में दो क्लर्क बैठे हुए थे । दोनो  क्लर्क और हमारे बीच में एक खड़ी सलाखों की रैलिंग  जैसी चीज लगी हुई थी । वहाँ  उनसे बात करना तो बहुत आसान था । लेकिन उन्होंने   एक कागज पर मुझे हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया था ।
         मुझे लगा ये काम बहुत आसान है ,मैने हाथ अपना आगे बढ़ाया पर मेरा हाथ रजिस्टर तक नहीं पहुंच पा रहा था । रेल्लिंग के अंदर मेज और मेरे बीच में  क्लर्क की कुर्सी भी थी । उस हिसाब से मेरा हाथ छोटा पड रहा था । मै  पूरी कौशिश कर रही थी कि किसी तरह मेरा हाथ उस रजिस्टर तक पहुंच जाए पर मै  सफल नहीं हो पा  रही थी । मुझे समझ नहीं आ  रहा था कि  मेरा हाथ इतना छोटा क्यों रह गया क्योंकि में सामान्य कद की लड़की कहलाती हूँ ।
        मैने अपनी पूरी कौशिश करनी शुरू  कर दी कुछ उन्होंने अपना रजिस्टर आगे किया और कुछ मैने हिम्मत की आखिर मैने रजिस्टर  पर हस्ताक्षर कर दिए आखिर मुझे सफलता मिल ही गयी मै  खुश हो गयी । मैबादमे ने जब सलाखों से बाहर निकलने की कौशिश की तो पता चला इस कौशिश में मैने  अपना सर ही उन सलांखो के बीच में फंसा लिया हे ।
        मेने अपना सर उसमे से निकलने की कौशिश करनी शुरू कर दी पर में जितना सर बाहर निकालने की कौशिश कर रही थी उतना ही फंसता जा रहा था । हम सब की हवाईंया उड़ गयी इस बात की तो किसी ने उम्मीद ही नहीं की थी ऐसा भी हो सकता है । मै  भविष्य की कल्पना करके और भी घबरा रही थी कि  में कैसे निकल पाऊँगी । क्लर्क दोनों लड़के थे वो भी नहीं समझ पा  रहे थे कि  वो क्या करे । वो मुझे छू भी नहीं सकते थे । इस समय कॉलेज में बहुत कम लोग थे उस तरफ तो हम चारो के आलावा कोई और नहीं था ।
       अंत में मेरी कौशिश रंग लायी और में उस सलाखों से आजाद हो गयी । में कमरे से बाहर निकली तो लगा इस बात को लेकर मेरा बहुत मजाक बनेगा । मेने ऐसा जाहिर ही नहीं होने दिया कि कुछ अजूबा हुआ हे क्योंकि दोनों क्लर्क भी ज्यादा बड़ी उम्र के नहीं थे । मै कमरे से बाहर  आकर इस तरह हँसी  जैसे ये मेरे साथ न होकर किसी और के साथ हुआ हे  लेकिन में बाहर  निकल कर भी बहुत घबराई हुए थी ।  इतने सालो बाद आज भी  ये बाते  याद करके हंसी आ जाती हे । बाद में ये मामला ऊपर पहुंचा और वो रेलिंग हटवा दी गयी अब वो कमरा  भी सामान्य कमरो जैसा बनवा दिया गया । फिर कोई भी इस मुसीबत में नहीं फंसा । मेरी बात भी मजाक बनने से बुच गयी । 

radha

शैलजा छोटी उम्र मे  ही परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने लगी थी । उसके पिताजी परिवार के प्रति काफी लापरवाह थे । उसकी माँ ने अपना परिवार बहुत मुश्किल से चलाया  अब बच्चे बड़े हो रहे थे उनकी शादी की चिंता उन्हें दिन रात सताती रहती थी दो बेटियो की शादी कैसे होगी । पर उसके पिताजी  पर कोई असर नहीं हो रहा था । वह इस गम में घुलती जा रही थी । राधा से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती थी क्योंकि वह बहुत सीधी थी ।
         शैलजा ने अपनी माँ के दुःख को समझा और नौकरी करने लगी । धीरे -धीरे पैसा जुड़ने लगा । कुछ सालो लगातार मेहनत करके उन्होने पैसे इकट्ठे किये । बहन की शादी कर दी गयी । बहन ससुराल में खुशहाल  जीवन जी रही थी । सभी खुश थे । लेकिन भगवान से उसका सुख देखा न गया । उसे बुखार आ गया उसका इलाज चल रहा था डॉक्टर अभी उसकी बीमारी को समझने की कौशिश ही कर रहे थे  कि मृत्यु ने उसे आ घेरा । वह सभी को रुलाती हुई  इस दुनिया से चली गयी ।
           जिस परिवार में दो बच्चे  हो उन में से एक इस तरह छोटी उम्र में ही चला जाए उस माँ को कैसे सब्र आ सकता हे । वह दुःख के अथाह सागर में डूब गयी । उन्हें किसी चीज की सुध नहीं रहती थी ।  सुनी आँखों से रास्ते को निहारती रहती थी कि शायद राधा अभी आ  जाएगी ।
          धीरे -धीरे हालत बदलने लगे । उन्होंने जिंदगी से समझोता कर लिया वो शैलजा के प्रति जिम्मेदारी समझने लगी  । शैलजा फिर से घर और बाहर की जिम्मेदारी उठाने लगी । उसे फिर से पैसे जोड़ने थे । उसकी सारी मेहनत  काल के मुख में चली गयी थी । जब तक पैसे जुड़े काफी साल गुजर गए । अब शादी की तैयारिया शुरू हुई । इन सबके बीच शैलजा की उम्र ३४ साल हो गयी थी । उस समय लड़कियों की शादी २० से २४ साल के बीच हो जाया करती थी । इस ;लिहाज से उसको काफी समय लग गया था ।
       कई बार में सोचती हु की राधा का कोई कर्ज शैलजा पर था जो उसने इस तरह से  चुकाया । नहीं तो शादी के २ सालो के अंदर ही उसकी मौत क्यों हो जाती । इस बीच राधा का कोई बच्चा भी नही हुआ । उसके जीजाजी ने कुछ समय बाद किसी और से शादी कर ली । अब वो लोग उस दूसरी औरत को अपने घर बुला कर राधा की तरह ही ब्यवहार करते है ।
      मेने एक बार शैलजा से पूछा । कुछ अजीब नहीं लगता इन्हे इस तरह हर जगह सम्मान देना । उसका जबाब सुनकर में हैरान रह गयी जब उसने कहा -"हमारा परिवार हे ही कितना जो हम इन्हे नकार दे । " उसके शब्दों की गहराई मुझे आज भी झकझोर जाती है । 

bus ka safar

में और शैलजा बचपन से एक ही विद्यालय में पढे थे  ।मै  बचपन में  बहुत शरारती थी । वह एकदम सीधी थी । बचपन के दिन कब बीत गए पता ही नहीं चला ।  उसके पिता जी  लकड़ी का काम करते थे ।  वो दो बहने थी बड़ी बहन राधा बहुत डरपोक और दुनिया से अनजान थी । उसे घर से बाहर जाकर कुछ काम करते भी मैंने कभी नहीं देखा । इतनी सीधी लड़की की कल्पना करना भी आसान नहीं हे । 
      एक दिन उसे घर से बाहर बस का सफर करना पड़ा । एक तो पहले जिंदगी में उसने बस में कभी सफर नहीं किया ।  उसे हमारे साथ जाते हुए बहुत डर  लग रहा था । हम सब उसकी हिम्मत बड़ा रहे थे  कि  दिल्ली में बस का सफर करना मुश्किल नहीं हे । हम तो रोज ही सफर करते हे किसी तरह वह हमारे साथ चलने के लिए तैयार हो गयी । 
      उन दिनों बस में सफर करना आसान नहीं होता था । दिल्ली की बस में बहुत ही ज्यादा भीड़ रहती थी उसमे चढ़ना और उतरना बहुत मुश्किल  होता था । हमें तो आदत पड़  गयी थी इसलिए हमे फरक नहीं पड़ता था । बस में चढ़ने बालो की भीड़ देखकर पहले ही उसकी हिम्मत जबाब दे गयी उसने साफ मन कर दिया में नहीं चलूंगी पर बार - बार मिन्नते करने पर वो बस में चलने को तैयार हो गयी । अबकी बार  कम भरी  बस आई । किसी तरह वह बस में चढ़ पाई । हमे लगा अब सफ़र आसानी से कट जाएगा । बस में हमे  बैठने की जगह नहीं मिली । हमें कोई फर्क नहीं पड़ा पर वो और भी ज्यादा घबरा गयी । वो सुरक्षा के लिहाज से  एक बुड्ढे इंसान के पास बाली सीट पर जाकर खड़ी हो गयी । राधा बहुत घबरा रही थी । पर हम सोच रहे थे इसी तरह उसकी धीरे धीरे घबराहट दूर होगी । 
           अचानक चालक ने बस को ब्रेक लगा दी वह अपने आप को संभाल  नहीं पाई और उस बुड्ढ़े  आदमी की गॉद  में जाकर गिर गयी वह बहुत बुड्ढ़ा  था । उस आदमी को बहुत गुस्सा आया । राधा शरमाई और घबराई उठ खड़ी हुई ।  उस आदमी का गुस्सा शांत नहीं हुआ वह पूरे  समय उटपटांग राधा के लिए बोलता रहा।  राधा की हालत देखकर हमने उस बुड्ढे को  समझाने  की बहुत  कौशिश की । लेकिन उस पर कोई असर नहीं । राधा रोने लगी । पर उस बुड्ढे का बोलना बंद नहीं हुआ । 
          राधा की हालत देखकर हम बस से पहले ही उतर गए । इस हादसे के बाद राधा  ने  जिंदगी में कभी बस में  सफर नहीं किया । आज भी उस दिन को याद करके हमारी हंसी रोके नहीं रूकती । बाद में हमने राधा का बहुत मजाक बनाया "तुझे गिरने के लिए और कोई नहीं मिला और खड़ी हो सुरक्षित स्थान पर जाकर ।"इसे सुनकर राधा और भी शर्मा जाती थी । 
          

abhishap

मेरी एक सहेली रीना थी । उसके घर की हालत सही नहीं थी ।उस परिबार में अजीब सा अभिशाप चला आ रहा था । जिसे सुनकर मुझे यक़ीन  नहीं आ रहा था । सब कुछ अन्धविश्वास लग रहा था । उसके पिता नहीं थे । छोटी उम्र में ही उनका निधन हो गया था । उनकी माँ ने ही उनकी देखभाल की थी ।  वो ६ बहने थी । रीना बहनो में पांचबी  थी । उसकी ४ बहनो की शादी हुई चारो ही शादी के कुछ समय बाद विधवा हो गयी थी उस घर में पांच विधवा रहती थी । अब उसकी  भी शादी की उम्र हो रही थी पर उसका शादी का इरादा नहीं था । बो कहती थी "जब मेरी चारो बहने विधवा हो गयी तो मेरे साथ भी ऐसा ही होगा । " हम उसे हमेशा समझाते थे कि  ये तेरा वहम  हे ऐसा नहीं होगा ।
           कुछ समय बाद मेरी शादी हो गयी । मेरा उससे मिलना नहीं हुआ । काफी सालो बाद एक समारोह में उससे मिली । उसके आलावा और भी सहेलिया आई हुई  थी । उनसे पता चला इसने अपनी शादी नहीं कि  अपने से छोटी बहन की शादी एक अच्छे इंसान से करवा दी हे । हमें बहुत हैरानी हुई ।  उसे फिर से समझाया कि अब तू भी शादी कर ले । तेरी बहन भी खुशहाल जिंदगी जी रही हे अब तुम्हारे परिबार से अभिशाप ख़त्म हो गया हे ।
       शायद उसे हमारी बात समझ आ गयी । वो शादी के लिए तैयार हो गयी । बहुत साल बाद रीना से मिलना हुआ । हम सुन कर  हैरान हो गए कि  उसकी छोटी बहन भी विधवा हो चुकी हे । कभी -कभी लगता हे कि भगवान का गुस्सा कितना विकराल होता हे कि  एक ही घर की ६ औरतो को विधवा बना कर भी शांत नहीं होता ।
      रीना हमारी बात मानकर शादी कर चुकी थी । भगवान  से यही प्रार्थना  हे कि उसके परिवार के अभिशाप  का उसके विवाहित जीवन पर असर न पड़े । अब भगवान का गुस्सा शांत हो जाये । रीना एक खुशहाल जीवन जिए  इतने बड़े परिवार का ये सहारा भगवान  बनाये रखे । कभी लगता हे कि  पिछले जन्म में उस परिवार के लोगो ने क्या बुरा किया था जो उन्हें इतना सहन करना पड़ रहा  हे । मुझे लगता हे कि रीना खुशहाल विवाहित जीवन जी रही होगी । 

shararat


  1. में अपने रिश्तेदार के घर अपने बेटे को लेकर गयी वहाँ  हमे  बहुत अच्छा लग रहा था । बेटा बहुत खुश था । वो बच्चो के साथ खेल रहा था । हम सभी बहुत खुश थे । कोई एक दूसरे से दूर नहीं होना चाहता था । पर हमें घर भी लोटना होता हे । शाम के समय हम लौटने के लिए तैयार हुए ।  उन्होंने बेटे को चलते समय कुछ  पैसे दिए । बेटे ने न कहा । पर रिश्तेदार ने जबरदस्ती उसके हाथ में पैसे रख दिए । बेटा  गुस्से से भर गया । बोला - " में भीख नहीं लेता" । हम सुनकर हैरान रह गए । उसे बहुत समझाने  के कौशिश की पर वह नहीं माना । वह प्यार और भीख  में अंतर नहीं कर पा  रहा था । 
  2. में  अपनी बहन के घर गई वहाँ  काफी लोग आये हुए थे । बहुत मजा आ रहा था बहुत बातें  हो रही थी ।  एक भतीजे की बेटी   बार -बार हमारे बीच में आकर अपनी बात कहने की कौशिश कर रही थी । वह केवल तीन साल की थी । हमे उसपर  प्यार तो बहुत आ रहा था पर जितना ध्यान वो चाहती थी  उतना उसे नहीं दे पा  रहे थे ।
  3.                कुछ समय बाद जिद करने लगी पापा गोदी ले लो । बातो में उसपर ध्यान नहीं दे पा  रहे थे । वो जोर से कहने लगी पापा गोदी ले लो । मुझे शरारत सूझी । मेने उसके पापा के कंधे पर हाथ रख कर कहा - "ये मेरा बेटा  हे "  । इतना सुनते ही अपनी माँ की गोदी में चढ़ते हुए कहने लगी -"पापा दादी गोदी ले ली "।  हम समझ ही नहीं पा रहे  थे कि  हाथ रखते ही उसने कैसे समझ लिया । कि   उसका स्थान हमने ले लिया । वहाँ  सभी उस बच्चे से बड़े थे । हमारा हसते - हँसते  बुरा हल हो गया ।           

ma ka dukh

एक माँ के लिए मानसिक रोगी बच्चे को पालना  बहुत कठिन होता हे । ये बात उनके पास रहने बाले लोग ही  जान पाते हे । बहुत समय पहले एक  मानसिक रोगी लड़की को जब देखा तब में काफी छोटी थी। उसके माँ और पिता अद्यापक  थे । माँ सुबह के समय नौकरी पर जाती थी सुबह पिता उसकी देखभाल करते थे । दोपहर को माँ आ जाती थी । तब पिता काम पर जाते थे । इसी तरह उनकी जिंदगी बीत  रही थी । वो उसे किसी के भरोसे नहीं छोड़ पाते  थे ।
      बचपन में उस का   पोलियो के कारन आधा शरीर बेकार हो गया था । उसे अपने शरीर  और दिमाग पर नियंत्रण नहीं था । वे अपनी बेटी को किसी के पास नहीं छोड़ पाते थे । वह अपनी बेसिक जरुरतो के लिए भी बड़ो पर निर्भर थी ।  वह अजीव तरह से बोलती थी । जो हमें समझ नहीं आता था । उनका दुःख उस समय तो समझ नहीं पाती  थी । १३ साल की उम्र  में वह बीमार हो गयी । जब तक बीमारी समझ में आती उसका देहांत हो गया ।
      पुलिस के अनुसार अभिभावकों ने उसे जहर दिया था । पर उसके अभिभाबको  का त्याग मेने देखा था । वो दिनरात बेटी के साथ रहकर उसकी देखभाल करते थे ।   इस इल्जाम के कारन वो रो भी नहीं पा  रहे थे \बाद में पता चला उसके पेट में अपेंडिक्स की थेली  फट गयी । वह सही समय पर बता नहीं पाई उसे क्या हुआ हे ॥ जब तक पता चला उसके शरीर में जहर फेल चूका था ।उसकी मौत  हो गयी आज भी मुझे वो परिवार और उसकी दास्ताँ सोचने पर मजबूर कर देती हे । इक लड़की की मौत परिवार को जेल के सीखचों  तक पंहुचा सकती हे । उनका एक बेटा  सुनील हे । बेटी की मौत के बाद उन्होंने अब दूसरा बच्चा बुलाया । एक बेटी हुई जिसका नाम सीमा रखा हे अब उनका जीवन खुशियो से भरा हे । 

maduray

मदुरै  के मंदिर भव्य हे । मुख्य दरवाजा बहुत बड़ा  और रंगबिरंगी देवताओ की मूर्ति से सजा हुआ हे । पहले उसकी सुंदरता देखकर यकीन  ही नहीं आ रहा था कि इतने बड़े गेट को कैसे रंगा जाता हे । सारी  मुर्तिया रंगीन थी । अब पता चला कि  हर १० साल बाद उनको रंग किया जाता हे । मंदिर  के अंदर हर मूर्ति के आगे पुलिस होती थी । हर मूर्ति को जाकर देखने  के लिए अलग टिकट  लेनी पड़ती  थी । यदि कोई मूर्ति नहीं देखना चाहते तो आगे जाना पड़ता था । मंदिर में मुख्या मूर्ति बहुत अंदर जाकर थी । हर तरफ रोशनी होती हे । पर मुख्य मूर्ति  के सामने घी के दीपक जल रहे होते हे । जिसे देखकर हैरानी होती हे । 

kanya kumari


kanyakumari me ek din

कन्याकुमारी  में तैयार होकर जब हम बाहर  निकले छत पर ऐसा लग रहा था मानो कोई गिला पोछा लगा कर गया हे । हम बहुत हैरान हुए इतनी सुबह सफाई कौन कर गया हे । कही गन्दगी नहीं थी ।
  वहाँ  कई मंदिर ऐसे हे जहाँ  साडी पहनना जरुरी हे । रास्ते में औरते प्लास्टिक  के मटके लेकर जा रही थी इससे पहले मेने ऐसे मटके नहीं देखे थे ।
  हम गर्मियों में १३ दिन के सफर पर गए थे । वहाँ  गर्मी बहुत ज्यादा थी ।
कन्याकुमारी से रामेश्वरम के लिए बस ली । बस का सफर १० घंटे का था । रात  के समय पहुचने पर कुछ आस पास का पता नहीं चल रहा था । अगले दिन सुबह हमने भव्य  मंदिर   देखा । मनमोहक मंदिर को देखकर अच्छा लगा । दक्षिण  के मंदिरो  में टिकिट  लगती हे । 

kanya kumari


  1. कन्या कुमारी   हम  रात के समय  पहुंचे । हमें वातावरण का पता नहीं चल पा रहा  था । खाना खाने के बाद जब हम बापस होटल आ रहे थे । हमें चारो और घूमती हुई  रोशनी दिखाई दे रही थी । पर इस रोशनी का कारन समझ नहीं आ रहा था ।  मुझे कुछ लाइट हाउस जैसा लग रहा था पर  मैंने किसी  को ये बात  नहीं बताई । कही मेरा मजाक न बन जाए । हम बापस होटल में आकर सो गए ।
  2.  हमे होटल के दो कमरे  मिले थे । एक कमरा  बहुत बड़ा था दूसरा कुछ छोटा था । एक रसोई भी थी । सब बहुत अच्छा लग रहा  था ।हम सुबह सागर देखने जाएगे ये सोचते हुए हम सो गए । 
  3. अगले दिन सुबह हमारा दरबाजा खटकने  लगा तब हम उठे । हमे बताया खिड़की  के बाहर देखो । जिसे देखने का विचार करते हुए हम रात को सोए थे । वह सागर तो हमारे पास ही था । सागर एक तस्वीर की तरह लग रहा था । काफी समय बाद यकीन आया   । हमारा सपना सच हो गया 

siligudi ki yatra

सिलीगुड़ी  की यात्रा में अच्छा नहीं लगा वहाँ  पर दिल्ली जैसा मौसम था । दार्जलिंग  में बहुत सर्दी लग रही  थी । यहाँ पंखे चल रहे थे । सड़के भी दिल्ली जैसी  थी बाजार में काफी रश था । यहाँ गोलगप्पे का स्वाद अलग था । एक दिन पहले यहाँ भी बारिश हुई थी ।पर कुछ भी ठीक नहीं लग रहा था ।हमने बाजार से नए डिज़ाइन की साडी खरीदी  

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...