#krismas or hinduo ki puja me 8 anter

              क्रिसमस और हिन्दुओ की पूजा में 8  अंतर 

  सभी धर्म हमें ईश्वर से मिलाने में सहायक है। इनके द्वारा हम अध्यात्म से जुड़ जाते है। हमें आत्मिक शांति का अहसास होता है। हिन्दू धर्म काफी पुराना धर्म है। लेकिन हिन्दू धर्म संसार में 4  स्थान पर पहुँच गया है। जबकि ईसाई  धर्म 1 स्थान पर आ गया है। आज में इसके और हिन्दू धर्म के बारे में अपने विचार आपके सामने रखने जा रही हूँ।
  1. हिन्दू धर्म में त्यौहारो  पर अधिकतर व्रत रख कर आत्मशुद्धि की जाती है। पाचनसंस्थान को आराम देने की कोशिश की जाती है।  जबकि इसाई धर्म में किसमस पर  पुरे दिन खाया जाता है। केक की विविधता देखने और खाने लायक होती है। 
  2. हिन्दुओ के त्यौहारो पर शांति होती है जबकि क्रिसमस के दिन मेलेऔर ,नृत्य का आयोजन किया जाता है। 
  3. हिन्दुओ के त्यौहार अधिकतर घर में रहकर मनाये जाते है। जबकि ईसाइयो के त्योहारो को घर से बाहर मनाने का प्रचलन है।  इस दिन अधिकतर लोग मेलो और रिश्तेदारो के घर जाते है। 
  4. हिन्दुओ के त्यौहार के दिन पूजा की जाती है। जबकि क्रिसमस से एक दिन पहले ईसाई लोग चर्च में जाकर पूजा करके आते है। जिसे क्रिसमस इव के नाम से जाना जाता है। ये आधी रात के आस -पास घर पहुँचते है। 
  5. हिन्दुओ के त्योहारो में जो लोग माँसाहारी भी होते है। वे त्योहारो पर विशेष रूप से शाकाहारी भोजन ग्रहण करते है। यहाँ तक कि त्यौहारो पर प्याज और लहसन का भी निषेध होता है। जबकि ईसाई लोग इस दिन विशेष रूप से माँसाहारी भोजन ग्रहण करते है 
  6.  हिन्दुओ के त्यौहारो में देवी-देवताओ की पूजा होती है। जबकि क्रिश्मस पर क्रिसमस ट्री को विशेष रूप से घर में सजाया जाता है।उस पर उपहार लगा दिए जाते है।  
  7. हिन्दुओ के त्योहारो में भगवान से इच्छाओ की पूर्ति की प्रार्थना की जाती है। जबकि ईसाइयो में भगवान के रूप में अभिभावक बच्चो की इच्छाओ की पूर्ति कर देते है। उनके मनचाहे उपहार उनके सिरहाने रखकर उन्हें बताया जाता है। ये सब रात को सांताक्लोज रख कर गए है। काफी समय तक बच्चे इस भ्रम में रहते है। 
हिन्दुओ के त्योहारो में आध्यात्मिकता छायी रहती है। जबकि क्रिसमस के दिन अनेक खेलो का आयोजन किया जाता है। घरो में संगीत और नृत्य किये जाते है। 
       हम त्यौहारो पर ख़ुशी का अहसास करते है। इसके लिए काफी समय से तेयारिया करते है। पूरे दिन घर और बाहर आनन्द का माहौल रहता है। यही जीवंतता की पहचान है.
   यदि आप मेरे विचारो से सहमत है। तो अपने विचार मुझ तक भेजने की कृपा करे। 

#yuvao ke sashktikaran or vikas

                  युवाओ के सशक्तिकरण और विकास 

   
   भारत में युवा शक्ति की बहुलता है। लेकिन उसकी उन्नति के लिए पर्याप्त उपाय नही किये जा सके है। जिसके कारण हमारे युवा भ्रमित हो कर गलत रस्ते पर जा  रहे है।  युवाओ के अनुसार-उनके आगे बढ़ने के उपायो की कमी है।
        भारतीय युवा भारत में ही नही बल्कि संसार में उन्नत स्थान पर पहुंच रहे है। अभी तक भारत की बढ़ती जनसँख्या को इसके लिए दोष दिया जाता रहा है। लेकिन पहली बार प्रधानमंत्री मोदी जी ने युवाओ को ताकत के रूप में देखा है। भारतीय 65 करोड़ युवा यदि मिलकर सही रस्ते पर कदम बढ़ाये तो उनके द्वारा भविष्य बदल सकता है। जैसे कश्मीर में यदि आतंकवादी पैदा होते है। तो वही आईएएस और आईपीएस जैसे युवा भी विपरीत परिस्थिति में अव्वल आकर दिखा रहे है। उनके अंदर देश को बदलने और आगे बढ़ाने का जज्बा है। यह जज्बा सभी में भर कर देश को मजबूत बनाया जा सकता है। 
  1.       हमारी शिक्षा व्यवस्था के अंदर बदलाब किया जाये। उसके लिए सभी को शिक्षा दिलाने की व्यवस्था की जाये। 
  2. निजी विद्यालयों में शिक्षा सही रूप में दी जाती है। लेकिन सरकारी विद्यालयों में कार्यभार, शिक्षा के अतिरिक्त अन्य कार्यो से सम्बंधित होने के कारण, अध्यापक अध्यापन से ज्यादा दूसरे कार्यो में लगे रहते है जिसके कारण, विद्याधियों पर पर्याप्त ध्यान नही दिया जा रहा। उनको दूसरे कार्यो से मुक्त करके केवल छात्रों की उन्नति के कामो में लगाया जाये।
  3. शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जाये। उनसे अभ्यास अधिक करवाया जाये जिससे जिस कार्य को कर रहे है। उसके प्रति विश्वास पैदा हो सके। जो बच्चे प्रौद्योगिकी के स्तर पर पढ़ने के बाबजूद प्रेक्टिकल कार्य करते हुए डरते है। वे शिक्षा पूरी होने के बाबजूद अपने भरोसे कोई कार्य नही कर सकते। उन्हें कोई संस्था रखते हुए डरती है।वे बाहर निकलने पर बेरोजगार के सामान होते है। एक नोकरी की तलाश में भटकते हुए। शिक्षा व्यवस्था पर गुस्सा निकालते हुए।  
  4. शिक्षा के कुछ स्तरों को उद्योग -धंधो से जोड़ा जाये जिससे युवाओ में कार्य से सम्बंधित विश्वास पैदा हो सके। 
  5. आज की शिक्षा युवाओ में आत्मविश्वास पैदा नही कर पा रही है। नोकरी न मिलने के लिए वे व्यवस्था को दोषी ठहराते है। जहाँ उनसे नोकरी के बदले में रिश्वत मांगी जाती है। रिश्वत रूपी भ्रस्टाचार पर कुठाराघात करके उनका मनोबल बढ़ाया जाये। 
  6. उनके अंदर आत्म  विश्वास पैदा किया जाये। ताकि उनमे अपना व्यवसाय खोलने की ललक  पैदा हो सके। 
  7. वे अपने साथ दुसरो को रोजगार दे सकते है। उन्हें सस्ते दामो में कर्ज दिया जाये। सरकारी व्यवधानों से तंग करने की अपेक्षा उन्हें अधिक से अधिक सहूलियत एक ही खिड़की से मिल सके। 
  8. मोदी जी ने स्टार्टअप योजना शुरू की है इससे हो सकता हे युवाओ में नया व्यवसाय खोलने की हिम्मत पैदा हो सके। 
9  गरीब तबके के लोगो को बैंको से आसानी से कर्ज नही मिल रहा। ये लोग डरते हुए बैंको में जाने की हिम्मत जुटाते है। लेकिन उनके साथ उचित व्यवहार नही होता। जिससे दुबारा जाने की हिम्मत नही जुटा पाते। 
10 उनमे स्किल विकास बढ़ाने के प्रयास किये जाये। रोजगार कोई बुरा नही होता यदि उसे कुशलता से किया जा सके।  युवाओ के अंदर नैतिकता और धैर्य की भावना पैदा की जाये ताकि गलत रास्ते पर चलकर पैसा कमाने के बारे में न सोचे।
11  उनके अंदर सहिष्णुता और सदभाव की भावना पैदा की जाये। उनके अंदर बढ़ती आक्रमकता दुसरो का संहार करके, जेल की सलाखों के पीछे धकेल कर, उसका और दुसरो का पूरा जीवन बर्बाद कर देती है।
 12 संचार साधनो से नई जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश की जाये। जैसे किसानों से सम्बंधित जानकारी अधिक से अधिक प्रसारित की जाने से गावो के युवा शहरो में भटकने के स्थान पर गांव में रहकर अपना और गाँव का विकास कर के उन्नत जीवन जी सके।
 १३ युवाओ के अंदर केवल अधिकारों के प्रति सजगता के साथ कर्तव्यों का पालन करने की भावना जागृत की जाये। मांगने के स्थान पर देने का जज्बा पैदा होने से सुंदर संसार बन जायेगा।
 १४ कुछ राज्यो में लेपटॉप ,साईकिल आदि  देकर उन्हें सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह अच्छा कदम है।
 15 गरीब बच्चो  को कई प्रकार की छात्रबृति देकर अनुगृहीत किया जाये।
        मुझे उम्मीद हे हमारा युवा इन उपाय के फलीभूत होने पर राष्ट्र की उन्नति में सहायक होगा।  

#jaylalita


                                     दृढ़ प्रतिज्ञ जयललिता 

   आज मुझे  मुख्यमंत्री जयललिता की  मौत का सदमा लगा  है।  उसका जुझारू व्यक्तित्ब लोगो को देवी का अवतार मानने पर मजबूर करता है। एक दो साल की बच्ची के पिता की मौत ,उनके प्रतिष्ठित परिवार के द्वारा नकार दिया जाना। उनका नानके और मौसी के हाथो पालन -पोषण होना।

       माँ के करीबी होने की इच्छा रखने पर माँ के साथ ना  रह सकना। किसी सदमे से कम नही होता। रात को माँ की साड़ी पकड़ कर सोना।,ताकि माँ के जाने का उसे पता चल जाये। लेकिन माँ का साड़ी बदल कर चले जाना। सुबह माँ के नही मिलने पर उस बच्ची का दर्द मुझे झकझोर देता है। उस माँ की तड़प सोचने पर मजबूर कर देती है। वह पैसे की खातिर, अपनी छोटी सी बच्ची को किस तरह दिल पर पत्थर रख कर जाने पर मजबूर होती होगी। जिस बच्ची ने पिता का प्यार न जाना ,केवल माँ के आँचल की छाह  मिली। वह भी स्थाई नही थी वह अनजाने चेहरो के बीज अपनापन ढूंढती रह जाती होगी। 
      उसे बड़े होने पर भी इस बात का अहसास नही था कि उनके पास पैसे की कमी है। उसे हमेशा लगता था वह अमीर घराने से ताल्लुक रखती है। अमीर घराना उसका दादा का परिवार था। उनका सम्बन्ध राज घराने से था जिसके कारण उनके नाम के आगे" जय "लगाया गया। लेकिन उसके ठाठ -बाट उसके नसीब में नही थे। 
     वह पढ़ने में बहुत अच्छी होने  कारण बहुत पढ़ना चाहती थी लेकिन 1३  साल की उम्र में उसे जबरदस्ती फिल्मो में काम करवाया गया। तब उसे माँ की मजबूरी समझ में आयी। यहाँ उसकी किस्मत चल पड़ी उसकी हर फिल्म हिट होती उसने अपने कॅरियर में १४० फिल्मे की। उसमे 28 फिल्मे" म  ग रामचंद्रन" के साथ की जो उनसे 31 साल बड़े थे। उन्होंने तमिल, तेलगु ,मलयालम ,कन्नड़ ,हिंदी और अंग्रेजी भाषाओ में काम किया। उनकी दो हिंदी फिल्मे मनमौजी और इज्जत बनी। लेकिन हिंदी फिल्मो में इतनी सफलता प्राप्त नही हुई।उन्होंने उस समय के सभी लोकप्रिय अभिनेताओ के साथ काम किया। वे अपने समय में सबसे अधिक पैसे लेने वाली अभिनेत्री थी।  
          उनके जीवन की आरंभिक अवस्था पर माँ का प्रभाव रहा। बाकि जीवन पर रामचंद्रन का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। आरम्भ में उनका जीवन रामचंद्रन के प्रभाव तले पनपा। परोक्ष रूप में उनको रामचंद्रन के साथ रहने का फायदा भी हुआ। उन्ही के सौजन्य से वह राजनीति में आयी। उनके बीच काफी मतभेद भी रहे। एक समय ऐसा आया जब रामचंद्रन उन्हें पार्टी से निकालने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन एक दिन पहले ही उनकी मौत हो गयी। 
        रामचंद्रन की मौत के समय उनके परिवार वाले उनसे नाराज थे। जिसके कारण उन्हें उनकी मौत की सही जानकारी नही दी गयी। जिस दरवाजे से अंदर जाने की कोशिश करती उस दरवाजे को उसके सामने बंद कर दिया जाता। जब वह घर के अंदर पहुँच सकी। तब तक  रामचंद्रन के पार्थिव शरीर को अन्य दरवाजे से बाहर ले जाया जा चुका था। लेकिन उनके दृढ़ निश्चय ने उन्हें उनके पार्थिव शरीर तक पहुँचाया। जहाँ उनके विरोधी उन्हें अनेक तरह से प्रताड़ित कर रहे थे जिससे वह चली जाये। कोई उन्हें चुटकी काटता ,कोई जानबूझ कर पैर कुचल  देता लेकिन वह अपनी अदम्य जिजीविषा के कारण दो दिनों तक लगातार बैठी रही। उनकी शव यात्रा के समय वह साथ न चल सके। उस समय उन्हें धक्का तक देने में गुरेज नही किया गया। आप खुद सोच के देखिये जिस इंसान को उन्होंने अपना सब कुछ समझा ,उसकी अंतिम यात्रा के समय उसे इस तरह दुत्कारा जाना उसके हृदय को किस तरह लहूलुहान कर रहा होगा। 
        उन्होंने जीवन में आये सारे अवरोधों को पार किया और रामचंद्रन की राजनीतिक उत्तराधिकारी बन कर अपने सारे प्रतिद्वंदियों को एक तरफ करके तमिल नाडु की मुख्यमंत्री बन कर दिखा दिया।  उन्होंने बेतन के रूप में 1 रुपया लेने की बात की। पहली महिला मुख्यमंत्री जो इस पद पर 6  बार चुनी गयी। लोग उन्हें देवी के सामान पूजते थे। उनके पैर दंडवत छूते थे। उन्होंने कभी इसका विरोध भी नही किया। वह गरीबो की मसीहा बन कर उनके दुःख -दर्द को दूर करने की कोशिश करती थी। उन्हें गरीबो के लिए बहुत सारी योजनाए बनाई जिसके कारण लोग उनके मुरीद बन गए। उन्होंने गरीबो के सारे दर्द दूर करने के लिए जी जान लगा दी। 
       उन्होंने अपने जीवन में बहुत अपमान सहा लेकिन प्रतिशोध लेने से भी कभी पीछे नही हटी। करुणानिधि और उनके सम्बन्ध राजनीतिक प्रतिशोध का ज्वलंत उदाहरण है दोनों हर तरह से अपने प्रतिद्वंदियों को सलाखों के पीछे भेजते रहे। 
         उन्होंने सारी जिंदगी भोगविलास में बिताई उनके घर जब छापा पड़ा तब 28 किलो सोना ,बहुत अधिक  चांदी  ,750 जूते ,कई हजार साड़िया मिली। उन्होंने शशिकला के बेटे की शादी में 100 करोड़ रूपये  लगाए जिसके कारण उनकी देवी की छवि टूट गयी। उसका खामियाजा उन्हें चुनाव में हार के रूप में चुकाना पडा । इसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। बाद में उन्होंने सुधाकरन को दत्तक पुत्र मानने से भी इंकार कर दिया। 
      बाद में उन्होंने महंगी साड़ी और जेवर रहित रहने का प्रण किया 14 साल तक उन्होंने अपने शरीर पर कोई गहना धारण नही किया। सन 2011 में अपने सहयोगी के अनुरोध पर गहने पहनने शुरू किये। 
     वह नारी कॉन्ट्रेक्टर ,मंसूर अली पटौदी और शम्मी कपूर को पसंद करती थी। 
     तमिलनाडु में जाति व्यवस्था पर बहुत सख्ती से पालन किया जाता हे. दलितो की हालत दयनीय थी। उन्होंने स्वयं उच्च कुलीन ब्राह्मण होते हुए, उनके उत्थान के लिए कई उपाय किये। वह तमिलनाडु के सभी वर्गो के उत्थान के लिए जीवन भर लगी रही। 
       उनको समझने वाला ,उनके अकेलेपन का साथी कभी उन्हें मयस्सर नही हुआ। थोड़ा बहुत उन्हें समझने वाली केवल शशिकला, उनकी सहेली थी। उनके बीच भी जहर देने  की घटना ने मनमुटाव ला दिया। इतनी उचाईयो पर पहुँचने वाले किस तरह डरे, सहमे और अकेलेपन के शिकार होते है। जयललिता का जीवन इसका  जीवन्त  उदाहरण है। उनके किये कामो के कारण उनके चाहने वालो के आँसू रोके नही रुक रहे है। उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था वह किस तरह लोगो के मन में समायी हुई थी। चारो और जनसैलाव दिखाई दे रहा था। 
       

#noto par pabandi or bhrashtachar

                                नोटों पर पाबन्दी और भ्रस्टाचार 

    8 नवम्बर की रात 8 बजे मोदी जी का भाषण सभी चेनलो पर आने लगा तो मुझे लगा भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की घोषणा होने वाली है। हमें नोटों की पाबन्दी के बारे में बिलकुल ख्याल नही आया। हमें मोदी जी का गंभीर स्वरूप हैरान कर रहा था। ये इतनी गंभीरता से कभी नही बोलते।
      उन्होंने भ्रटाचार के दम  पर भारतीयों का दिल मोह लिया  था।  लेकिन सभी को लगने लगा था। ये चुनाव जीतने का नारा  था। हमें उनके इस ऐलान  से पता चला उन्होंने आते ही भ्रस्टाचार मिटाने  पर कार्य करना शुरू कर दिया था। 1 . सबसे पहले जनधन के खाते शून्य पैसे पर खोलने के लिए लोगो को प्रोत्साहित किया। सभी जगह अनिवार्य रूप से पैसे खातों में डालने पर जोर दिया जाने लगा। 2 . उसके बाद सभी के आधार कार्ड बनवाकर उन्हें हर पैसे वाले खाते से जुड़वाने पर जोर दिया जाने लगा। 3 . kyc  के द्वारा सभी खातों  को अपडेट करवाने पर जोर दिया जाने लगा।  4 .लोगो को अपना काला धन सफेद करने का बहुत समय दिया।लोगो के दिमाग में सरकार की ढिलमिल नीतिया थी। इसलिए लोगो ने अपने धन को सफेद करने की तरफ ध्यान नही दिया। जिन्होंने इस मौके का फायदा उठाया उनके चेहरो पर ख़ुशी दिखाई दे रही है वरना हर और काले धन वालो के चेहरो पर मातम दिखाई दे रहा है।  पहले तो हमें इन सब कामो से बड़ी खीझ हो रही थी। लेकिन अब उनके कामो के मतलब समझ में आने लगे।
        नोटबंदी की घोषणा यदि सुबह कर दी जाती तो लोग अपने धन को सफेद करने के उपाय कर लेते लेकिन उन्हें केवल चार घंटे का समय दिया। जिसके कारण अधिकतर लोगो का धन अभी तक सफेद नही हो सका । लोगो ने अपनी जान -पहचान वाले सर्राफों को , रात को बंद दुकाने खुलवा कर खरीदारी की। उस रात उनकी दुकाने बंद नही हुई। वहाँ पूरी रात इस तरह भीड़ लगी  रही जैसे सब्जी बाजार हो। लोग बोरियो में भर कर नॉट लाये थे। लोगो की  बढ़ती मांग के कारण सोना ५५००० रूपये  कीमत तक बिका।  तब से अब तक सबसे अधिक इंटरनेट पर  काले धन को सफेद करने के तरीके खोजे जा रहे है।
             98%  लोगो के घर काला धन मिलेगा। उन्हें सरकार को कर देने की आदत  नही है सरकार को काले धन के सफेद करने के तरीके का पता चलते ही ,  बड़े दुकानदारो पर आयकर विभाग के छापे डलवाने शुरू कर दिए जिसके कारण सारे बाजार दो दिन तक बिलकुल बंद हो गए।  भारत में केवल सरकारी कर्मचारी अपने कर को बचा नही पता जबकि हर तबके के लोग कर देने के बारे में सोचना ही नही चाहते इस कारण उनमे खलबली मचना स्वाभाविक था। 
              अगले दिन दुकाने बंद और सड़के खाली दिखाई दे रही थी। सार्वजानिक छुट्टी का माहौल लग रहा था। दो दिन तक बैंक और ATM  बंद होने के कारण सभी काम रुक से गए थे। महंगाई के कारण सभी के पास बड़े नोट होते है बैंक और ATM  से भी यदि 10000 रूपये निकलवाने जाओ तो ५०० के नोट छोटे होते है बाकि सब बड़े नॉट होते है। मोदी जी की घोषणा होते ही सबसे पहले हमने अपने घर में छोटे नोट  ढूंढे तो हाथ में हजार से कम रूपये मिले। हमें लगा हम कंगाल हो गए है। तीन दिन बिना नोटों के गृहस्थी कैसे चलेगी।  जब बैंक वगेरह खुले तब चारो तरफ लंबी पंक्तियाँ दिखाई दी। पहले दिन शांति थी लेकिन कुछ दिनों बाद लोगो में गुस्सा दिखाई देने लगा। उसके लिए पुलिस की तैनाती की गयी।
         सरकार की नोटबंदी के कारण लोगो को दान -पूण्य करने का ध्यान आया। धार्मिक स्थलों पर करोड़ो के नोट पहुचने लगे। मैने गुरुद्वारे वालो के हाथो में जब हजार और पांच सो के नोट  देख कर पूछा तो उन्होंने कहा -"आज सभी खुले नोटों की जगह ये ही नोट दे रहे है। हमें क्या हम इन्हें गुरुद्वारे के खाते  में जमा करवा देंगे।" बड़े धार्मिक स्थलों में एक दिन में पुराने नोटों के रूप में करोड़ो का चढ़ावा  आ रहा है। 
         जो नोट लोग छुपा कर रखते थे वे अब कूड़ेदान, नदी ,कतरनों के रूप में   ,और अधजले इधर -उधर दिखाई दे रहे है। कई मालिक अपने मजदूरो को 6  महीने की अग्रिम वेतन दे रहे है। जिनकी जेब से कभी मजदूर के परेशान होने पर हजार रूपये नही निकलते थे।
       अमीर  गरीबो को 2 हजार का नॉट देकर, लाइन में लगवा कर, उन्हें 5 सो के बदले में अपने 1500  रूपये सफेद करवा रहे है. गरीबो की दिहाड़ी बन रही है।
     इस वक्त लोगो को अपने दूर के और गरीब रिश्तेदार याद  आ रहे है जिनके खाते में धन जमा करवा सके।नोटों की पाबदी के कारण भारत में बहुत सारे  बदलाव आएंगे। इससे रुपए की कीमत में उछाल आएगा

  1. सस्ते घर मिलेंगे 
  2. कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगेगी 
  3. लोगो को कर देने की आदत पड़ेगी।
  4. महगाई में कमी होगी। 
  5. नकली नोटों की समस्या से निजात मिलेगा 
  6. आतंकी लोगो को पैसा नहीं मिल सकेगा 
  7. हवाला कारोबार का दिवाला निकल जायेगा 
  8. सट्टा  बाजार का भट्टा  बेठ जायेगा 
  9. बिल से व्यापर होगा 
  10. रिश्वत खोरी पर अंकुश लगेगा। 
  11. अधिक टेक्स इकट्ठा होगा 
  12. स्वस्थ चुनाव होगा  

     
    काला धन बाहर आने से भारतीय अर्थव्यवस्था सुधरेगी।  सोने का कम आयात होगा  अभी हमें बहुत दिक्कतों का सामना करना होगा लेकिन कुछ समय बाद हमारी अर्थव्यवस्था उन्नति के पथ पर अग्रसर होगी। मोदी जी की तुलना सिंगापूर के नेता ली kuan  yea  से की जा रही है। जिन्होंने अपने प्रयासो से ग़रीब सिंगापुर को विकसित देश बना दिया। मोदी जी को कठोर कदम उठाने में झिझक नही होती। ऐसे कद्दाबर नेता बहुत कम  दिखाई देते है

#pradushit mahol

                                प्रदूषित  माहौल 

       
 दीवाली के बाद दिल्ली के वातावरण में बहुत बदलाव आ गया है। दिल्ली के वातावरण मे से जरूरी गेसे गायब हो गयी है। हर तरफ धुंध छायी हुए है। दृश्यता बहुत कम हो  गयी है। गाड़ी चलाते समय आगे का दृश्य दिखाई नही दे रहा है। जिसके कारण यातायात धीरे -धीरे खिसक रहा है। हर तरफ जाम लग रहा है। 
      साँस लेने में बहुत परेशानी हो रही है। लोगो को आँखों में जलन का सामना करना पड  रहा है। अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ़ गयी है। दिल के मरीज ओर रक्तचाप के मरीजो की हालत काबिले गौर है। हर और हाहाकार मचा हुआ है। दिल्ली और उत्तरप्रदेश में विद्यालय प्रदूषण के कारण  बंद कर दिए गए है।
    दीवाली के बाद हमें सूरज की किरणे दिखाई नहीं दे रही है। इसका मतलब यह नही है कि सूरज निकल नही रहा बल्कि सूरज की किरणे प्रदूषण के कारण धरती तक पहुँच नही रही है। धुप के अभाव में ठंड बढ़  गयी है। 
       सरकार ने  वातावरण को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई  है। इससे पहले वातावरण को लेकर सरकार  सजग नही हुई थी। पहले चीन और मेक्सिको जैसे देशो में वातावरण को लेकर सरकार जागरूक हुई थी। भारत का  बहुत बुरा हाल हो गया है। प्रदूषण की मात्रा १० से 13  % तक बढ़ गयी है।  यानि जो तत्व हवा में  १०० होने चाहिए उनकी संख्या 1000  से ऊपर पहुँच  गयी है। 
        विदेशियो की निगाह में दिल्ली पहले भी गन्दी कहलाती थी। उसमे ध्वनि, मृदा ,जल  वायु के प्रदुषण थे।  १  ध्वनि प्रदुषण  से बचने के लिए कानो में रुई लगाई जा सकती है। या किसी शांत कोने को ढूंढा जा सकता है।
२  साफ जल को घर से लेकर जा सकते है। हम बचपन में कही से भी पानी पी लेते थे। कभी पानी को लेकर परेशानी का सामना नही हुआ। आज हमें सबसे पहले शुद्ध पानी बहुत सारे  पैसे देकर खरीदना पड रहा है। 
    मेरे साथ तीन दिन के लिए राधा दिल्ली से बाहर घुमने गयी। मेने उसके साथ एक बहुत भारी बेग देखा। उसमे उसने  तीन    दिनों के लिए पीने का पानी भरा हुआ था। मैं हैरान रह गयी क्योंकि - मेने पहली बार एक भारतीय को कई दिन के सफर के लिए घर से पानी ले जाते देखा था। 
    3 .  प्रदूषित जमीन के प्रकोप से उससे दूर जाकर बचा जा सकता है।
४. हवा के प्रदुषण के लिए हम कहा जाये। पहले ताजी हवा पाने के लिए खिड़की दरवाजे खोल देते थे। आज मुझे खिड़की दरवाजे बंद रखने की सलाह दी जा रही है  .घर में हवा शुद्ध करने का यंत्र लगवाने की सलाह दी जा रही है। नाक पर मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा है। हमें बचपन से मुँह ढक कर सोने के लिए मना किया जाता था। कहा जाता था- छोड़ी हुए गन्दी हवा फिर साँस में चली जाएगी। मुँह खोलकर ताजा हवा में साँस लो। अब मुझे नाक पर मास्क लगाते हुए घुटन हो रही है 
     मुझे लगता है आने वाले समय में हमें भी अंतरिक्ष यात्रियों के सामान ऑक्सीजन के सिलेंडर पीठ पर बांध कर चलना पड़ेगा। ताजी और प्राकृतिक हवा के मायने ही ख़त्म हो जायेंगे।
    हमने विद्यालय में बच्चो को पटाखे न चलाने की हिदायत दी परिणामस्वरूप कई सालो के प्रयास से बच्चे जागरूक हुए उन्होनें पहले से कम पटाखे चलाये। लेकिन जितने भी चले उनके कारण बहुत नुकसान देखने में आ रहा है।
    दिल्ली में गाड़ियों की बहुतायत के   कारण, जाम लगने से, पैट्रॉल  की खपत बढ़ने के कारण, मानसिक और भौतिक परेशानी का सामना करना पड रहा है। पेट्रोल के वाहनों की कमी करने के लिए 15 साल से ज्यादा वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है। उनके आलावा डीजल की गाड़ियों की मियाद 10 साल कर दी गयी है। लेकिन दिल्ली से बाहर से आने वाले वाहनों का क्या करे जिन पर कोई नियम लागू नही होता। आप जान कर हैरान होंगे। दिल्ली बॉर्डर से जुड़े इलाको में सबसे ज्यादा प्रदुषण पाया जा रहा है। जैसे आनंदविहार। 
       गाड़ियों के धुंए के कारण जन -जीवन बेहाल है। साथ ही हरियाना ,पंजाब और उत्तरप्रदेश में पराली (पुरानी फसल के बेकार अंश ) जलाये जाने से, उनका धुँआ, दिल्ली तक आने के कारण हर तरफ धुँए के बादल लोगो को परेशान कर रहे है। लोगो को नई फसल बोने के लिए ये बहुत आसान उपाय लगता है।पिछले साल मैं दिसम्बर में दिल्ली से बाहर घूमने गयी थी। मुझे खेतो की मिटटी काले रंग की दिखाई दी जबकि उत्तर भारत की मिटटी पीली होती है। ये मिटटी का रंग पराली जलाने के कारण काला हुआ था। अब  यहाँ की सरकारे  इसके प्रति सजग होगयी है  ,ऐसे लोगो पर जुरमाना लगाया जा रहा है।
    १.    सरकार ने अनेक जगहों पर एयर प्यूरीफायर लगाने के आदेश दिए है 2. इसके आलावा मिस्ट फॉउंटेन लगाने के सुझाव दिए है।3. अब बड़ी सड़को की सफाई वेक्यूम क्लीनर से करने  के बारे में सोचा जा रहा है। ४. नए निर्माण से उड़ने वाले हानिकारक तत्वों को रोकने के आदेश जारी किये गए है। यदि इन सबका सही तरीके से कार्यान्वन हुआ तो हमें आने वाले समय में सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे।५.  अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए। 
       सरकार के उपयो के अतिरिक्त आम जनता को योगदान देना चाहिए। १. यदि आप कही कूड़ा जलता हुआ देखे उसे मना करे। २. सरकारी वाहनों से सफर करे। अपनी गाड़ी का कम उपयोग करे। ३. अधिकाधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करे। वरना आने वाली पीढ़ी को एक अतिरिक्त बोझ के रूप में ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर घर से चलना पड़ेगा। सोच के देखिए उस समय शारीरिक काम करना कितना मुश्किल हो जायेगा। क्योंकि शारीरिक काम करते हुए हमें ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ती है। 

#hamare tyohar


                                   हमारे त्यौहार 

 हिन्दू,जैन  और आर्य  समाज त्यौहारो की मस्ती में झूम रहे  है। हम सभी में नया जोश भरा हुआ। ये दिन सभी के लिए विशेष महत्व रखते है। अक्टूबर का पूरा महीना त्यौहारो से भरा हुआ है। पूरब, पश्चिम ,उत्तर ,दक्षिण सभी उत्साह में दिखाई दे रहे है। हर तरफ रंगीनी दिखाई दे रही है। 

     ये त्यौहार बुराई पर अच्छाई के प्रतीक है। दुर्गा ने महिषासुर का वध किया ,राम ने रावण का संहार किया।,छोटी दीवाली को कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया। 
     दशहरा के दिन राम ने रावण को मारा  था। उसके कारण आपने रावण दहन देखा होगा।
 लेकिन विजयादशमी पर  महिसासुर का संहार करने वाली दुर्गा के बारे में अधिक नही जाना होगा। जब सभी देवता महिषासुर के सामने हार गए तब उसकी ताकत का सामना करने के लिए उन्होंने उन्होंने अपने सभी श्रेष्ठ गुणों को इकट्ठा करके दुर्गा देवी का निर्माण किया। वह मानवीय और देवी गुणों का सर्वश्रेष्ठ रूप है। उसको देख कर महिषासुर जान नही सका इतनी कोमलांगी और सुंदर नारी उसकी मौत का कारण बन सकती है। यह नारी की सर्वश्र्रेष्ठ कृति के साथ नारी के गुणों का बखान करने में सक्षम है। यदि नारी को उचित जगह मिले तो वह मर्दो की बराबरी कर सकती है। 
      धनतेरस का नाम आप सुनते आ रहे है।देवो और दैत्यों के  समुद्र मंथन के बाद उसमे से चौदह रत्न निकले थे। उसमे धनवंतरी जी निकले जो आयुर्वेद के ज्ञाता थे। उनके ज्ञान से आयुर्वेद नामक चिकित्सा पद्धति का आरम्भ हुआ जिसने बर्षो तक लोगो की जान बचाई। उन्हें सम्मान देने के लिए धनतेरस मनाई जाती है। 
      आप हमेशा से राम के अयोध्या पहुचने पर दीवाली मनाने का वर्णन सुनते आ रहे है। लेकिन दीवाली की सुबह हनुमान जी की पूजा होती है। शाम  लक्ष्मी और गणेश की पूजा देख कर मुझे बचपन में बहुत हैरानी होती थी। लेकिन गणेश जी को शिवजी ने सभी देवताओ से पहले पूजा का वरदान दिया था। वरना कोई पूजा पूर्ण नही मानी  जाएगी। इसलिए इस दिन गणेश जी की मूर्ति विशेष रूप से पूजी जाती है। 
        बड़ी दीवाली पर लक्ष्मी जी की पूजा होती है लेकिन विष्णु जो उनके पति है उनकी पूजा नही की जाती। इसका कारण भी समुद्र -मंथन से जुड़ा है। इसी मंथन के फलस्वरूप सर्वगुण संपन्न और  अद्वितीय, सुंदरी, धन की देवी  लक्ष्मी समुद्र से निकली थी। विष्णु जी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। लक्ष्मी के हर रूप को साधारण मानव भी पाना चाहता है। इस लिए वे लक्ष्मी जी की पूजा करके उनका आह्वान करते है। 
      इंद्र की पूजा न करने के कारण मथुरा वासियो को कृष्ण ने उनके प्रकोप से बचाया। इंद्र को मेघो का राजा कहते है। उनके कारण कृषिप्रधान भारत का जीवन चक्र चलता है। वर्षा की कमी किसानों के लिए तबाही का कारण बन जाती है। वही अतिवृष्टि उन्हें बर्बाद कर जाती है। कृष्ण ने मथुरावासियों को इंद्र के द्वारा लाई अतिवृष्टि से बचाने के लिए उन्हें गोवेर्धन पर्वत पर पहुचने के लिए कहा। आपने गोवेर्धन पर्वत को ऊँगली पर धारण करने की कथा देखि सुनी होगी लेकिन मेरे ख्याल में उन्होंने ऊँची जगह पर लोगो को पहुँचा कर किसी गुफा में शरण दिलवाकर उन्हें बाढ़ के प्रकोप से बचाया होगा। हमें  गोवेर्धन पर्वत  जाने पर ऊँचा पत्थरो का पहाड़ दिखाई देता है। हजारो साल पहले वहाँ काफी ऊँचा स्थान रहा होगा। इस प्रसंग से हमें कृष्ण की सूझ -बुझ और लोकहित की भावना दिखाई देती है। वह निरपेक्ष भाव से सबके हित  में लगे रहते थे। 
      कृष्ण को हम भगवान के अवतार के रूप में जानते है। हमारे कई त्यौहार जन्मास्टमी ,गोवेर्धन पूजा ,नर्कचौदस(छोटी दीवाली ) श्री कृष्ण से जुड़े हुए है। उन्हें हम महामानव के रूप में देख सकते है। उन्हें जीवन के हर रूप में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कृष्ण को  माँ के गर्भ में आने से मरणोपरांत तक  सारा जीवन कठिनाइयों का सामना करते हुए बीता दिया।उनकी मृत्यु भी कुल में एकता बनाने में असफल होने पर,दुःख में डूब कर, शिकारी के तीर लगने से हुई। कहा जाता है वह शिकारी भी उनके परिवार का सदस्य था।  कृष्ण साधरण इंसान को असाधारण प्रयास करने की प्रेरणा देते है। 
     जैनियो के तीर्थंकर  महावीर जी ने इसी दिन निर्वाण लिया था। दयानद सरस्वती आर्य समाज के प्रणेता भी इस दिन से जुड़े हुए है। इसलिए जैनियो और आर्य समाज के धर्मावलंबी भी इस दिन को विशेष महत्व देते है। 
        भैया दूज का महत्व आप सब जानते है। लेकिन भाईदूज की कहानी शायद आपको नामालूम हो। इसे यम द्वितीया  कहा जाता है। मथुरा में यमुना नदी में  इस दिन सगे  भाई -बहन साथ डुबकी लगाए तो उनकी अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। उनमे प्रगाढ़ प्रेम हमेशा बना रहता है। यम (यमराज  माने मौत के देवता ) और यमी दोनों भाई बहन की कहानी इस दिन से जुडी हुई है।उन्होंने इस दिन यमुना में डुबकी लगा कर लोगो के अंदर अकाल  मौत के भय को ख़त्म किया था। अपनी मौत के सामने बस नही चलता लेकिन अकाल मौत संसार में कोई नही मरना चाहता। 
          बिहारी लोगो का त्यौहार छठ पूजा भी आने वाली है यह पर्व 3 दिन तक भूखे -प्यासे रह कर किया जाता है। यह पूजा सूर्य की उपासना से जुडी है यह सबसे प्राचीन महाभारत काल से मनाई जाती है। प्राचीन काल में हम इंसानो की कम और प्रकृति की पूजा अधिक करते थे। सूर्य पुजा  और गोवेर्धन पूजा हमें प्रकृति के महत्व को समझाती है। ये त्यौहार हमारे जीवन को मजबूत बनने की प्रेऱणा भर कर हर्षोउल्लास से भर देते है। 
       

#durgarupini aj ki nari

                             दुर्गारुपिणी आज की नारी 

   
 आजकल देवी की पूजा हो रही है। जबकि भारत में बच्चीयो की संख्या बहुत कम हो गयी है। सरकार  के सारे प्रयास नाकाम हो रहे है। दिल्ली जैसे शहर में दिनोदिन लड़कियों की संख्या में इजाफा नही हो पा  रहा है। कन्या पूजन के लिए लडकिया नही मिल पाती। यदि लड़कियों की संख्या इसी तरह कम होती रही तो आने वाले समय में लड़को के लिए बहुए कहाँ से मिलेंगी। यदि बेटी नही होगी तो बहन ,भाभी ,माँ,बहु ,बुआ जैसे अनेको रिश्ते अपना अस्तित्व खो देंगे।  चीन और ताईवान जैसे देशो में लड़कियों की कमी के कारण वे दूसरे देशो से विवाह सम्बन्ध बनाने लगे है। सबसे पहले चीन में अल्ट्रासॉउन्ड मशीन का प्रयोग हुआ। उसके कारण चीन में 3 लड़को के ऊपर केवल 1 लड़की है। चीन में केवल अमीर लड़को की शादी सम्भव हो पाती है। 
        भारत में हरियाणा और पंजाब में लड़कियों की बहुत ज्यादा कमी हो गयी है। यहाँ भी लड़को को शादी करने के लिए दूसरे राज्यो से,गरीब  लडकिया खरीदनी पड़ती है। सभ्य घर की लड़की और खरीदी हुई लड़कियों में अंतर होता है। उनके संस्कार ,भाषा बिलकुल अलग होती है। सम्भ्रांत परिवार की ना होने ,परिवार से दूर होने का खामियाजा उन्हें सारी जिंदगी उठाना पड़ता है। उनके साथ मानवीय व्यवहार नही किया जाता। उनके साथ बुरा सलूक होने पर उनकी मदद के लिए कोई तैयार नही होता। वहाँ की सरकार ,कानून उनकी मदद नही कर पाता। ये सारे काम करने के बाद भी यौन गुलाम का जीवन जीती है। जिनका दर्द समझने वाला कोई नही होता। 
         हम सोचते है लड़कियों की संख्या कम होने से उनकी कीमत बढ़ जाएगी ऐसा नही हो सकता बल्कि उनके आभाव में अराजकता बढ़ जाएगी। लड़कियों के साथ अपहरण ,बलात्कार जैसी घटनाओ की तदाद बढ़ जाएगी। औरत की  जरूरत आदमी की मूल आवश्कताओ में से एक है। यदि सही ढंग से पूरी नही होगी तो वह इस जरूरत को गलत तरीके से पूरा करेगा। तब फिर से लड़कियों को पहरे में रखना शुरू कर दिया जायेगा जैसे आज से कई साल पहले तक औरत घर की चार दीवारी तक सीमित थी। उसकी शिक्षा,नोकरी के बारे में कोई सोचता भी नही था। उसका अस्तित्व न होने के सामान था। 
    मैने हरियाणा के एक इंसान से पूछा -"तुम्हारी कितनी संतान है।"
     उसने जबाब दिया -"चार। "
     मैने पूछा -"बेटी क़ितनी है। "
     उसने कहा -बेटी कोई, संतान नही होती। 
     फिर भी जबरदस्ती पूछने पर 
     उसने कहा -"दो."
     आज भी ग्रामीण इलाके में लड़कियों की गिनती संतान के रूप में की ही नही जाती। 
    में आपका ध्यान आज की पढ़ी लिखी नारी पर केंद्रित करना चाहती हूँ। आज की नारी पढ़ने के बाद अच्छी नोकरी करना पसंद करती है। वह शादी सही समय आने पर ही करती है अब उसका मूल लक्ष्य शादी नही रहा।  उसके बाद उसमे आत्मनिर्भरता आ जाती है। वह सबकी मदद करने के लिए सतत तैयार रहती है। मायका,ससुराल वह अपने गुणों से रोशन करना चाहती है। उसके गुणों की खुशबु अब घर तक सीमित नही रहना चाहती बल्कि वह दूर तक अपने गुणों का प्रसार करना चाहती है। 
      नारी अबला नही रही बल्कि सबल बन चुकी है। आपने नितीश कटारा कांड के बारे में सुना होगा। उसकी दर्दनाक मौत का गम पिता सहन नही कर सके। जल्दी दुनिया से कूच कर गए। उनकी माँ नीलम कटारा ने इतने ख़राब हालात का सामना करते हुए, सभी ताकतवर और सरमायेदार  गुनहगारो का सामना 14 साल तक करके उन्हें आजन्म करावास करवा के दम  लिया। नीलम कटारा की सारी जिंदगी सुखो का वरदान रही थी बुढ़ापे में बेटे का दुःख उन्हें तोड़ नही सका बल्कि उनकी मजबूती ने दुसरो में लड़ने की हिम्मत दे दी। 
      जो औरत घर को सुचारू रूप से चला सकती है। हर एक की सभी जरूरत पूरी कर सकती है। उसके एवज में किसी से कुछ नही मांगती बल्कि वही घर की धुरी होती है। इसके बाबजूद उसे सम्मान का हकदार नही समझा जाता। जब नारी के पास अधिकार मिल जाते है तब वह दुर्गा के समान असंभव कार्य भी कर दिखाती  हे। 
   वह शहर से दूर रह कर बेख़ौफ़ नोकरी करने से  डरती नही है। बड़े शहरो में आपको बहुत सारी लडकिया अपने दम पर काम करती दिखाई दे जाएँगी। उनके लिए घूमने  जाने के लिए किसी पुरुष साथी की जरूरत  नही होती बल्कि हर तरह की गाड़ियों में आपको किसी भी समय लडकिया दिखाई दे जाएँगी। 
      कुछ समय पहले मैने एक लड़कियों के घर में जिसमे कोई मर्द नही था। किसी लड़के को गलत व्यवहार करते देखा। उन चारो लड़कियों ने उसकी भरी सड़क पर पिटाई कर दी। पहले तो उस लड़के को पीटते देखकर मै हैरान रह गयी। बाद में उसके कृत्य पर बहुत हंसी आयी। 
      ये लडकिया किसी रिश्ते के लिए बोझ नही है। बल्कि हर रिश्ते के लिए  जरूरत बन गयी है। अभिभावक कर्मठ लड़की में अपना भविष्य देखने लगे है।2.  भाई अपनी काबिल बहन से मिलवाने में गौरव का अनुभव करते है।3  ससुराल वाले बहुओ को सम्मान देने लगे है। सभ्य लडकिया कुल की मर्यादा बढ़ाती है। जैसे काबिल लड़के के गुण सुनाइ देते है वैसे ही काबिल लड़कियों की तारीफ होने लगी है। ओलम्पिक में इस बार सारे मैडल केवल नारी शक्ति ने प्राप्त किये। 
   बहुत सारी जगहों  पर नारियो को आरक्षण दिया गया है। जैसे पंचायत में 33 % ने गाँवो की हालत बदल दी है।१  सूखे गाँवो में तालाब खुदवाये। 2 सूखती नदी को जिन्दा कर दिया।3  शराबीयो को रोकने के लिए शराबबंदी आंदोलन चलवाया।4  एक सरपंच ने शिक्षा के महत्व को समझ कर अपनी जमीन पर विद्यालय खुलवाया और शिक्षक का प्रबंध किया।5  सड़क बनवाई उनपर बिजली का प्रबंध करवाया।  पिंक गैंग  की सम्पत राय जैसी ग्रामीण और अशिक्षित  नारी जब हालत को बदल सकती है। तो शिक्षित नारी को आगे बढ़ने का मौका दे कर देखो यदि उसके जज्बे को उड़ान भरने का मौका मिले तो एक दिन वह इंदिरा गाँधी ,सुषमा स्वराज जैसी लौह नारी बन कर दिखा देंगी। इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री, एक अबला कमजोर नारी समझ कर बनाया गया था। लेकिन उन्होंने उस ज़माने के धुरंधरो के सामने अपनी काबिलियत का सिक्का जमा कर, उन्हें राजनीती से अलग दूसरा रास्ता दिखा दिया। जिन्होंने उसे अपने हाथ की कठपुतली बनाना चाहा था। 
      नारी पर भरोसा रखने के सुखद परिणाम देखने में मिल रहे है। आज कानून और माहौल नारी  के साथ  है इस का फायदा हमें दूरगामी परिणाम दिखायेगा। नारी हमेशा से मेहनती ,अवगुणों से दूर रही है। वह एक साथ कई काम करने में सक्षम है।  उसकी भावुकता अब उसकी कमजोरी नही बल्कि उसकी ताकत के रूप में देखि जानी चाहिए। 
      

#kejrival or sabut

                         केजरीवाल और सबूत 

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 में उरी हमले पर नेताओ की एकता पर खुश हो रही थी कि इन्होंने एकदम इसके विरुद्ध कुछ नही कहा। लेकिन मेरी प्रसन्नता यकायक छिनभिन्न हो गयी। जबसे मैने अपने दिग्गज नेताओ के द्वारा सबूत मांगने के बारे में जाना। उनकी बयानबाजी और प्रेस को सम्बोधन करने से मेरा दिल क्षतिग्रस्त हो गया।
        दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पाकिस्तान के  हीरो बन गए है। सारे संचारतंत्र में उनकी फोटो और बयान मुख्य रूप से छापे जा रहे है। पाकिस्तानी  रिपोर्टर मैहर तरार के बयान "घर को जला  दिया घर के चिराग ने." मेरे मन को आहत कर दिया है। आप सरकार के मुख्यमंत्री के बयान पर बाकि विधायक लीपापोती करके उसे सही साबित करने में लगे है।
       कांग्रेस के दिग्गज नेता  संजय निरुपम ,दिग्विजय सिंह, रणदीप सुरजेवाला , पी चिदम्बरम सबूत मांग रहे है। प्रेस बुला रहे है। लेकिन सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की चुप्पी से उनके प्रवक्ता पल्ला झाड़ कर खुद को अलग साबित करने में लगे है। कभी भी सुप्रीम कमान की इजाजत के बिना इन नेताओ में इतना होंसला नही आ सकता। कही ना कही इन्हें बढ़ावा देने वाले ऊपर बैठे लोग है। ये दोतरफा नीति अपना रहे है। 
        इनके लिए भारत की सुरक्षा मायने नही रखती बल्कि सिर्फ अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए देश को ख़त्म कर देने में भी पीछे नही हटेंगे। इससे पहले कभी किसी पार्टी ने सेना के अभियान के सबूत इस तरह मांगने की खबर नही पढ़ी।
      हमारी सेना के १९ सेनिको की शहादत इनके लिए झूठ है। उनके शब देखकर यकीं नही हो रहा। यदि सबूत की वीडियो रील दिखाई जाये तभी उन्हें यकीन आएगा।
        आपको जानकर हैरानी होगी जब आप  के एक सांसद ने संसद भवन की वीडियो बना कर चैनल को सोंप दी थी। उस वीडियो की आलोचना होने पर ( संसद की सुरक्षा को लीक ) केजरीवाल जी ने अपने नेताओ को फंसाने का षड्यंत्र करार दिया था।
       १३ दिसम्बर को संसद  पर हमला होने का वाकया भुला दिया गया था। यदि सांसद आतंकवादियो की गिरफ्त में आ जाते तो पूरे भारत का क्या होता जिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें बचाते हुए अपनी जान गवाई। उसका ख्याल नही आया। उस के बाद पूरे संसद भवन की सुरक्षा के इंतेजाम बदल दिए गए थे।
       हमारे सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाने में  आतंकवादी हमेशा तैयार रहते है। यदि इस कार्यवाही की वीडियो दिखा दी जाये तो सभी को उन सेनिको के हथियार ,काम करने के तरीके ,नाम ,शक्ल, रणनीति का पता चल जायेगा। जिसका नुकसान देश को और उन सेनिको को  उठाना पड़ेगा। 
       कहा जाता है "मारने वाले का हाथ पकड़ा जा सकता है लेकिन झूठे की जबान नही पकड़ी जा सकती। "भारत बरसो से पाकिस्तान को सबूत सौपता आया है। उसने उसे हमेशा झुठला दिया। भारत ने पाकिस्तान समेत 22 देशो को सर्जिकल ऑपरेशन के सबूत सौपे उन्होंने इन सभी को सच्चा माना। लेकिन पाकिस्तानी झूठ के लिए भारतीय विरोधी पार्टियों के नेताओ को क्या कहे। वे पाकिस्तान के हाथ पक्के कर रहे है।
      रशिया ,अमरीका ,ब्रिटेन,फ़्रांस जैसे देशो के सेटेलाइट भारतीय सर्जिकल ऑपरेशन  को पकड़ने  में सक्षम है। नई तकनीको के माध्यम से झूठ फटाफट पकड़ा जा सकता है। उन्होंने इस कार्यवाही की आलोचना नही की तो भारतीय नेताओ को यकीं क्यों नही आ रहा।
     सर्जिकल ऑपरेशन के बाद  पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाजशरीफ की रक्षा सचिव की बैठक बुलाना ,सेना के जनरल को सचेत रहने को कहना,सारी सीमाओ पर चौकसी बढ़ा देना इस बात के सबूत है।
       युद्ध की कार्यवाही हमेशा से गुप्त रखी जाती रही है। सेना के भेद लेने के लिए जासूस छोड़े जाते है। सरकारे यदि इस तरह अपने भेद खोलने लगे तो देश को परतंत्र होते देर नही लगेगी।
      नेताओ द्वारा सबूत मांगना किसी एक पार्टी पर शंका जाहिर करना नही है बल्कि हम अपने देश के सेनिको का मनोबल गिरा रहे है। जो हमारी सुरक्षा के लिए घर -बार छोड़ कर  दिन रात  सीमाओ पर जाग  कर रखवाली कर रहे है तभी हम घरो में चैन की नींद सो रहे है।

#uri ka bdla


                               उरी  का बदला 

 आज बहुत दिनों बाद मन में आत्मसम्मान की भावना जगी। अपने को विकसित भारत का नागरिक कहने का मन कर रहा है। जब भारतीय नेताओ के द्वारा आतंकवादी घटना के सबूत दूसरे देशो को दिए जाते थे। पाकिस्तान उन्हें सिरे से नकार देता था। तब मन में आक्रोश पैदा हो जाता था। 

    दूसरे देशो के लोगो से इन घटनाओ का जिक्र करने पर हमे हमेशा सुनना पड़ता था।जो अपनी रक्षा खुद  ही कर सकता उसके बारे में लोग क्यों सोचेंगे । हम बुद्ध और गाँधी की संतान होने का खामियाजा कब तक उठाते रहेंगे। पाकिस्तान के आतंकवादी हमलो के कारण 80000 लोग मौत की नीद अब तक सो चुके है। 
     भारतीय नेता हमेशा अहिंसा का दामन थामे हुए भारतीय सेनिको और जनता को मरते हुए देखते रहे। जबकि आमने -सामने की लड़ाई में भी इतने लोगो को जान से हाथ नही धोने पड़ते। उरी हमले के समय सभी आर्मी अफसर ने कहा सुरक्षात्मक कार्यवाही में अधिक जाने गवानी पड़ती है। क्योंकि हमें पता नही होता कब ,कौन ,कहाँ से हमला करेगा। यदि हमें आक्रमण का मौका मिले तो हम अपना हुनर दिखा सकते है। ये हमें अब और म्यामार की कार्यवाही में सबुत समेत देखने के लिए मिला।
       1    मोदी जी ने एकदम पाकिस्तान पर हमला नही बोला बल्कि पहले पुरे संसार में पाकिस्तान के खिलाफ माहौल तैयार किया।  उन्होंने सबसे पहले अमरीका ,रूस ,ब्रिटेन , फ़्रांस, अफगानिस्तान ,बांग्लादेश ,भूटान जैसे देशो से हाथ मिलाया।2  संयुक्त राष्ट्र में सबूत देकर अपनी निरीह स्थिति साबित की। 3 बलोचिस्तान की असली हालात संसार के सामने लायी।4  pok ,गिलगित ,बाल्टिस्तान की सुलगती स्थिति से लोगो को वाकिफ करवाया। बलोचो के अंदर जीने की लालसा पैदा करके उनको आवाज दी। 
      इंदिरा गाँधी ने बांग्लादेश की हालत को लेकर पहले सारे संसार के सामने हालत बयान की थी। लगभग एक साल तक उन्होंने हर देश के सामने गुजारिश करके देखा। उसके बाद पाकिस्तान के हमला करने के बाद उन्होंने आक्रमण का जबाब  बांग्ला देश बनबा कर ले लिया था। 
      उस समय भारत बहुत कमजोर राष्ट्र था। सिर्फ रूस की मदद से भारत कुछ नही कर सकता था। उस समय हालत ऐसे बन गए थे की पाकिस्तान की मदद के लिए अमरीका अपना जहाजी बेडा लेकर हिन्द महासागर में आ गया था। यदि अमरीका भारत पर आक्रमण करता तो रशिया का जहाजी बेडा उसके पीछे भारत की मदद के लिए तैयार खड़ा था। अमरीका पाकिस्तान के साथ था। लेकिन अमरीका की जनता के सामने इंदिरा जी सही हालत रख कर उन्हें अपने पक्ष में पहले ही कर चुकी थी। जनता के खिलाफ जाकर अमरीकी सरकार सख्त कदम नही उठा सकी। 
       पाकिस्तान भारतीयों का जबरदस्ती अपहरण करके उन्हें आतंकवादी बना  कर उनके द्वारा भारत पर  हमला करवा कर देश की प्रगति में बाधा डाल रहा था। बुरहान बानी जैसे आतंकवादियो को महिमामंडित करके ,शहीद घोषित करके ,उसके नाम से रेलगाड़ी में प्रदर्शनी लगवा कर भारतीयों के घावों पर नामक छिड़क रहा था। 
      कश्मीर के 80 % लोग भारत के खिलाफ नही है लेकिन पाकिस्तान उन्हें  जबरदस्ती  भारत विरोधी कारनामो में लगवा कर भारत के नाम पर कीचड़ उछाल रहा था। 3  महीने से कश्मीर में, पाकिस्तान के कारण, दहशतगर्दी के माहौल के कारण कर्फ्यू लगा हुआ था।पाकिस्तान अपने देश की समस्या  से जनता  को विमुख करके उन्हें कश्मीर  दिलवाने के सब्जबाग दिखा कर भूखे पेट सोने को मजबूर कर रहा था। 
      पूर्व तानाशाह मुशर्रफ के समय m q .खान वैज्ञानिक आतंकवादियो को परमाणु बम्ब बना कर दे रहा था। अंतररास्ट्रीय विरोध के कारण मुशर्रफ को उसे कैद करना पड़ा वरना आतंकवादियो के हाथ में बहुत पहले परमाणु बम्ब की तकनीक  पहुँच  चुकी होती। 
    यह पहली  सरकार है जो हलफनामा उठा कर कह सकती है कि मेरी सेना पर मेरा नियंत्रण नही है। 
POK  में 160 आतंकवादी केम्प बने हुए है जिनमे से अभी 7 केम्पो पर हमला करके कुछ आतंकवादियो को मारा गया है। 
      भारतीय सैनिक का कत्ल करके पाकिस्तान उसका सिर काट कर ले गए हमारे किसी नेता ने उसके लिए कोई कदम नही उठाया। एक सैनिक का इस घटना से खून खोल उठा. वह बिना आदेश के पाकिस्तान में घुस कर उस सैनिक के बदले में  पाकिस्तानी सैनिक का सिर काट कर ले आया.हम जैसे लोग उसके कदम को सराहेंगे लेकिन भारतीय सेना ने उसका कोर्ट मार्शल की सजा सुना दी। ऐसे में कोई सैनिक कैसे डर -डर के साहसिक कदम उठा सकता है। 
        हमें सेना के सामने हमेशा परमाणु बम्ब का ख़ौफ़ नही रखना चाहिए। यदि भारत ;बम्ब के आघात को सहन नही कर सकेगा। तो भारत के पास इतने बम्ब है कि पूरा पाकिस्तान हमेशा के लिए खत्म हो जायेगा।  पाकिस्तान  परमाणु बम्ब का इस्तेमाल करने से पहले कई बार उसके हश्र के बारे में सोचेगा। भारत पर 3 बार आक्रमण करके वह भारतीय सेना का दम  देख चुका  है। 
         
       
  

#uri or shahadat


                              उरी  और शहादत 

 मोदी जी की पाकिस्तान के खिलाफ मूक कार्यवाही ने पाकिस्तान को हिला दिया है। पाक हमेशा भारत के खिलाफ अनर्गल बोलता रहता था। उसकी आतंकवादी कार्यवाही से भारतीय त्रस्त  थे लेकिन हमारे पुराने  नेता इसके खिलाफ कुछ करने से घबराते थे। लेकिन कद्दावर मोदी के बलोचो और pok को अपना बता कर उनमे होंसला भर दिया है। अब तक केवल भारत में तिरंगा जलाते दिखाया जाता रहा। .हम जैसे भारतीय उससे मर्माहत होते रहते थे। लेकिन कोई नेता उसके खिलाफ आवाज नही उठाता था। 

     मोदी जी ने  अलगाववादी नेताओ को मदद देने से मना  कर दिया है। इससे पहले अलगाववादी नेता भारत के खिलाफ आग उगलते थे। उन्हें राजी करने के लिए भारतीय नेता उनके इशारो पर चलते हुए उनके ऊपर धन दौलत लुटाते थे। ये धन पाकिस्तानियो का नही था बल्कि भारतीयों की खून पसीने की कमाई थी। 
     अब उरी में पाकिस्तानी कार्यवाही के दौरान 18  सेनिको की दर्दनाक मौत के खिलाफ पूरा भारत सुलग उठा है। चारो तरफ पाकिस्तानी झंडे जलाये जा रहे है। हमारा संचार तंत्र भी लोगो के आक्रोश को  दिखा रहा है। इससे पहले मेने कभी हिन्दुओ की आवाज इस तरह संचार माध्यमो से उजागर होते  नही देखी थी। 
      किसी भी धर्म का भारतीय इसमें पाकिस्तानियो का पक्ष लेते दिखाई नही दे रहा है.इस समय किसी भी मुसलमान का वकतव्य संचार तंत्र दिखा कर हमें मर्माहत करने की कोशिश नही कर रहा। 
       भारतीयों के आलावा आज हमें पूरा संसार आतंकवाद के खिलाफ खड़ा दिखाई दे रहा है। अमरीका  ,ब्रिटेन ,बांग्लादेश, अफगानिस्तान , फ़्रांस सभी इनके खिलाफ उठ खड़े हुए है। 1. अमरीका ने पाकिस्तान की मदद करना कम कर दिया है। 2. अमरीका की संसद में पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने के लिए बिल पेश किया गया है.3.  रुसी राष्ट्रपति भी पाकिस्तानी के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने की सलाह दे रहे है। 4.  चीन भी इस समय पाकिस्तान का पक्ष नही ले रहा है। इस समय पाकिस्तान का पक्षकार कोई नही है।             पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अमरीका में रहते हुए अपने सैनिक कमांडर राहिल को निर्देश देते दिखाई दे रहे है। a.  पाकिस्तान में बॉर्डर के पास की उड़ाने बंद करवा दी गयी है।b. बॉर्डर के पास के महामार्गों पर आवागमन बंद हो चूका है।ताकि युद्ध के समय इन पर युद्धक विमान उतारे जा सके।  सी,पाकिस्तान में हर तरफ युद्ध की कार्यवाही से बचने के उपाय किये जा रहे है। नवाज शरीफ के चेहरे पर दहशत दिखाई दे रही है। 
            अब से पहले भारतीय नेता हमेशा अपने खिलाफ होने वाले अत्याचारो की दुहाई देते गिड़गिड़ाते रहते थे लेकिन आज भारतीयों के दर्द को संसार समझ रहा है। पाकिस्तान को इस समय अपने ऊपर हमला होने का डर सता रहा है । दोनों देशो के पास परमाणु हथियार है। भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना से कई गुना ज्यादा है हथियार आदि सब कुछ अधिक होने के बाबजूद पाकिस्तान की इस तरह की हरकत जैसे चूहे के द्वारा शेर को परेशान करना है। 
      सारे संसार को आतंकवादी पैदा करके देने का काम पाकिस्तान कर रहा है। जो चिंगारी पाकिस्तान ने भारत को जलाने के लिए सुलगाई थी वह अब पूरे संसार को जला रही है। उसकी जलन इस समय पाकिस्तान को भी महसूस होने लगी है। आज पाकिस्तान के लिए अच्छे आतंकवाद और बुरे आतंकवाद में अंतर करना मुश्किल हो रहा है। उसकी जलाई हुए चिंगारी ने उसके दामन को पकड़ लिया है।
       इस आतंकवाद के कारण पाकिस्तान का कोई नेता अपने को सुरक्षित नही समझ रहा है। ये आतंकवादी कभी भी वहाँ के पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे का अपहरण कर लेते है। वे  प्रधानमंत्री गिलानी जी अपने बेटे को अमरीकी मदद से 3 साल बाद मुक्त करवा पाते  है। 
   पाकिस्तानी पूर्व रक्षामंत्री कयानी  के बेटे को आतंकवादियो ने कैद कर लिया। उसे आजाद करने के लिए मुजरिमो को छोड़ना पड़  रहा है। पाकिस्तान में आतंकवादियो की दोहरी सरकार चलती दिखाई दे रही है। सभी  तबके  उसके रहमोकरम पर जी रहे  है। पाकिस्तान में नियमो की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। उनको दबाने में लचार पाकिस्तान भारत पर आग बरपा कर पाकिस्तानियो का धयान बाँटने की कोशिश कर रहा है।  
        इतने अधिक सेनिको की कायराना  तरीके से सोते हुए मार डालना हमें सोचने पर मजबूर कर रहा है। कब तक हम अहिंसा का पाठ याद करते हुए शहीदों की कुर्बानी देंगे। हमें सख्त कदम उठाने की जरूरत है। जैसे म्यामार में भारतीय सेनिको ने कार्यवाही की वैसी ही कार्यवाही की आज दरकार है। पूरा राष्ट्र एक हो चुका  है। संसार से डरने का समय नही है। हमें शहीदों की शहादत का बदला लेना है 

#bhartiy mosm or bimariya

                        मौसम और बीमारिया 

आजकल  हर तरफ बीमारियो  का साम्राज्य फैला हुआ है। हर घर में मरीज दिखाई दे रहे है। कई घर तो आपको ऐसे भी मिलेंगे जिसमे सारे लोग बीमार है उनकी सेवा करने के लिए स्वस्थ इंसान नही है।  अस्पतालों में जगह नही है।  बीमारो को अस्पतालों से वापस किया जा रहा है।
      अधिकतर मरीज मच्छरों से फैलने वाली बीमारी से पीड़ित है। हर साल इसी समय ऐसा माहौल दिखाई देता है। जब कई मोते हो जाती है। तब सरकार सजग होती है। इसे किसकी लापरवाही कहा जायेगा। सफाई को लेकर कोई सजग नही है। लोग सरकार को दोष देकर अपना गुस्सा निकालते है। सरकार सफाई कर्मचारियों और अधिकारियो पर गुस्सा निकाल कर काम चला लेती है। हालात ज्यो के त्यों रहते है। 
     यदि सभी अपने कार्यो के प्रति जिम्मेदार हो जाये तो। इतनी अधिक जानो से हाथ न धोना पड़े।  इस समय लोग किसी जंगली जानवर को देखकर भयभीत नही होता जितना मच्छर को देखकर हो रहा है। हर तरफ मच्छर से बचने वाले समान इस्तेमाल हो रहे है। फिर भी महामारी रुक नही रही। जब मौसम बदलेगा तभी इन बीमारियों से निजाद मिलेगी। हमे बहुत अधिक जान और माल का नुकसान उठाना पड़ता हे। माल की भरपाई तो इंसान कर लेता है। लेकिन जिनके यहाँ जान का नुकसान होता है। उनका पूरा  जीवन आंसुओ में डूब जाता है। 
      इस समय टायफायड , वायरल ,डेंगू, चिकनगुनिया फैला हुआ है। जिसको यह बीमारी हो जाती है। उसकी हालत एक हफ्ते में सँभल  पाती है जबकि कमजोरी दूर होने में काफी अधिक समय लग जाता है। एक छोटा सा मच्छर इंसान पर आक्रमण करके उसे गंभीर बीमारियों का शिकार बना रहा है। 
     कई बीमारियों में खून और प्लेटलेट्स की कमी  ,दवाइयों का आभाव ,अस्पतालों की कमी,जानकारी की कमी भी बीमारियों को भयावह रूप दे रही है। इन बीमारियों में अधिक से अधिक पानी पिलाना चाहिए। मरीज को बुखार आने पर पेरासिटामोल देना चाहिए। सिर्फ खून मिलने से काम नही चल पा रहा बल्कि उसमे से प्लेटलेट निकाल कर मरीज को देना होता है। यह लोगो को पता ही नही होता है। मरीजो को ऐसे में तुलसी ,गलोय जैसे काढे बना कर प्लेटलेट्स बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। 
     चिकनगुनिया का बीमार ठीक होने के बाद भी चलने -फिरने से लाचार रहता है क्योंकि उसे कई महीनों तक जोड़ो का दर्द रहता है। वह सही तरीके से चलने से भी लाचार रहता है। बाकि जरूरी काम करना उसके लिए बहुत कठिन होते है। इतने समय तक इंसान किस तरह काम किये बिना रह सकता है। सभी के लिए ,नॉकरी और अन्य कामो के लिए किसी  पर निर्भर नही  रहा जा सकता है। अधिकतर घर छोटे हो गए है। इसलिए कामो की जिम्मेदारी किसी अन्य पर सौपना बहुत मुश्किल हो गया है। 
    सरकारी अस्पताल और संस्थानों में मच्छरों के लार्वा पाए जा रहे है। अबकी बार हमारे इलाके में मच्छरों को भागने के लिए धुंआ छोड़ने वाले भी नही आये। नालियो में दवाई डालने वालो और कूलर चेक करने वालो का भी आभाव रहा है। उनका काम भी दिखावटी ज्यादा लगता है वे बाहर से पूछते है आपके यहा  कूलर में पानी हे या नही। यदि है तो उसे खाली करके सूखा लो,नही तो इसमें ये दवा डाल लो। थोड़ी सी गोलिया देकर चले जाते है। 
यदि कोई झूठ बोल रहा हो तो इसके लिए कोई जुर्माना नही है। मैने अपने सामने बहुत लोगो को इस मामले में झूठ बोलते देखा है। 
      श्रीलंका और मलेशिया जैसे देशो से मलेरिया की बीमारी जा चुकी है ये छोटे देश है। भारत में हम इन बीमारियों से मुक्ति के आसार कब देख सकेंगे। 
       मेरे इलाके में बहुत गंदगी है। इसके लिए मैं निगम पार्षद ,कमिश्नर, इंजीनियर ,सफाई कर्मचारी सभी से गुहार लगाने के बाद थक कर हार मान चुकी हूँ। सब दिलासा देते है सफाई करवाई जाएगी लेकिन सच्चाई में गंदगी के ढेर अब भी आपको जगह -जगह दिखाई दे जायेंगे। प्रधानमंत्री स्वछता अभियान मुझे केवल किताबो और पोस्टरों में दिखाई दे रहा है। अपने इलाके में मुझे गंदगी के अम्बार दिखाई दे रहे है। जब तक लोग जिम्मेदारी से अपने कर्तव्य का निर्बाह नही करेंगे। हमे हर तरफ बीमारियों और मोतो का ऐसा सिलसिला देखने को मिलता रहेगा। 

#bhartiy khel ratn

                                             भारतीय खेल रत्न 
आज मुझे ओलंपिक में भारतीय नारी की कोशिश देखकर बहुत ख़ुशी हुई। पी वी संधू,साक्षी मलिक ने मेडल जीतकर भारतीय मेडल का सूनापन दूर कर दिया। वही पहली बार दीपा कर्माकर  ने  जिम्नास्टिक में पदार्पण करके , ओलम्पिक में  चौथे स्थान पर पहुच  कर, इस को सर्कस की दुनिया से दूर,  भारतीय को स्थान दिलवाकर उनकी  आशा बड़ा दी। भारत में जिम्नास्टिक को महत्व नही दिया जाता था। लेकिन अब मुझे उम्मीद है भारतीय लडकिया भी जिम्नास्टिक के पथ पर आगे बढ़ कर भारत का नाम रोशन करेंगी। 
         साक्षी मालिक का  अदम्य साहस भी प्रेरणा का सबब बनेगा। उसने पुरुष वर्चस्व वाले खेलो में मेडल दिलवाया है। उसके गांव में कभी लड़कियों ने कुश्ती में भाग नही लिया था। उसे अभ्यास करने के लिए लड़की साथी नही मिली। उसे हमेशा पुरुषो के साथ अभ्यास करना पड़ता था। उसके परिवार और उसकी झिझक मुझे सोचने पर मजबूर कर देती है। एक छोटे से गांव की लड़की जब पुरुषो के साथ अभ्यास करती होगी उसको किस तरह के उलाहनों का सामना करना पड़ता होगा। पुरुषों के मजबूत हाथो से कुश्ती के दाँव -पेच में हुनर साबित करना बहुत कठिन काम है।उसकी माँ और उसके जज्बे को मैं सलाम करती हूँ।
        संधू के पिता और उसकी जिजीविषा ही उसे इतनी ऊंचाइयों तक पहुँचा सकी। वरना 60 किलोमीटर का सफर तय करके अभ्यास करना साधारण लोगो के बस का नही होता। उसके पिता ने बेटी के भविष्य के लिए 7 महीने के लिए नोकरी से छुट्टी ली।संधू ने एक साल से ज्यादा समय से अपनी पसंद की चीजे नही खायी है।  इतना अधिक त्याग कितने लोग कर पाते है। . उसके गुरु गोपीचंद फुलेला ने भी गुरु -शिष्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।  उन्हें द्रोणाचार्य पुरुस्कार मिलना सार्थक है। ऐसे गुरु ही दुसरो में प्रेरणा भरते है। 
      ऐसा  अचम्भा पहली बार हुआ है जब  ओलम्पिक में पहली बार भाग लेने वालो ने   पुरुस्कार भी जीतकर दिखा दिया। पहली बार ओलम्पिक में केवल महिलाओ ने सराहनीय खेल दिखाया। उनके सामने भारतीय मर्द पिछड़ गए। 
        ये  तीनो भारत के अलग स्थानों से सम्बन्ध रखती है। उनकी प्रेरणा उनके अंदर से उभरी वरना हर तरफ से उन्हें हतोत्साहित करने वाले लोग चारो और फैले हुए थे। हमारा सामाजिक माहौल लड़कियों को खेलो में प्रोत्साहित करने वाला नही है। उनके अंदर की आकांक्षा ने उन्हें रूढ़ियां तोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी हिम्मत अब उन्हें लड़कियों को आगे बढ़ाने का कदम उठाने में सहायक होंगी। 
       साक्षी के मेडल जितने की खबर से बहुत सारी लड़कियों के अभिभावकों ने अपनी लड़कियों का कुश्ती खेलने के लिए  नामांकन करवा दिया है। अब साक्षी का पूरा गाँव उसकी जैसी लड़की को वरदान समझ रहा है। ओलम्पिक से लौटने के समय भव्य स्वागत उसका प्रतिक है। 
         इन तीनो के पुरुस्कार जीतते ही इन पर सौगातो की बारिश हो रही है। इनकी अम्बेसेडर वैल्यू बढ़  गयी है। उनको जो मिला उसकी मुझे बहुत ख़ुशी है। लेकिन भारत में खेलो को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारों को कदम उठाने चाहिए। अमरीका, ब्रिटेन और चीन में खेलो और खिलाड़ियों पर कई करोड़ रुपया खर्च किया जाता है। जबकि उन्हें इनाम में ज्यादा राशि नही दी जाती। 
         पहली बार तीन महिला खिलाड़ियों को एक साथ खेल रत्न का पुरुस्कार मिला है। यह महिलाओ के लिए सम्मान का सबब है। 

#pakistan ko karara jbab

                                              पाक को करारा जबाब 
   
 पाकिस्तान  भारत  में अनेक तरह से दहसत फैलाने में लगा है। उसने  अपनी कोशिशो  पर शर्मिंदा होने के स्थान पर भारत को बदनाम करने में कोई कसर उठा नही रखी। उसके द्वारा नकली नोटों को भारत में भेजना, नशीली दवाइयों के द्वारा हमारी युवा शक्ति को नाकाम करना,हथियार की आपूर्ति दंगाईयो तक पहुंचा कर भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने की हरदम कोशिशो में लगा हुआ है। उसके बाबजूद झूठा आरोप भारत पर मढ़ने से बाज  नही आता। 
         भारत विभाजन के समय कश्मीर भारत का हिस्सा बना। कश्मीर के राजा ने इसके लिए अपनी सहमति दी। वहाँ की 50 % जनता मुस्लिम होने के कारण पाक कश्मीर पर अपना अधिकार हमेशा से समझता रहा। उसने 1948  में कबाइलियों के द्वारा कश्मीर को हड़पने की साजिश रची। उसके बाद १९६५,1971  के भारत पर आक्रमण के द्वारा भारत को हथियाने की नाकाम कोशिश की। उसके बाद उसे अहसास हो गया। भारत की शक्ति के सामने वह  बहुत कमजोर है। धोखे से 1999 के कारगिल हमले में उसकी रही सही पोल खुल गयी। विश्व समुदाय के सामने उसे मुँह की खानी पड़ी.. इस से शर्मिंदा होकर उसने  कारगिल युद्ध में  शहीद जवानों को अपना मानने से इंकार कर दिया। 
      1990  के दशक में कश्मीर से अनेक तरह से यातना देकर 50 % हिन्दुओ को कश्मीर छोड़ने के लिए बाध्य किया। ऐसा पहली बार हुआ था जब अपने देश से ही शांति के समय में देशवाशियो को शरणागत बनकर दूसरे राज्यो में जाना पड़ा। हमारी सरकार और संचार तन्त्रो ने इसकी सुगबुहाट तक आम लोगो तक नही पहुचने दी। हम जैसे लोगो को बर्षो बाद कश्मीरी हिन्दुओ का पलायन का कारण पता चला 
       आज भी उसके द्वारा हिंसा फैलाई जा रही है। बुरहान वानी जैसे आतंकवादियो को शहीद बता कर अपनी गन्दी मंशा जगजाहिर कर रहा है। सारा विश्व इसे भारत का अंदरूनी मामला कह कर सामने आने के लिए तैयार नही है। पाकिस्तान में बुरहान वानी की तस्वीरों से सजा  कर एक  ट्रेन चलाना इसका  सबूत है।  
     भारत के मोदी जी ने पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर आजाद कश्मीर पर अपना बयान दिया। उन्होंने पाकिस्तान के बलोचिस्तान पर अपनी चुप्पी तोड़ी। आजाद कश्मीर भी भारत का हिस्सा है। यह कहने की हिम्मत किसी और प्रधान मंत्री ने इससे पहले नही दिखाई थी। जबकि भारत के नक्शे में आज भी आजाद कश्मीर को दिखाया जाता है। जबकि इसपर पाकिस्तान का कब्जा है। वहाँ की जनता नरक की आग में झुलस रही है। उनको  अनेक तरह से यातनाये देकर चुप करवाया जा रहा है.
    .बलोचिस्तान की हालत उससे भी ज्यादा बदतर है। उनसे मानवीय अधिकार तक छीन लिए गए है। वहाँ के लोगो से जीने तक का अधिकार छीन लिया गया है। उन्होंने आजादी के समय पाकिस्तान में शामिल होने से साफ मना  कर दिया था। वहाँ  केवल सेना के बल पर अधिकार किया गया है। नाममात्र को चुनाव का ढोंग किया जाता है। वहाँ की केवल 10 % जनता चुनाव में भाग लेती है। अधिकतर फर्जी वोटिंग के द्वारा सत्ता चलाई जा रही है। 
      उनकी आवाज पहली बार संसार के सामने लाने का दम मोदी जी ने दिखाया है जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप पाकिस्तानी नेताओ ने इस मसले पर विचार करने के लिए नेताओ से बात की है। भारत की प्रतिक्रिया के कारण पाकिस्तान की तिलमिलाहट साफ दिखाई दे रही है।
     पहली बार मोदी जी ने बलोचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर का दर्द संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाने के बारे में कहा है। मोदी जी आज विश्व की आवाज बन गए है। जिन्हें गंभीरता से सभी सुन रहे है।  
     अब तक  पाकिस्तान भारतीय कश्मीरियो को सब्ज बाग  दिखा कर, पैसो  से खरीद कर बगाबत के लिए आमादा करने में लगा हुआ था। भारतीय आम  जनता को डरा -धमका कर, पत्थर फेकने,हिंसा फैलाने के लिए,भारतीय झंडा जलाने जैसी कार्यवाही कर रहा था। 80 %जनता को भारत में रहने से परेशानी नही है। नेता इस बात को बिगाड़ कर प्रस्तुत कर  रहे है। जिसका खामियाजा आम  जनता उठा रही है। कश्मीर की आम जनता सकून से सो नही पाती। दंगाई आधी रात को उठा कर सेना पर आक्रमण करने के लिए उकसाते है वरना उन्हें मारते  है। 
     चीन सरकार पाकिस्तान की हमदर्द बनकर भारत के खिलाफ कार्यवाही करने से गुरेज नही कर रही थी। जैसे ही भारत ने पाकिस्तान के बलोचो की आवाज उठाई वैसे ही चीन सरकार की आवाज बदल गयी उन्होंने पहली बार "आजाद कश्मीर को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर" कहा। क्योकि बलोचिस्तान से होकर चीन सरकार को ग्वादर बंदरगाह तक जाने का रास्ता मिलता। चीन सरकार ने ग्वादर बंदरगाह पर काफी पैसा खर्च किया है। 
     बलोचिस्तान के नेताओ ने और अफगानिस्तान के नेताओ ने मोदी जी का धन्यवाद दिया है। उनकी आवाज, उनका दर्द विश्व के सामने लाने के लिए। पाकिस्तान के दिए जख्मो के कारण विश्व करहा रहा है। जब सभी जख्मी देश मिलकर उसका विरोध करेंगे तभी उसे अपने गलत कारनामो का अहसास होगा। उसे रोकने के प्रयास करेगा। 

#rajnath singh or sark smellan

                                            राजनाथ और सार्क सम्मेलन 
      पहली बार मुझे एहसास हुआ मैं सशक्त गृहमंत्री के राज में रह रही हूँ। अब से पहले जितने भी नेता थे वे दूसरे देशो के सामने दयनीय अवस्था में अपने दर्द को बयान करते थे। दयनीय अवस्था के लोगो पर केवल दया की जाती हैं। साथ ही कमजोर लोगो पर ध्यान कम दिया जाता है।  हमारी समस्या लोगो के लिए अहम नही थी।
     एक बार विदेश में मैंने ये समस्या रखी तब मुझे जबाब मिला -"जो समस्या तुम्हारी है जिस समस्या से किसी अन्य पर असर नही होता। उसके लिए तुम किसी अन्य से मदद की उम्मीद कर रहे हो।  तुम्हारा साथ कोई क्यों देगा। सबसे पहले भारत के नेताओ को उसका सामना करने के लिए कदम उठाने चाहिए जब तुम कदम उठाने में असमर्थ हो तो दुसरो से उम्मीद मत करो। ." सभी देशो में भारतीय अकर्मण्यता का यही सन्देश जाता था। भारत केवल हाथ जोड़े खड़ा रहने वाला देश है इसके बस में गिड़गिड़ाने के आलावा कुछ नही है। यह किसी का कुछ बिगाड़ नही सकता।
      आज हमारे नेताओ की छवि बदल रही है रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तिया याद आ रही है।
 "क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो।
उसको क्या जो दंतहीन ,विषहीन विनीत सरल हो। "
        राजनाथ सिंह के सार्क  सम्मेलन में पहुँचते ही कोई बड़ा नेता उन्हें लेने एयरपोट पर नही आया।  सारे भारतीय  मीडिया कर्मियों को उनके साथ अंदर नही जाने दिया। अन्य रिपोर्टरों को उनके भाषण को रिकॉर्ड करने की अनुमति प्रदान नही की गयी। उन्होंने प्रतिरोध स्वरूप हाथ गर्म जोशी के साथ नही मिलाया। उन्होंने पाकिस्तानी गृहमंत्री  के लंच का निमन्त्रण भी ठुकरा दिया। अब तक जितने भी नेता पाकिस्तान में गए उन्होंने इससे पहले पाकिस्तानी नेताओ की भूरी -भूरी प्रशंसा की।भले ही उनके मन में कड़वाहट भरी थी।                 इससे उन्होंने भारत का कभी महत्ब नही समझा। भारत पाकिस्तान की अपेक्षा अधिक ताकतबर है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना को मुँह की खानी पड़ी थी। वह हार बहुत शर्मदायक थी वरना अब तक पाकिस्तान कई और हमले भारत पर कर चुका होता।
     जितनी पाकिस्तान की जनसँख्या है। उससे अधिक भारत की जेलो में कैदी है।  .
        भारत में आतंकवादी घटनाओ का जन्मदाता होने के बाद भी पाकिस्तान बुरहानवानी जैसे लोगो को महिमामंडित करके उन्हें शहीद की श्रेणी में रखता है। जिसने भारत के 60 से अधिक लोगो को आतंकवादी बनने के लिए प्रेरित किया। सारा संसार आतंकवाद से कराह रहा है। पाकिस्तान में आतंकवादी सरकार की नाक में दम किये हुए है। लेकिन वह एक तरफ आतंकवाद की बुराई करता है लेकिन भारत के आतंकवादियो  को पाल पोस रहा है। यह दोरहा रवैया संसार के सामने लाना जरूरी था। यदि राजनाथ का भाषण कवर करने की  पाकिस्तान अनुमति दे देता तो उसकी पोल सारे संसार के सामने खुल जाती।
       राजनाथ और मोदी जैसे नेताओ से पाकिस्तान डरने लगा है। मोदी ने पाकिस्तान के सभी हमदर्द देशो से दोस्ती का हाथ मिला लिया है। इस कारण पाकिस्तान छटपटा रहा है। इसकी प्रतिक्रिया दिखाई देनी शुरू हो गयी है। पाकिस्तान को अमरीका की तरफ से मिलने वाली मदद पहले की अपेक्षा चौथाई रह गयी है। जिन देशो में पाकिस्तानी लोगो को हाथो -हाथ लिया जाता था। वहाँ भारतीयों को स्थान मिलने लगा है।
       पाकिस्तान को कश्मीर का दर्द दिखाई देता है। लेकिन जिसे वह आजाद कश्मीर की संज्ञा देता है। जो पाकिस्तान के नियंत्रण में है। उनकी कराह सुनाई नही देती है। जिन्हें  वहाँ के वाशिंदों ने जानवरो की तरह जीने के लिए मजबूर कर दिया है। मैं चाहती हु हमारे नेता वहाँ की हालत कश्मीरियो के सामने लाये। जिससे उनकी आँखों के सामने सच्चाई आये। आज सिर झुकाये मुश्कुराने वाले नेताओ की नही जुझारू और कर्मठ नेताओ की जरूरत है। जो हमें मिल गए है।
      

#mahanayk or samaj

                           महानायक और समाज (कबाली )

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      मेने आधुनिक समय में महानायक की कल्पना नही की थी मुझे हमेशा लगता था। पुराने समय के अनपढ़ और गवाँर लोग किसी  इंसान की पूजा करते थे लेकिन अब लोग ऐसा नही कर सकते। बहुत समय से एक इंसान के पीछे चलने वाले अनुयायी देखने को नही मिले। लेकिन रजनीकांत(कबाली ) को लेकर पैदा हुआ जूनून देख कर हैरान हूँ। 
       एक कलाकार की फिल्म देखने  के लिए लोग अपनी जमीन ,गहने और मकान तक बेचने के लिए तैयार हो रहे है। उन्हें अपने भविष्य से मतलब नही केवल एक फिल्म उन्हें किस तरह से झकझोर सकती है।ऐसा जनून इससे पहले नही देखा।   मेने त्यौहारो के दिन बड़े कलाकारों को फिल्म पर्दे पर आते देखि थी। किसी छुट्टी वाले दिन बड़ी फिल्मे सिनेमा हॉल में लगती देखि थी लेकिन फिल्म के रिलीज के समय किसी राज्य में छुट्टी होते पहली बार देखा  है। 
        आम तौर पर रजनी कान्त सुंदरता के हिसाब से बहुत सुंदर नही कहला सकते। उनकी फिल्मे दक्षिण के अलावा दूसरे राज्यो के लोगो को बहुत पसंद  नही आती होंगी। उनकी कहानी आम कहानियो के सामान ही लगती है। लेकिन उनके प्रसंशक उनके संवादों के दीवाने है। उनके हर हाव -भाव उनके अंदर नया जोश भर देते  है।
      बीस साल पहले जब मेने उनकी फिल्म देखी तो मुझे उनमे कुछ असाधारण नही लगा था। लोगो का जूनून देख कर अब उनकी हिंदी डब की गयी फिल्मे देखनी अच्छी लगने लगी। ये करिश्मा उनकी फिल्मो से अधिक उनके व्यवहार का है। 
       वे समाज के कामो में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते है। उनके द्वार पर जो आ जाता है। वो उसकी अवश्य मदद करते है। अनजाने लोगो की बिना बताये उन्होंने मदद की है। दक्षिण भारत में उन्हें भगवान का अवतार माना जाता है। उनकी फोटो की पूजा की जाती है। उसे दूध से नहलाया जाता है। उनके 50000 हजार फेन क्लब बने हुए है। उनकी फिल्म रिलीज के समय ,अराजकता से बचाने के लिए उनके फेन क्लब के सदस्य सक्रिय होकर हिंसात्मक कार्यवाही होने से रोकते है। आप सोच के देखिये जिसके इतने सारे फेन क्लब है। उसमे उनके कितने फेन हो सकते है। उनके दक्षिण में मंदिर बनवाये गए है। 
      अधिकतर सिनेमा घरो में 10 बजे से फिल्मे शुरू होती है। लेकिन उनकी फिल्म के समय 5 बजे का शो शुरू किया जाता है। इतनी सुबह आम इंसान उठना पसंद नही करते लेकिन ये रजनीकांत की फिल्मो का कमाल है। उनकी एक फिल्म की टिकट 14000 रु तक ब्लेक में बिकी है। टिकट काउंटर पर टिकट बिक्री  शुरू होने से पहले ही ऑनलाइन सारी टिकट बिक गयी। 
         दक्षिण में कमाल हसन  30 करोड़ रूपये एक फिल्म के लेते है.रजनीकांत की एक फिल्म की फ़ीस 60 करोड़ रूपये होती है। वे अपनी कमाई का आधा हिस्सा समाज की भलाई में खर्च देते है। देखा जाये तो वे अपनी कमाई अपने परिवार और अपने ऊपर कम खर्चते है लेकिन उनकी आधी कमाई ही उन्हें महामानव बनाती है। 
       इतने बड़े स्टार होने के बाबजूद वे जमीन से जुड़े हुए इंसान है। वे आम जीवन में साधारण इंसान के समान रहते है। उनका मेकअप केवल फिल्मो तक सीमित है। समाज में वे अपने असली रूप में होते है बिना मेकअप के 65  साल के गंजे और बुड्ढे व्यक्ति के रूप में दिखाई देने में उन्हें कोई झिझक नही होती है। 
       उनके आलावा फिल्म लाइन से जुड़े लोगो की जिंदगी विवादास्पद होती है। लेकिन ये बिलकुल साधारण भारतीय इंसान के सामान जीवन जी रहे है। इनके साथ कभी कोई विवाद सुनाई नही दिया। 
        इन्होंने जीवन का आरम्भ बहुत छोटे काम से शुरू किया। इन्होंने कंडक्टर की नोकरी के साथ कभी -कभार अभिनय करने को बहुत  सुखद समझा था। उनके अंदर बड़ी आकांक्षा नही थी। 
     पिता के कहने पर पहली जमीं 24 लाख रूपये की खरीदी। जिसका कर्ज चुकाने में उनकी 20 फिल्मो की आय लग गयी। वहाँ उन्होंने बड़ा होटल बनवाया जो हमेशा खचाखच भरा रहता है। उस होटल को रजनीकांत की तस्वीरों और उनकी पसंद की चीजो से सजाया गया है। 
      वे अपनी फिल्मो के रिलीज को लेकर फिक्रमंद नही होते। उनके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित नही करते। बल्कि फिल्म खत्म होने के बाद विदेश  चले जाते है । उन्हें भारत में रहना जरूरी नही लगता। वे जिस देश में रहते है। उस जगह उनके लिए विशेष शो आयोजित  किया जाता है। भारत के   आलावा  एक ही दिन उनकी फिल्म संसार के बहुत सारे देशो में रिलीज की गयी। उनके शो को देखने के लिए लोग राज्य ही नही देश तक बदलने के लिए तैयार हो जाते है।पहले दिन और पहला शो देखने के लिए जपानी प्रशंसक भारत आया।  उनके प्रसंशक संसार के सभी देशो में फैले हुए है।   
       रजनीकांत समाज उद्धारक होने के साथ किस्मत के धनी है। उनके इतने बड़े सफर में उनके हमदर्द ज्यादा और दुश्मन बहुत कम है। 

#bhikhariyo ki samsya

                              भिखारियों की समस्या 

   
  पहले समय में भिखारी धार्मिक आस्था से जुड़े हुए थे। उनके  भरण -पोषण से लोगो को लगता था वे दान -पुण्य करके उनका भला कर रहे है। उनके माध्यम से उनका परलोक सुधर रहा है। उनकी आस्था को भिखारियों ने अपना अधिकार समझ लिया था जिसके कारण मंदिरों में जाने से लोगो को डर सताने लगा था। वे एक भिखारी को कुछ देते तो भिखारियों का झुण्ड उन्हें  देने के लिए विवश कर देता था। भिखारियों से पिंड छुड़ाना मुश्किल हो जाता था। ये समस्या इतनी भयंकर हो गई कि सरकार को इनसे निबटने के लिए सामने आना पड़ा। 
       अब सरकार की सख्ती के कारण भिखारी मंदिर के बाहर दिखाई नहीं देते उन्होंने दूसरे ठिकाने ढूंढ लिए है। अब ये ट्रैफिक सिगनल पर नए तरिके अपना कर भीख मांगते दिखाई देते है। ये सिग्नल उनकी कमाई के अड्डे बन गए है। कारों की खिड़कियाँ बंद करके बैठे लोग उनसे बच जाते है लेकिन खुली खिड़की वाले या दोपहिया गाड़ी वाले उनके कारण परेशान होते रहते है। 
     बस के अंदर या रेलगाड़ी में सफर करने वालो को भीख मांगने वाले हिजड़े बहुत परेशान करते है। उनके कद -काठी, हाब -भाव ,बोलने का तरीका उनके सामने मुँह खोलने नहीं देता। यदि हम जैसे हिम्म्त करके मना कर दे तो उनके कहे हुए गंदे शब्द सामने वाले को झकझोर देते है। ऐसे ही एक हिजड़े को मेने पैसे देने से मना कर दिया। तो वह बोला "-पैसे नहीं है तो ये पर्स क्यों ले रखा है। चल मेरे साथ पैसो के ढेर लग जायेंगे। "
     उसके शब्द सुनकर मॅ शर्मिंदा हो गई। मुझे लगा भिखारी वह नहीं बल्कि मै हुँ।आम भिखारियों को मना करते लोगो को देखा है। लेकिन हिजड़ो की तालियाँ बजाकर माँगने पर कोई उन्हें देने से नानुकुर नहीं करता। 
     भिखारी हर उस जगह मिल जायेंगे जहाँ लोग बहुत अधिक संख्या में जाते है। इसका उदाहरण मेट्रो स्टेशन बन गए है। अधिकतर मेट्रो स्टेशनों पर भिखारियों का जमाबड़ा दिखाई दे जाता है। ये स्थान ऐसे होते है जहाँ अधिकतर  इंसान को जाना पड़ता है। 
     भिखारियों को  देखकर भारत की गरीबी याद आ जाती है। बाहर से आने वालो पर गलत प्रभाव पड़ता है। इन भिखारियों के पास अच्छे कपड़े होते है लेकिन अच्छे रख-रखाव के कारण भीख नहीं मिलेगी इस लिए फटे -पुराने कपड़ो में,बिना नहाए ,गंदे बिखरे वालो में  रह कर अपने प्रति लोगो के मन में दया की भावना पैदा करके कमाने में लगे रहते है। पिछली सरकार की सख्ती के कारण भिखारी काफी समय तक दिखाई नहीं दिए लेकिन फिर से बहुत अधिक संख्या में दिखाई दे रहे है। 
        ये भिखारी आलसी होते है। बूढ़े -अपाहिज लोगो को देखकर दया उपजती है लेकिन जवान लोगो को देखकर गुस्सा आता है। अपनी मेहनत की कमाई इन्हे देने का मन नहीं करता 
       कुछ समय पहले अख़बार में खबर पढ़कर हैरान रह गई। कुछ  घरों के लोग दुबई जैसे देशो में 3 महीनो के लिए  जाते है। वहाँ वे भीख माँग कर इतना अधिक कमा लेते हे कि भारत में शानोशौकत की जिंदगी गुजरते है।  उन्हें इतने कम समय में इतनी अधिक भीख मिल जाती है कि उनका एक साल का खर्च निकल जाता है। उनके रोजगार के बारे में लोगो को सही जानकारी नहीं होती साधारण लोगो को उनका ठाठ -बाट से रहना दिखाई देता है। 
      भिखारियों के भीख माँगने के ठिकानो की नीलामी होती है। एक भिखारी अपनी जगह पर दूसरे भिखारियों को बैठने नहीं देता। उनके बीच का झगड़ा हैरान कर देता है। 
      एक दिन मेंने  सुबह शाहदरा मेट्रो स्टेशन पर एक जवां आदमी को अपने पिता को बिठाते हुए देखा वह अपने पिता से कह रहा था -" पिताजी आप यहाँ बैठ जाओ। ये तुम्हारा खाना और पानी रखा है। "इसे देखकर मुझे अपने बच्चों की परवरिश पर गुस्सा आया। जिन बच्चों को पालने के लिए अभिभावक दिन -रात मेहनत करते है। उन्ही के बच्चे बुढ़ापे में उन्हें  भिखारी बना देते है। 
     कई भिखारी आम लोगो से बहुत ज्यादा अमीर होते है । उनकी अमीरी के बारे में सुनकर आँखे खुली रह जाती है। 
    भारत में बहुत ज्यादा संख्या में बच्चे उठाये जाते है। जिन्हे बाद में गलत कार्यो में लगा दिया जाता है। ट्रैफिक सिगनलों पर सामान बेचते बच्चे अधिकतर अपहृत होते है। गरीब घरों के बच्चे न के बराबर होते है। यदि इन पर पाबंदी नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में हर तरफ भिखारी दिखाई देने लगेंगे।  

#bangladesh ki ghatna

                                             बांग्ला देश  की घटना

     
बांग्ला देश मुस्लिम देश होने के बाबजूद शांतिप्रिय देश रहा था। लेकिन कुछ समय से वहाँ कटटरता पैर ज़माने लगी है।अब  अन्य देशो के सामान यहाँ कटटरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिन्दुओ पर होने वाले आक्रमण,ब्लॉगर की हत्या इसके प्रमाण है। हाल की घटना को अंजाम देने वाले गरीव या अनपढ़ लोग नहीं थे बल्कि सभ्य और पढ़े लिखे परिवारों से सम्बद्ध थे। इसमें एक राजनेता का बेटा भी था। उनके अंदर नफरत के बीज कहाँ  से पनपे इसका कारण समझ में नहीं आ रहा। 
      मुस्लिम कटटरपंथी जिस तरह अलगाव पैदा कर रहे है। उससे एक समय बाद हर मुस्लिम शक की निगाह का सामना कर रहा होगा। प्रत्येक देश में लोग मुस्लिम से भय खाने लगे है। अपने देश को मुस्लिम बहुल होने पर, अन्य देशो के लोगो  को सहन नहीं करने के कारण उन्हें मार देने से उनकी समस्या का हल नहीं निकल पाएगा।सभी देश वसुधैव कुटुंबकम की भावना से जुड़ कर तरक्की पा सकते  है।
      बांग्ला देश में जापानी और अन्य देशो के लोगो को जान  से मार  देने से क्या  वहाँ के व्यवसायी उनके देश में आकर व्यापार करने की  हिम्म्त जुटा पाएंगे। इंसान पहले अपनी जान -माल की सलामती के दम पर दूसरे देश में उद्योग लगाने का फैसला करता है। बांग्ला देश एक गरीब देश है। उसे दूसरे देश की सहायता से तरक्की करने के अवसर मिल रहे थे। ये हमला सबसे अच्छे इलाके में हुआ था। जब सम्भ्रान्त वर्ग सुरक्षित नहीं रहा तो अन्य लोग अपनी सुरक्षा के बारे में क्या सोचते होंगे। 
        धर्म से  मानसिक शांति मिलती है।जबकि मुस्लिम धर्म को मानने वाले सबसे अशांत दिखाई दे रहे है। वे अपने धर्म को बचाने के लिए जिहाद छेड़े हुए है। इसके कारण कितने लोग मर रहे है उसकी गिनती करना भूल गए है। इस जिहाद के कारण हर मुस्लिम महिला को कम से कम 10  बच्चे पैदा करने जरूरी है। उस माँ की बेबसी देखो जो अपने बच्चे को मरने के लिए ,धर्म के नाम पर शहीद होने के लिए जन्म देती है। 
      आज के समय में धर्म खाने के लिए रोटी मुहैया नहीं करवा पा रहा है। सभी कटटर  देशो ने  पहले दूसरे धर्म के लोगो से नफरत करने के कारण ,उन्हें देश से निकलने पर मजबूर किया। अब जिन देशो में केवल मुस्लिम बर्ग रह गया है। उसे भी अनेक भागो में बाँट दिया अब  उनके साथ ही लड़ रहे है। इन्ही में से निकले  उइगर, कुर्द ,रोहिंगिया, अहमदिया ,शिया ,सुन्नी ,मुहाजिर ,ब्लोच और  यजीदी है। ये अनेक वर्गों में बाँट कर उनका संहार कर रहे है।
       जब लोग अपने देश की सीमाओं में सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते तभी वे अन्य देशो में शरण पाने के लिए अपना सब कुछ छोड़ कर निकलते है। मुस्लिम लोगो से सभी इस कदर खौफ खा रहे है कि कोई देश उन्हें शरण देने के लिए तैयार नहीं है। जितने लोग किसी देश में शरण ले रहे है उससे कई गुना ज्यादा भूख -प्यास से तड़प -तड़प कर मर रहे है।  इंसानो पर राज किया जाता है। मुर्दो पर शासन नहीं किया जाता। वीराने किसी को शासन करने के लिए नहीं उकसाते। 
      इन आतंकियों ने कुरान की आयते सुन कर लोगो की जान बक्श दी। उन्हें खाने की सुविधाएं भी दी।  इस देश में अधिकतर विदेशियों के हाथो में  उद्योग है। उनके द्वारा अधिकतर लोगो को रोजगार मिला हुआ है। जब ये देश में नहीं रहेंगे तब उनके सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो जाएगी। 
          अमरीका और रूस की अफगानिस्तान को लेकर टकराहट ने पाकिस्तान को आतंकवाद की फसल पैदा करने वाला देश बना दिया। रूस ने अफगानिस्तान से पैर समेट लिए लेकिन पाकिस्तान को आतंकवाद पैदा करने का ऐसा चस्का लग गया कि  जहाँ आतंकवाद दिखाई देता है वहाँ उसके तार पाकिस्तान से किसी न किसी रूप से अवश्य जुड़े दिखाई दे जाते है। आज भी अमरीका आतंक वाद को अच्छे और बुरे में बाँट रहा है। यदि हम आतंकवाद को इन श्रेणियों से अलग करके देखे तभी इस समस्या का हल निकल सकेगा।
      पहले समय में रमजान के पाक महीने में हिंसा की घटनाएं नहीं होती थी। लेकिन अब कोई सीमा नहीं रही है।इस महीने में मुस्लिम ही मुस्लिम को मार रहे है।  यदि  आतंकवाद से मिलकर लड़ेंगे तभी इससे मुक्ति मिल सकेगी। ये समस्या अब पूरे संसार में फैल चुकी है। कोई भी देश इससे बचा नहीं है। ऐसे देशो को आर्थिक मदद देनी बंद कर देनी चाहिए। 
     पाकिस्तान भी अब इस समस्या से सुलग रहा है। उसे पूरी ताकत से इससे सुलटने की कोशिश करनी चाहिए। जाकिर नाइक जैसे लोगो पर पाबंदी लगानी चाहिए जो लोगो में नफरत की आग फैला रहे है।  

#yog

                                   योग और मानव 

     
 हिन्दू   धर्म के साथ योग जुड़ा हुआ है लेकिन योग किसी एक धर्म के उपयोग के लिए नहीं  है। यह एक विज्ञानं है जो मानव  तन और और मन को  निरोग रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका धर्म विशेष से जोड़कर देखना अहितकर है। यह शारीरिक ,मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मानव को सबल बनाता है। मानव जब शरीर से निरोग होगा तब पूरी सामर्थ्य अनुसार काम करके सफलता हासिल कर पाएगा। 
        इसके माध्यम से कम समय और पैसे के द्वारा इंसान सदैब स्वस्थ बना रह सकता है।एलोपेथिक इलाज यदि हमारी एक बीमारी को ठीक करती  है तो कही दूसरे अंग पर उसका ख़राब असर हो रहा होता है। उनके सेवन करने से इंसान दवाइयों का गुलाम बन जाता है। उसका ध्यान हमेशा दवाइयों  और बीमारियों पर लगा रहता है।वह  दुनिया से निराश रहता है। 
       भौतिक समृद्धि के कारण साधनों के भंडार पर बैठकर भी मानव शांति महसूस नहीं कर रहा है। उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही है। उसे अधूरेपन का अहसास हर समय बना रहता है। यह अधूरेपन का अहसास उसे मानसिक रोगी बना देता है। योगासन के द्वारा मानसिक शांति हमें दुनिया से जोड़कर सामाजिक उत्थान में सहायक होती है। शहरी सभ्यता में शारीरिक और मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है  योगासन के कई रूप से हम मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त करते है  .शवासन ,सुदर्शन क्रिया और सांसो  पर ध्यान केंद्रित करने से हमारी एकाग्रता बढ़ती है। जिससे मन शांत होकर किसी  कार्य में निपुणता हासिल करता है। मानव मे आत्मविश्वास का समावेश हो जाता है। हममें अध्यात्म से जुड़ने की सामर्थ्य बढ़ जाती है। इंसान और ईशवर एकाकार हो जाते है।
     योग हमें जोड़ता है योग का अर्थ हमें अपने,समाज और अन्य लोगो से जोड़ने का काम करता है। योग के पांच रूप है हठ  , कर्म, राज, सठ और कर्म योग। ये हमारे जीवन के सभी पहलुओं से जुड़े हुए है। 
     हमारे योग को महत्ता दिलाने में विवेकानंद जी का  बहुत बड़ा योगदान रहा है। उनके प्रयासों से हमारे धर्म और योग की तरफ लोगो का रुझान बड़ा है । हमारी संस्कृति और योग के महत्व को अंतरास्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उसके बाद अन्य महर्षियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगो को जागरूक किया। 
     आपको जानकर हैरानी होगी आदियोगी शिवजी को कहा जाता है। शिवजी ने सप्त ऋषियों को योग का ज्ञान दिया था। उनके द्वारा समस्त मानव जाति योग को जान  सकी। 
        मोदी जी के प्रयासों के द्वारा 21 जून का दिन unesko ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्वीकार किया। इस साल  दूसरा योग दिवस मनाया गया। इसकी  भव्यता ने गिनिस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में 7  नए आयाम  बना दिए। इन्हे तोडना बहुत मुश्किल होगा।फरीदाबाद में  एक लाख लोगो  के द्वारा एक स्थान पर योग करना ,408 लोगो ने शीर्षासन किया,एक इंसान ने  पीठ पर ३६६०० ग्राम  वजन रखकर एक मिनट में 51 पुशअप किये । ये सभी  असाधारण काम है। 
     भारत के आलावा सभी देश योग सीखने में रूचि दिखा रहे है। यह हमारा स्वाभिमान बढ़ाने की बात है यहाँ तक की इस बार   190  देशो ने इस दिन भव्य रूप में योग दिवस मनाया ।उनके योगदान ने धर्म की कटटरता खत्म कर दी। मुस्लिम देशो ने बढ़चढ़कर भाग लिया। 
        हमारे देश के कई दिग्गजों ने  इस दिन का बहिष्कार किया। आप उनके बहिष्कार को किस रूप में देखेंगे। यह एक इंसान को निचा दिखाने की बात नहीं बल्कि अपनी संस्कृति का बहिष्कार करना है। कुछ लोग रोजमर्रा योग करते है। उन्हें इससे बहुत लाभ भी महसूस हुआ है। लेकिन विशेष रूप  से  उन्होंने इस दिन योग न करके कौन सा सुख हासिल किया मुझे समझ नहीं आया। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...