#durgarupini aj ki nari

                             दुर्गारुपिणी आज की नारी 

   
 आजकल देवी की पूजा हो रही है। जबकि भारत में बच्चीयो की संख्या बहुत कम हो गयी है। सरकार  के सारे प्रयास नाकाम हो रहे है। दिल्ली जैसे शहर में दिनोदिन लड़कियों की संख्या में इजाफा नही हो पा  रहा है। कन्या पूजन के लिए लडकिया नही मिल पाती। यदि लड़कियों की संख्या इसी तरह कम होती रही तो आने वाले समय में लड़को के लिए बहुए कहाँ से मिलेंगी। यदि बेटी नही होगी तो बहन ,भाभी ,माँ,बहु ,बुआ जैसे अनेको रिश्ते अपना अस्तित्व खो देंगे।  चीन और ताईवान जैसे देशो में लड़कियों की कमी के कारण वे दूसरे देशो से विवाह सम्बन्ध बनाने लगे है। सबसे पहले चीन में अल्ट्रासॉउन्ड मशीन का प्रयोग हुआ। उसके कारण चीन में 3 लड़को के ऊपर केवल 1 लड़की है। चीन में केवल अमीर लड़को की शादी सम्भव हो पाती है। 
        भारत में हरियाणा और पंजाब में लड़कियों की बहुत ज्यादा कमी हो गयी है। यहाँ भी लड़को को शादी करने के लिए दूसरे राज्यो से,गरीब  लडकिया खरीदनी पड़ती है। सभ्य घर की लड़की और खरीदी हुई लड़कियों में अंतर होता है। उनके संस्कार ,भाषा बिलकुल अलग होती है। सम्भ्रांत परिवार की ना होने ,परिवार से दूर होने का खामियाजा उन्हें सारी जिंदगी उठाना पड़ता है। उनके साथ मानवीय व्यवहार नही किया जाता। उनके साथ बुरा सलूक होने पर उनकी मदद के लिए कोई तैयार नही होता। वहाँ की सरकार ,कानून उनकी मदद नही कर पाता। ये सारे काम करने के बाद भी यौन गुलाम का जीवन जीती है। जिनका दर्द समझने वाला कोई नही होता। 
         हम सोचते है लड़कियों की संख्या कम होने से उनकी कीमत बढ़ जाएगी ऐसा नही हो सकता बल्कि उनके आभाव में अराजकता बढ़ जाएगी। लड़कियों के साथ अपहरण ,बलात्कार जैसी घटनाओ की तदाद बढ़ जाएगी। औरत की  जरूरत आदमी की मूल आवश्कताओ में से एक है। यदि सही ढंग से पूरी नही होगी तो वह इस जरूरत को गलत तरीके से पूरा करेगा। तब फिर से लड़कियों को पहरे में रखना शुरू कर दिया जायेगा जैसे आज से कई साल पहले तक औरत घर की चार दीवारी तक सीमित थी। उसकी शिक्षा,नोकरी के बारे में कोई सोचता भी नही था। उसका अस्तित्व न होने के सामान था। 
    मैने हरियाणा के एक इंसान से पूछा -"तुम्हारी कितनी संतान है।"
     उसने जबाब दिया -"चार। "
     मैने पूछा -"बेटी क़ितनी है। "
     उसने कहा -बेटी कोई, संतान नही होती। 
     फिर भी जबरदस्ती पूछने पर 
     उसने कहा -"दो."
     आज भी ग्रामीण इलाके में लड़कियों की गिनती संतान के रूप में की ही नही जाती। 
    में आपका ध्यान आज की पढ़ी लिखी नारी पर केंद्रित करना चाहती हूँ। आज की नारी पढ़ने के बाद अच्छी नोकरी करना पसंद करती है। वह शादी सही समय आने पर ही करती है अब उसका मूल लक्ष्य शादी नही रहा।  उसके बाद उसमे आत्मनिर्भरता आ जाती है। वह सबकी मदद करने के लिए सतत तैयार रहती है। मायका,ससुराल वह अपने गुणों से रोशन करना चाहती है। उसके गुणों की खुशबु अब घर तक सीमित नही रहना चाहती बल्कि वह दूर तक अपने गुणों का प्रसार करना चाहती है। 
      नारी अबला नही रही बल्कि सबल बन चुकी है। आपने नितीश कटारा कांड के बारे में सुना होगा। उसकी दर्दनाक मौत का गम पिता सहन नही कर सके। जल्दी दुनिया से कूच कर गए। उनकी माँ नीलम कटारा ने इतने ख़राब हालात का सामना करते हुए, सभी ताकतवर और सरमायेदार  गुनहगारो का सामना 14 साल तक करके उन्हें आजन्म करावास करवा के दम  लिया। नीलम कटारा की सारी जिंदगी सुखो का वरदान रही थी बुढ़ापे में बेटे का दुःख उन्हें तोड़ नही सका बल्कि उनकी मजबूती ने दुसरो में लड़ने की हिम्मत दे दी। 
      जो औरत घर को सुचारू रूप से चला सकती है। हर एक की सभी जरूरत पूरी कर सकती है। उसके एवज में किसी से कुछ नही मांगती बल्कि वही घर की धुरी होती है। इसके बाबजूद उसे सम्मान का हकदार नही समझा जाता। जब नारी के पास अधिकार मिल जाते है तब वह दुर्गा के समान असंभव कार्य भी कर दिखाती  हे। 
   वह शहर से दूर रह कर बेख़ौफ़ नोकरी करने से  डरती नही है। बड़े शहरो में आपको बहुत सारी लडकिया अपने दम पर काम करती दिखाई दे जाएँगी। उनके लिए घूमने  जाने के लिए किसी पुरुष साथी की जरूरत  नही होती बल्कि हर तरह की गाड़ियों में आपको किसी भी समय लडकिया दिखाई दे जाएँगी। 
      कुछ समय पहले मैने एक लड़कियों के घर में जिसमे कोई मर्द नही था। किसी लड़के को गलत व्यवहार करते देखा। उन चारो लड़कियों ने उसकी भरी सड़क पर पिटाई कर दी। पहले तो उस लड़के को पीटते देखकर मै हैरान रह गयी। बाद में उसके कृत्य पर बहुत हंसी आयी। 
      ये लडकिया किसी रिश्ते के लिए बोझ नही है। बल्कि हर रिश्ते के लिए  जरूरत बन गयी है। अभिभावक कर्मठ लड़की में अपना भविष्य देखने लगे है।2.  भाई अपनी काबिल बहन से मिलवाने में गौरव का अनुभव करते है।3  ससुराल वाले बहुओ को सम्मान देने लगे है। सभ्य लडकिया कुल की मर्यादा बढ़ाती है। जैसे काबिल लड़के के गुण सुनाइ देते है वैसे ही काबिल लड़कियों की तारीफ होने लगी है। ओलम्पिक में इस बार सारे मैडल केवल नारी शक्ति ने प्राप्त किये। 
   बहुत सारी जगहों  पर नारियो को आरक्षण दिया गया है। जैसे पंचायत में 33 % ने गाँवो की हालत बदल दी है।१  सूखे गाँवो में तालाब खुदवाये। 2 सूखती नदी को जिन्दा कर दिया।3  शराबीयो को रोकने के लिए शराबबंदी आंदोलन चलवाया।4  एक सरपंच ने शिक्षा के महत्व को समझ कर अपनी जमीन पर विद्यालय खुलवाया और शिक्षक का प्रबंध किया।5  सड़क बनवाई उनपर बिजली का प्रबंध करवाया।  पिंक गैंग  की सम्पत राय जैसी ग्रामीण और अशिक्षित  नारी जब हालत को बदल सकती है। तो शिक्षित नारी को आगे बढ़ने का मौका दे कर देखो यदि उसके जज्बे को उड़ान भरने का मौका मिले तो एक दिन वह इंदिरा गाँधी ,सुषमा स्वराज जैसी लौह नारी बन कर दिखा देंगी। इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री, एक अबला कमजोर नारी समझ कर बनाया गया था। लेकिन उन्होंने उस ज़माने के धुरंधरो के सामने अपनी काबिलियत का सिक्का जमा कर, उन्हें राजनीती से अलग दूसरा रास्ता दिखा दिया। जिन्होंने उसे अपने हाथ की कठपुतली बनाना चाहा था। 
      नारी पर भरोसा रखने के सुखद परिणाम देखने में मिल रहे है। आज कानून और माहौल नारी  के साथ  है इस का फायदा हमें दूरगामी परिणाम दिखायेगा। नारी हमेशा से मेहनती ,अवगुणों से दूर रही है। वह एक साथ कई काम करने में सक्षम है।  उसकी भावुकता अब उसकी कमजोरी नही बल्कि उसकी ताकत के रूप में देखि जानी चाहिए। 
      

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