प्रदूषित माहौल
दीवाली के बाद दिल्ली के वातावरण में बहुत बदलाव आ गया है। दिल्ली के वातावरण मे से जरूरी गेसे गायब हो गयी है। हर तरफ धुंध छायी हुए है। दृश्यता बहुत कम हो गयी है। गाड़ी चलाते समय आगे का दृश्य दिखाई नही दे रहा है। जिसके कारण यातायात धीरे -धीरे खिसक रहा है। हर तरफ जाम लग रहा है।
साँस लेने में बहुत परेशानी हो रही है। लोगो को आँखों में जलन का सामना करना पड रहा है। अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ़ गयी है। दिल के मरीज ओर रक्तचाप के मरीजो की हालत काबिले गौर है। हर और हाहाकार मचा हुआ है। दिल्ली और उत्तरप्रदेश में विद्यालय प्रदूषण के कारण बंद कर दिए गए है।
दीवाली के बाद हमें सूरज की किरणे दिखाई नहीं दे रही है। इसका मतलब यह नही है कि सूरज निकल नही रहा बल्कि सूरज की किरणे प्रदूषण के कारण धरती तक पहुँच नही रही है। धुप के अभाव में ठंड बढ़ गयी है।
दीवाली के बाद हमें सूरज की किरणे दिखाई नहीं दे रही है। इसका मतलब यह नही है कि सूरज निकल नही रहा बल्कि सूरज की किरणे प्रदूषण के कारण धरती तक पहुँच नही रही है। धुप के अभाव में ठंड बढ़ गयी है।
सरकार ने वातावरण को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई है। इससे पहले वातावरण को लेकर सरकार सजग नही हुई थी। पहले चीन और मेक्सिको जैसे देशो में वातावरण को लेकर सरकार जागरूक हुई थी। भारत का बहुत बुरा हाल हो गया है। प्रदूषण की मात्रा १० से 13 % तक बढ़ गयी है। यानि जो तत्व हवा में १०० होने चाहिए उनकी संख्या 1000 से ऊपर पहुँच गयी है।
विदेशियो की निगाह में दिल्ली पहले भी गन्दी कहलाती थी। उसमे ध्वनि, मृदा ,जल वायु के प्रदुषण थे। १ ध्वनि प्रदुषण से बचने के लिए कानो में रुई लगाई जा सकती है। या किसी शांत कोने को ढूंढा जा सकता है।
२ साफ जल को घर से लेकर जा सकते है। हम बचपन में कही से भी पानी पी लेते थे। कभी पानी को लेकर परेशानी का सामना नही हुआ। आज हमें सबसे पहले शुद्ध पानी बहुत सारे पैसे देकर खरीदना पड रहा है।
२ साफ जल को घर से लेकर जा सकते है। हम बचपन में कही से भी पानी पी लेते थे। कभी पानी को लेकर परेशानी का सामना नही हुआ। आज हमें सबसे पहले शुद्ध पानी बहुत सारे पैसे देकर खरीदना पड रहा है।
मेरे साथ तीन दिन के लिए राधा दिल्ली से बाहर घुमने गयी। मेने उसके साथ एक बहुत भारी बेग देखा। उसमे उसने तीन दिनों के लिए पीने का पानी भरा हुआ था। मैं हैरान रह गयी क्योंकि - मेने पहली बार एक भारतीय को कई दिन के सफर के लिए घर से पानी ले जाते देखा था।
3 . प्रदूषित जमीन के प्रकोप से उससे दूर जाकर बचा जा सकता है।
४. हवा के प्रदुषण के लिए हम कहा जाये। पहले ताजी हवा पाने के लिए खिड़की दरवाजे खोल देते थे। आज मुझे खिड़की दरवाजे बंद रखने की सलाह दी जा रही है .घर में हवा शुद्ध करने का यंत्र लगवाने की सलाह दी जा रही है। नाक पर मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा है। हमें बचपन से मुँह ढक कर सोने के लिए मना किया जाता था। कहा जाता था- छोड़ी हुए गन्दी हवा फिर साँस में चली जाएगी। मुँह खोलकर ताजा हवा में साँस लो। अब मुझे नाक पर मास्क लगाते हुए घुटन हो रही है
मुझे लगता है आने वाले समय में हमें भी अंतरिक्ष यात्रियों के सामान ऑक्सीजन के सिलेंडर पीठ पर बांध कर चलना पड़ेगा। ताजी और प्राकृतिक हवा के मायने ही ख़त्म हो जायेंगे।
हमने विद्यालय में बच्चो को पटाखे न चलाने की हिदायत दी परिणामस्वरूप कई सालो के प्रयास से बच्चे जागरूक हुए उन्होनें पहले से कम पटाखे चलाये। लेकिन जितने भी चले उनके कारण बहुत नुकसान देखने में आ रहा है।
दिल्ली में गाड़ियों की बहुतायत के कारण, जाम लगने से, पैट्रॉल की खपत बढ़ने के कारण, मानसिक और भौतिक परेशानी का सामना करना पड रहा है। पेट्रोल के वाहनों की कमी करने के लिए 15 साल से ज्यादा वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है। उनके आलावा डीजल की गाड़ियों की मियाद 10 साल कर दी गयी है। लेकिन दिल्ली से बाहर से आने वाले वाहनों का क्या करे जिन पर कोई नियम लागू नही होता। आप जान कर हैरान होंगे। दिल्ली बॉर्डर से जुड़े इलाको में सबसे ज्यादा प्रदुषण पाया जा रहा है। जैसे आनंदविहार।
गाड़ियों के धुंए के कारण जन -जीवन बेहाल है। साथ ही हरियाना ,पंजाब और उत्तरप्रदेश में पराली (पुरानी फसल के बेकार अंश ) जलाये जाने से, उनका धुँआ, दिल्ली तक आने के कारण हर तरफ धुँए के बादल लोगो को परेशान कर रहे है। लोगो को नई फसल बोने के लिए ये बहुत आसान उपाय लगता है।पिछले साल मैं दिसम्बर में दिल्ली से बाहर घूमने गयी थी। मुझे खेतो की मिटटी काले रंग की दिखाई दी जबकि उत्तर भारत की मिटटी पीली होती है। ये मिटटी का रंग पराली जलाने के कारण काला हुआ था। अब यहाँ की सरकारे इसके प्रति सजग होगयी है ,ऐसे लोगो पर जुरमाना लगाया जा रहा है।
१. सरकार ने अनेक जगहों पर एयर प्यूरीफायर लगाने के आदेश दिए है 2. इसके आलावा मिस्ट फॉउंटेन लगाने के सुझाव दिए है।3. अब बड़ी सड़को की सफाई वेक्यूम क्लीनर से करने के बारे में सोचा जा रहा है। ४. नए निर्माण से उड़ने वाले हानिकारक तत्वों को रोकने के आदेश जारी किये गए है। यदि इन सबका सही तरीके से कार्यान्वन हुआ तो हमें आने वाले समय में सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे।५. अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए।
सरकार के उपयो के अतिरिक्त आम जनता को योगदान देना चाहिए। १. यदि आप कही कूड़ा जलता हुआ देखे उसे मना करे। २. सरकारी वाहनों से सफर करे। अपनी गाड़ी का कम उपयोग करे। ३. अधिकाधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करे। वरना आने वाली पीढ़ी को एक अतिरिक्त बोझ के रूप में ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर घर से चलना पड़ेगा। सोच के देखिए उस समय शारीरिक काम करना कितना मुश्किल हो जायेगा। क्योंकि शारीरिक काम करते हुए हमें ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ती है।
3 . प्रदूषित जमीन के प्रकोप से उससे दूर जाकर बचा जा सकता है।
४. हवा के प्रदुषण के लिए हम कहा जाये। पहले ताजी हवा पाने के लिए खिड़की दरवाजे खोल देते थे। आज मुझे खिड़की दरवाजे बंद रखने की सलाह दी जा रही है .घर में हवा शुद्ध करने का यंत्र लगवाने की सलाह दी जा रही है। नाक पर मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा है। हमें बचपन से मुँह ढक कर सोने के लिए मना किया जाता था। कहा जाता था- छोड़ी हुए गन्दी हवा फिर साँस में चली जाएगी। मुँह खोलकर ताजा हवा में साँस लो। अब मुझे नाक पर मास्क लगाते हुए घुटन हो रही है
मुझे लगता है आने वाले समय में हमें भी अंतरिक्ष यात्रियों के सामान ऑक्सीजन के सिलेंडर पीठ पर बांध कर चलना पड़ेगा। ताजी और प्राकृतिक हवा के मायने ही ख़त्म हो जायेंगे।
हमने विद्यालय में बच्चो को पटाखे न चलाने की हिदायत दी परिणामस्वरूप कई सालो के प्रयास से बच्चे जागरूक हुए उन्होनें पहले से कम पटाखे चलाये। लेकिन जितने भी चले उनके कारण बहुत नुकसान देखने में आ रहा है।
दिल्ली में गाड़ियों की बहुतायत के कारण, जाम लगने से, पैट्रॉल की खपत बढ़ने के कारण, मानसिक और भौतिक परेशानी का सामना करना पड रहा है। पेट्रोल के वाहनों की कमी करने के लिए 15 साल से ज्यादा वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है। उनके आलावा डीजल की गाड़ियों की मियाद 10 साल कर दी गयी है। लेकिन दिल्ली से बाहर से आने वाले वाहनों का क्या करे जिन पर कोई नियम लागू नही होता। आप जान कर हैरान होंगे। दिल्ली बॉर्डर से जुड़े इलाको में सबसे ज्यादा प्रदुषण पाया जा रहा है। जैसे आनंदविहार।
गाड़ियों के धुंए के कारण जन -जीवन बेहाल है। साथ ही हरियाना ,पंजाब और उत्तरप्रदेश में पराली (पुरानी फसल के बेकार अंश ) जलाये जाने से, उनका धुँआ, दिल्ली तक आने के कारण हर तरफ धुँए के बादल लोगो को परेशान कर रहे है। लोगो को नई फसल बोने के लिए ये बहुत आसान उपाय लगता है।पिछले साल मैं दिसम्बर में दिल्ली से बाहर घूमने गयी थी। मुझे खेतो की मिटटी काले रंग की दिखाई दी जबकि उत्तर भारत की मिटटी पीली होती है। ये मिटटी का रंग पराली जलाने के कारण काला हुआ था। अब यहाँ की सरकारे इसके प्रति सजग होगयी है ,ऐसे लोगो पर जुरमाना लगाया जा रहा है।
१. सरकार ने अनेक जगहों पर एयर प्यूरीफायर लगाने के आदेश दिए है 2. इसके आलावा मिस्ट फॉउंटेन लगाने के सुझाव दिए है।3. अब बड़ी सड़को की सफाई वेक्यूम क्लीनर से करने के बारे में सोचा जा रहा है। ४. नए निर्माण से उड़ने वाले हानिकारक तत्वों को रोकने के आदेश जारी किये गए है। यदि इन सबका सही तरीके से कार्यान्वन हुआ तो हमें आने वाले समय में सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे।५. अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए।
सरकार के उपयो के अतिरिक्त आम जनता को योगदान देना चाहिए। १. यदि आप कही कूड़ा जलता हुआ देखे उसे मना करे। २. सरकारी वाहनों से सफर करे। अपनी गाड़ी का कम उपयोग करे। ३. अधिकाधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करे। वरना आने वाली पीढ़ी को एक अतिरिक्त बोझ के रूप में ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर घर से चलना पड़ेगा। सोच के देखिए उस समय शारीरिक काम करना कितना मुश्किल हो जायेगा। क्योंकि शारीरिक काम करते हुए हमें ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ती है।

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